मतदाता सूची की बड़ी सफाई : 4.06 लाख मतदाताओं के नाम कटने तय
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Fri, Dec 26, 2025
शिफ्ट हुए, दिवंगत और डुप्लीकेट नामों पर कार्रवाई, प्रशासन ने जारी किए आंकड़े
उन्नाव। जिले में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) शुक्रवार को अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। चुनाव आयोग के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में जिले की पूरी मतदाता सूची की घर-घर जाकर जांच की गई। प्रशासन के मुताबिक उन्नाव में एसआईआर का कार्य शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके नतीजे काफी अहम और चौंकाने वाले सामने आए हैं। इस अभियान में सामने आया है कि जिले के कुल 23 लाख 25 हजार 53 मतदाताओं में से 4 लाख 6 हजार 776 मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ये वे मतदाता हैं जो या तो लंबे समय से अपने पते पर नहीं मिले, स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, दिवंगत हो चुके हैं या फिर जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। जांच के दौरान सबसे अधिक संख्या उन मतदाताओं की रही जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके हैं। ऐसे मतदाताओं की संख्या 1 लाख 94 हजार 212 बताई गई है। इसके अलावा 85 हजार 530 मतदाता ऐसे हैं जो अभियान के दौरान अपने पते पर खोजे ही नहीं जा सके। वहीं 81 हजार 738 मतदाता दिवंगत पाए गए। करीब 40 हजार 810 ऐसे मतदाता भी मिले जिनके नाम एक से अधिक जगहों की मतदाता सूची में दर्ज हैं। अन्य विभिन्न कारणों से 4 हजार 486 मतदाताओं को भी सूची से अलग किया गया है। अभियान के दौरान एक और बड़ी समस्या सामने आई है। जिले में 3 लाख 4 हजार 134 मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनके माता-पिता के नामों की मैपिंग वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में चुनाव आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं। इन मतदाताओं को अब अपना नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए आयोग द्वारा तय 13 में से कोई एक वैध प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। उपजिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम वित्त एवं राजस्व सुशील कुमार गोड ने बताया कि एसआईआर अभियान के तहत सभी बूथ लेवल अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी गंभीरता से काम किया है। उन्होंने बताया कि मैपिंग न हो पाने वाले मतदाताओं की सूची तैयार कर ली गई है और आगे की कार्रवाई चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी आशुतोष मिश्रा ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम 2003 की सूची से मेल नहीं खा पाए हैं, उन्हें 31 दिसंबर के बाद निर्धारित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि तय समय सीमा में प्रमाण नहीं दिया गया तो उनके नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि अब तक वितरित किए गए गणना फार्मों में से 7 हजार 386 फार्म ऐसे हैं जो अभी तक बीएलओ के पास वापस जमा नहीं हो सके हैं। प्रशासन का कहना है कि इन फार्मों को लेकर भी अंतिम स्तर पर समीक्षा की जा रही है। एसआईआर अभियान के बाद जिले की मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव तय माने जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इस पूरी कवायद का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।
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