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खतरा सिर पर और पालिका बेखबर : कमजोर छज्जों और दीवारों के नीचे से गुजर रहे लोग

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Aug 21, 2026
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जर्जर भवनों की संख्या 121 तक पहुंची, कार्रवाई का इंतजार

उन्नाव। शहर में जर्जर भवनों की सूची तैयार है, खतरे वाली इमारतें चिह्नित हैं और भवन स्वामियों को नोटिस भी भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद इन भवनों से सटे रास्तों पर लोगों की आवाजाही जारी है। बारिश के बीच कमजोर छज्जे और दीवारें कब जवाब दे दें, इसका भरोसा नहीं। नगर पालिका ने 121 भवनों को जर्जर मानकर अपनी फाइल में दर्ज तो कर लिया, लेकिन इन्हें सुरक्षित कराने की कवायद अभी नोटिस से आगे कितनी पहुंची, यह सवाल शहर के सामने है। पुराने शहर के कई हिस्सों में मकान सड़क और दुकानों से सटे हैं। इनकी उम्र अधिक होने के कारण कहीं छज्जे कमजोर हैं तो कहीं दीवारों पर दरारें दिखाई देती हैं। बारिश का पानी पहुंचने के बाद ऐसे भवनों के कमजोर हिस्सों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। खासकर बाजार और व्यस्त रास्तों पर यही स्थिति ज्यादा चिंता पैदा करती है।

हादसा बता चुका है खतरे की हकीकत

6 जुलाई की रात आइबीपी चौराहे के सामने मैरिज हाल का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया था। मलबा सड़क किनारे खड़ी कार पर जा गिरा और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसा रात में हुआ, इसलिए लोगों की भीड़ वहां नहीं थी और जनहानि टल गई। दिन में यही हिस्सा गिरता तो राहगीरों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। शहर में ऐसा पहली बार नहीं हुआ। वर्ष 2024 में बारिश के दौरान बड़ा चौराहा पर पुराने मकान का छज्जा गिरने से आसपास के दुकानदारों और खरीदारी करने आए लोगों में अफरातफरी मच गई थी। घटना के बाद जर्जर भवनों को लेकर नगर पालिका ने सर्वे शुरू कराया था।

133 की सूची, अब 121 पर अटकी कार्रवाई

पहले नगर पालिका के रिकॉर्ड में 133 जर्जर भवन दर्ज थे। बाद में शहर के सभी वार्डों में सर्वे कराया गया। इसमें 121 भवन जर्जर हालत में मिले। इन भवनों के स्वामियों को नोटिस भेजे गए हैं। यहां सवाल सिर्फ नोटिस भेजने का नहीं, बल्कि उन पर अमल कराने का है। जिन भवनों को पालिका ने खुद जर्जर मानकर सूची में शामिल किया है, उनके आसपास रहने और गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। यदि भवन स्वामी नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं करता है तो ऐसे भवनों की निगरानी, खतरे वाले हिस्से को सुरक्षित करने और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी किस स्तर पर होगी, यह तस्वीर अभी साफ नहीं है।

बारिश में बढ़ता है खतरा

जर्जर भवनों के लिए बारिश का मौसम सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। लगातार नमी से पुरानी दीवारों और छज्जों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ऊपर से कमजोर दिख रहा हिस्सा अचानक नीचे आ सकता है। शहर के व्यस्त बाजारों में यह खतरा और गंभीर है, क्योंकि यहां दिनभर राहगीरों, दुकानदारों और वाहनों की आवाजाही रहती है। नगर पालिका के पास 121 भवनों की सूची होने के बाद अब जरूरत सिर्फ कागजों में उनकी पहचान रखने की नहीं, बल्कि मौके पर उनकी स्थिति की निगरानी करने की है। खासकर उन भवनों पर तत्काल ध्यान जरूरी है, जिनके कमजोर हिस्से सड़क या सार्वजनिक स्थान की तरफ हैं।

हादसे के बाद नहीं, पहले चाहिए कार्रवाई

शहर में जर्जर भवनों की समस्या पुरानी है। हर बारिश में पुराने मकानों को लेकर खतरा बढ़ता है और कोई हिस्सा गिरने के बाद मामला फिर चर्चा में आ जाता है। इस बार पालिका ने सर्वे कराकर 121 भवन चिह्नित किए हैं। ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर है कि इन भवनों को सुरक्षित कराने के लिए आगे क्या किया जाता है। ईओ राम आसरे कमल ने बताया कि सर्वे के बाद 121 जर्जर भवन चिह्नित किए गए हैं। सभी भवन स्वामियों को नोटिस भेजकर सुरक्षित तरीके से भवन ध्वस्त कराने के लिए कहा गया है।

दो साल से नोटिस, खतरा जस का तस

दो साल में इन भवनों को सुरक्षित कराने के लिए पालिका ने क्या ठोस कदम उठाए? भवन स्वामियों को नोटिस भेजने की कार्रवाई लगातार होती रही, लेकिन जर्जर भवनों के कमजोर हिस्सों को हटाने या खतरनाक भवनों को ध्वस्त कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई। अब नए सर्वे में 121 भवन चिह्नित होने के बाद फिर नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसे में शहर के लोगों को इंतजार है कि इस बार नोटिस के आगे पालिका की कार्रवाई कब दिखाई देगी।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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