सियासी खींचतान खुलकर सामने : ‘जनता की सेवा’ बनाम ‘षड्यंत्र’ की बहस
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Mar 2, 2026
विधायक और पालिका अध्यक्ष के पति आमने-सामने
उन्नाव। शहर की सियासत इन दिनों सड़क से ज्यादा सोशल मीडिया पर गरम है। सदर विधायक पंकज गुप्ता और नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा के पति प्रवीण मिश्रा के बीच सार्वजनिक तौर पर आरोप–प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। एक पूर्व संविदा कर्मी की शिकायत ने इस पूरे विवाद को हवा दी, जिसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
शिकायत से शुरू हुआ मामला
मानधाता खेड़ा निवासी पूर्व संविदा कर्मी आकाश ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 26 फरवरी की रात उसके साथ मारपीट की गई। उसने आरोप प्रवीण मिश्रा और उनके लोगों पर लगाया। शिकायत सामने आते ही मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। इस पर प्रवीण मिश्रा ने पलटवार करते हुए एसएसपी समेत अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने सीधे तौर पर विधायक पंकज गुप्ता और उनके खास सहयोगी पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे विधायक व उनके करीबी लोग हैं।
सोशल मीडिया पर सीधी भिड़ंत
शिकायतों का दौर कागजों तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी बात रखी। रविवार की सुबह विधायक पंकज गुप्ता ने एक भावनात्मक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “भैया क्षमा करो, हमको जनता की सेवा करने दें।” इस एक लाइन ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। समर्थकों ने इसे रिश्तों में नरमी का संकेत बताया, तो विरोधियों ने इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा। जवाब में शाम को प्रवीण मिश्रा ने भी पोस्ट कर तंज कसा। उन्होंने लिखा, “निजी स्वार्थ की नालियां सूखने लगी तो आप षड्यंत्रों की नदियां बहाने लगे।” साथ ही यह आरोप भी लगाया कि पिछले तीन साल से विधायक और उनके खास सहयोगी द्वारा उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।
रिश्ते, आरोप और राजनीतिक संकेत
दिलचस्प बात यह है कि विधायक पंकज गुप्ता प्रवीण मिश्रा को अपना छोटा भाई बताते रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, खासकर सपा और बसपा से जुड़े लोग, पार्टी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे इसे परिवार के बीच की गलतफहमी बताते हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि विधायक एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह सीधे टकराव से बचते हुए संतुलित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और खुलकर विरोध की स्थिति से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं प्रवीण मिश्रा का रुख अधिक आक्रामक नजर आ रहा है। दूसरी ओर, प्रवीण मिश्रा इसे योजनाबद्ध राजनीतिक दबाव का हिस्सा बता रहे हैं। उनका दावा है कि वे लंबे समय से निशाने पर हैं और अब खुलकर आरोप लगाकर अपनी बात सार्वजनिक मंच पर रख रहे हैं।
वर्चस्व की होड़ में बंटे कार्यकर्ता
पार्टी संगठन के भीतर भी इसे लेकर बेचैनी है। कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि व्यक्तिगत नजदीकियों और वर्चस्व की होड़ ने कार्यकर्ताओं को दो हिस्सों में बांट दिया है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है कि वे किस लाइन का पालन करें। इसका असर विकास कार्यों की प्राथमिकताओं और समन्वय पर भी पड़ सकता है।
चुनाव से पहले संगठन में दरार
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह की खेमाबंदी लंबे समय तक चलती रही तो इसका असर अगामी यूपी चुनावी रणनीति और मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि पर पड़ेगा। आम लोग भी सवाल उठा रहे हैं कि जब अपने ही समर्थक आपस में उलझे हैं तो जनहित के मुद्दों पर एकजुटता कैसे बनेगी। फिलहाल शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक हस्तक्षेप नहीं हुआ है, लेकिन अंदरखाने बातचीत के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद सुलह की ओर बढ़ता है या फिर सियासी दरार और गहरी होती है।
पुलिस की भी नजर
मामले ने जब सोशल मीडिया पर जोर पकड़ा तो पुलिस भी सतर्क हो गई। पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की जा रही है और शिकायतों की जांच प्रक्रिया जारी है। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह यह विवाद खुलकर सामने आया है, उसने स्थानीय राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और दोनों पक्षों की अगली चाल इस सियासी टकराव की दिशा तय करेगी।
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