सख्ती : अभिलेख गायब, ऑडिट अधूरा, 11 पंचायत सचिवों से 1.18 करोड़ की होगी वसूली
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Jan 8, 2026
1037 ग्राम पंचायतों के बजट की जांच में बड़ी चूक, ऑडिट रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
उन्नाव। गांवों में हुए विकास कार्यों का हिसाब समय पर न देना 11 ग्राम पंचायत सचिवों को भारी पड़ गया। सात साल पुराने कामों से जुड़े कागजात नहीं मिलने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के बाद इन सचिवों के वेतन से कुल 1 करोड़ 18 लाख रुपये वसूलने के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए सभी संबंधित खंड विकास अधिकारियों को लिखित निर्देश भेज दिए गए हैं। मामला वित्तीय वर्ष 2017-18 का है। उस समय ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, खड़ंजा, भवन निर्माण जैसे विकास कार्य कराए गए थे। इन कामों पर खर्च हुई रकम की जांच यानी ऑडिट होना था, लेकिन बार-बार कहने के बाद भी कई पंचायत सचिव खर्च से जुड़े जरूरी कागजात, बिल और वाउचर नहीं दे सके। कागजात न मिलने से 1.18 करोड़ रुपये के कामों की जांच पूरी नहीं हो पाई। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है।
कैसे चलता है पंचायतों का काम
जिले में कुल 1037 ग्राम पंचायतें हैं। हर साल केंद्र और राज्य सरकार से गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये आते हैं।ग्राम प्रधान काम कराते हैं पंचायत सचिव खर्च का हिसाब रखते हैं जिला लेखा परीक्षा अधिकारी खर्च की जांच करते हैं नियम के मुताबिक हर भुगतान का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। जांच के समय ये कागजात दिखाने होते हैं। अगर रिकॉर्ड नहीं मिलता तो खर्च की जिम्मेदारी सचिव पर ही आती है।
कई बार याद दिलाया, फिर भी नहीं दिए कागजात
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की ओर से बताया गया कि संबंधित सचिवों को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन न तो कागजात मिले और न ही कोई साफ जवाब आया। इसके बाद तय किया गया कि जब तक रिकॉर्ड नहीं दिया जाएगा, तब तक खर्च की गई रकम की भरपाई सचिवों से ही कराई जाएगी।
जिला विकास अधिकारी देव चतुर्वेदी ने बताया कि ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन सचिवों ने कागजात नहीं दिए हैं, उनके वेतन से तय रकम की वसूली की जाए। उन्होंने साफ कहा कि आगे से ऐसी लापरवाही नहीं चलेगी।
किन सचिवों से होगी वसूली
सबसे ज्यादा वसूली हसनगंज ब्लॉक के सचिवों से की जा रही है। इसके अलावा सफीपुर, असोहा, औरास, बीघापुर, सि. करन और बिछिया ब्लॉक के सचिव भी इस कार्रवाई की जद में हैं। कुछ सचिवों से 20 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली तय की गई है।
ब्लॉकवार वसूली का ब्योरा (रुपये में)
हसनगंज ब्लॉक
आदमपुर बरेठी, संदीप यादव: 2,89,632
रानीखेड़ा खालसा, अनिल कुमार शर्मा: 10,75,176
अजमतगढ़ी, संदीप यादव: 1,02,475
जसमड़ा, संदीप यादव: 1,12,50
रसूलपुर बकिया, संदीप यादव: 20,58,237
सफीपुर ब्लॉक
मऊ मंसूरपुर, महेंद्र भूषण सक्सेना: 12,291
जुझारपुर, महेंद्र भूषण सक्सेना: 12,187
असोहा ब्लॉक
इस्माइलपुर, पवन मौर्य: 54,914
औरास ब्लॉक
बयारी गांव, विपिन कुमार: 72,750
बिसवल, संजीव कुमार: 28,962
अहमदपुर कासिमपुर, विपिन कुमार: 4,14,069
बीघापुर ब्लॉक
गढ़ेवा, शिवबरन सिंह: 14,46,982
भैरमपुर, इंद्रपाल: 2,55,84
सि. करन ब्लॉक
मनोहरपुर, उत्तम अवस्थी: 19,609
रजवाखेड़ा, समीर तिवारी: 17,68,559
बिछिया ब्लॉक
नेवरना, अमरेश मिश्रा: 21,40,446
तारगांव, अमरेश मिश्रा: 14,89,067
इटौली, अमरेश मिश्रा: 5,15,121
प्रशासन का साफ संदेश
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई गांवों में होने वाले कामों में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है। अगर समय रहते कागजात दे दिए जाते तो न जांच रुकती और न ही सचिवों पर इतनी बड़ी रकम वसूलने की नौबत आती। आदेश के बाद दूसरे पंचायत सचिव भी पुराने रिकॉर्ड ठीक करने में जुट गए हैं।
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