उन्नाव चमड़ा उद्योग : अब रूस, यूके, जापान और यूरोपीय बाज़ार की ओर बढ़ रहा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Nov 29, 2025
असद कमाल इराकी– मौजूदा हालात में अमेरिका में व्यापार मुश्किल, वार्ता जारी

उन्नाव। जिले का चमड़ा उद्योग तीन महीने से भारी दबाव में है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय चमड़ा उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ बढ़ाया था। इसका सीधा असर दही चौकी और बंथर के औद्योगिक क्षेत्र की टेनरियों और चर्म उत्पाद इकाइयों पर पड़ा। अब हालत ये है कि करीब 500 करोड़ रुपये का तैयार माल गोदामों में अटक गया है। नए ऑर्डर भी रोक दिए गए हैं और कई इकाइयां आधी क्षमता पर चल रही हैं।
उद्योग जगत के अनुसार, उन्नाव से हर साल करीब दो हजार करोड़ रुपये का माल अमेरिका जाता था। जैकेट, जूते, बेल्ट, सैडलरी और लेदर एक्सेसरीज यहां की पहचान थे। लेकिन 27 अगस्त के बाद लगी 50 फीसदी ड्यूटी से भारतीय उत्पाद अचानक महंगे पड़ गए। अमेरिकी खरीदार पीछे हटे तो ऑर्डरों की रफ्तार थम गई। अनुमान है कि तीन महीने में लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ। कई कंपनियों को शिपमेंट रोकने पड़े, क्योंकि बढ़ी लागत पर उत्पाद वहां बिकना मुश्किल है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थिति उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंच गई। पिछले महीने चर्चा चली थी कि अमेरिका टैरिफ में 15-16 प्रतिशत की कमी कर सकता है, जिससे बाजार में हल्की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब बातचीत ठंडी पड़ती दिख रही है।
कंपनियां अब नए बाज़ार तलाश रहीं
उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष ताज आलम ने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन रास्ता बंद नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अमेरिका की जगह अब रूस, यूके, दुबई, जापान और कई यूरोपीय देशों में व्यापार बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इन बाज़ारों में शुल्क कम है और प्रतिस्पर्धा भी संतुलित दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि मुक्त व्यापार वाले देशों में संभावनाएं बढ़ रही हैं और निर्यातकों को मजबूरन अपना ध्यान वहां शिफ्ट करना पड़ रहा है।
टैरिफ से भारतीय माल 50% महंगा, मांग सीधे घटी
क्षेत्रीय चमड़ा निर्यात परिषद के अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने कहा कि शुल्क बढ़ने के बाद भारतीय प्रॉडक्ट अमेरिका में लगभग पचास फीसदी महंगे हो गए। नतीजा यह हुआ कि अमेरिकी कंपनियों ने पहले लिए ऑर्डर भी रोक दिए। कुछ खरीदार अब उन देशों से सामान उठा रहे हैं जहां टैरिफ कम है और कीमतें नीचे हैं। उनका कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ता जारी है, इसलिए हालात सुधरने की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।
उद्योग की मांग: स्पष्ट नीति और राहत पैकेज
स्थानीय उद्यमियों की राय है कि सरकार को इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत उपाय करने चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारतीय कंपनियां फिर मजबूत होकर खड़ी हो सकें। कई इकाइयों में उत्पादन घटा है और कुछ में मजदूर अस्थायी रूप से घर भेजे जा चुके हैं। उद्योग को डर है कि मसला लंबा खिंचा तो असर रोजगार तक पहुंच जाएगा। तीन महीने से चल रही अनिश्चितता ने उन्नाव के चमड़ा बाजार की रौनक कम कर दी है। कारोबारी समझ रहे हैं कि हालात चाहे जैसे हों, अब उन्हें नए बाजारों की तलाश और लागत संतुलन के लिए नए मॉडल बनाने ही होंगे। अमेरिकी बाज़ार से उम्मीद बाकी है, पर अब भविष्य की रणनीति पहले जैसी नहीं रहेगी।
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