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पशुपालन विभाग की फाइलों ने खोली परतें : सस्पेंशन की दूसरी कार्रवाई

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Thu, Nov 27, 2025
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पशु चिकित्सालयों में रंगाई मरम्मत बजट के दुरुपयोग ने बढ़ाया मामला गर्म

उन्नाव। पशुपालन विभाग की वित्तीय गड़बड़ियों का मामला लगातार गहराता जा रहा है। पहले मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर प्रसाद निलंबित हुए, अब वरिष्ठ सहायक व प्रभारी लेखाकार प्रीति श्रीवास्तव को भी इसी सिलसिले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। विभाग के भीतर जो आरोप और जांच रिपोर्टें सामने आईं, उन्होंने पूरे कामकाज की परतें खोलकर रख दीं।
लखनऊ मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 ने जारी आदेश में कहा है कि लेखाकार ने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया। कई मौके पर स्टॉक रजिस्टर नहीं बनाया गया, वहीं पंजिका में दर्ज रकमों में अंतर मिला। जेम पोर्टल से खरीदी गई सामग्री की मात्रा और कीमत तक दर्ज नहीं पाई गई, जबकि यह लेखा कार्य का प्रमुख हिस्सा होता है। ऊपर से आरोप यह भी कि उन्होंने अपने अधिकार से बाहर जाकर टेंडर जारी किए और प्रभारी अधिकारी के बिना हस्ताक्षर वाले पत्र को पोर्टल पर अपलोड कर खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। आरोपों की जांच पूरी हुई और रिपोर्ट आने के बाद निलंबन आदेश प्रभाव में आया। प्रीति श्रीवास्तव को निलंबन अवधि में हरदोई सीवीओ कार्यालय में अटैच किया गया है।

सीवीओ की सस्पेंशन फाइल ने खोले कई पन्ने

कुछ समय पहले जिले के पूर्व सीवीओ डॉ. महावीर प्रसाद भी वित्तीय अनियमितताओं में फंस गए थे। पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के लिए 13.80 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। 12 पशु चिकित्सालयों को एक-एक लाख और दो पशु सेवा केंद्रों के लिए 90-90 हजार रुपये आवंटित थे। यह रकम अस्पतालों के रंग-रोगन और मरम्मत पर खर्च होनी थी, पर जांच में पता चला कि खर्च कागजों में तो हुआ, जमीन पर उतना काम नजर नहीं आया।
कार्यालय सामग्री की खरीद में भी कीमतें बढ़ाकर दिखाने के संकेत मिले। झाड़ू से लेकर तौलिया तक, छोटे से छोटे सामान में भी बाजार दर और बिल के आंकड़े मेल नहीं खाए। इसी आधार पर डॉ. प्रसाद को रिटायरमेंट के 24 घंटे पहले ही निलंबन आदेश जारी हुआ। चर्चा यह भी रही कि लेखाकार इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका में थीं और अब उन्हीं पर अंतिम कार्रवाई एजेंसी ने कर दी है।

विभाग में खलबली, फाइलों की दुबारा तलाशी

इन लगातार दो निलंबनों के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई है। फाइलें, स्टॉक रजिस्टर और खरीद विवरण फिर से खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आगे जांच और भी नाम सामने ला सकती है, क्योंकि खामियों की सूची छोटी नहीं है।
इधर, सीवीओ डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं पर शासन ने कार्रवाई तय की है। आज आदेश मिला है। निलंबन अवधि में उन्हें हरदोई कार्यालय भेजा गया है।गौरतलब है कि उन्नाव में इन घटनाओं ने एक बार फिर सरकारी बजट के उपयोग, खरीद प्रणाली और आंतरिक लेखा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजर टिकी रहेगी।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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