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ओवरलोड ट्रकों से लाखों की कमाई : एसटीएफ ने तोड़ा सिंडीकेट

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Nov 14, 2025
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पहले भी पकड़े जा चुके हैं लोकेशन देने वाले ट्रैकर, जांच में और नाम जुड़ने की आशंका

उन्नाव। एसटीएफ की ताजा कार्रवाई ने अवैध खनन और ओवरलोड ट्रकों से जुड़ी बड़ी कमाई की परतें उधेड़ दीं। जांच में सामने आया कि खनिज से भरे ट्रकों को बिना रोकटोक निकाले जाने का पैसा सीधे परिवहन विभाग के अफसरों और उनके साथ चलने वाले सिपाहियों व निजी चालकों तक पहुंचता था। हर दिन लाखों रुपये की यह रकम अलग-अलग हिस्सों में बांटी जाती थी। कानपुर एसटीएफ ने जिस सिंडीकेट को पकड़ा, वही इस पूरे नेटवर्क को चलाता था। हमीरपुर, महोबा और जालौन जैसी जगहों से बिना रॉयल्टी और दो गुना माल भरकर आने वाले ट्रक उन्नाव और कानपुर की सीमा पर बिना किसी कार्रवाई के निकल जाते थे। इसके लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें ट्रांसपोर्टरों को अफसरों और चेक पोस्ट की लोकेशन भेजी जाती थी।

कैसे चलता था पूरा सिस्टम

गिरफ्तार आरोपी निर्भय सिंह ने बताया कि उसके ग्रुप में 100 वाहन मालिक जुड़े थे। वहीं मोहम्मद तारिक के ग्रुप में 350 ट्रांसपोर्टर और ट्रक मालिक शामिल थे। इनकी सूचना पर 450 ट्रक हर दिन बिना रोक-टोक निकलते थे। इसके एवज में प्रति गाड़ी हर महीने 11 हजार रुपये कानपुर एआरटीओ कार्यालय के नाम पर और सात हजार रुपये उन्नाव के नाम पर जाता था। यह रकम मिलाकर 81 लाख रुपये कानपुर और 31.5 लाख रुपये उन्नाव के अफसरों तक पहुंचती थी। इसके अलावा हमराही सिपाहियों और निजी चालकों को प्रति गाड़ी रोजाना 2500 और 2000 रुपये तक दिए जाते थे। कुल मिलाकर रोज 20 लाख से ज्यादा इसी मद में खर्च होते थे। इसके बाद भी सिंडीकेट के पास रोज करीब 6.75 लाख रुपये बच जाते थे, जो आगे बंट जाता था।

एफआईआर में नए नाम

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद एफआईआर में पांच और नाम जोड़े गए हैं। इनमें उन्नाव के एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार के हमराही प्रदीप और रंजीत, एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय प्रतिभा गौतम के हमराही इंद्रजीत, पीटीओ शहपर किदवई के निजी चालक सुरेंद्र, और कानपुर के पूर्व एआरटीओ के खास बताए जाने वाले निर्भय सिंह का नाम शामिल है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ेगी तो और नाम जुड़ सकते हैं।

टोल प्लाजा का आंकड़ा भी देता है संकेत

नवाबगंज टोल मैनेजर दीपक यादव के अनुसार टोल से हर दिन 4500 भारी वाहन गुजरते हैं। इनमें करीब 200 से 250 वाहन ओवरलोड पाए जाते हैं। नियम के मुताबिक ओवरलोड होने पर 505 रुपये जुर्माना लेकर उन्हें आगे बढ़ा दिया जाता है। अगर चालक ओवरलोड होने से इंकार करे तो पास के धर्मकांटा पर तौल की जाती है।

विभाग में सन्नाटा

एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग के अफसरों में खौफ साफ दिखा। गुरुवार को दफ्तरों में वही भीड़भाड़ नहीं दिखी जो आम दिनों में रहती है। कई अधिकारी कुर्सियों से गायब रहे। प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले की चर्चा पूरे दिन चलती रही। एआरटीओ प्रशासन श्वेत वर्मा ने बताया कि वह ट्रेनिंग पर लखनऊ में हैं और कार्यालय की स्थिति की जानकारी नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार सिंह ने कहा कि वह प्रवर्तन से बाहर हैं। कई अफसरों के फोन भी बंद मिले।

पहले भी पकड़े गए थे ट्रैकर

खनन निरीक्षक प्रांजुल सिंह ने बताया कि इससे पहले भी लोकेशन देने वाले तीन युवकों को पकड़ा गया था। ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर खनन निरीक्षक और टीम की गतिविधियों की जानकारी भेजते थे। उनके खिलाफ दही थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।

विभाग की कार्रवाई का रिकॉर्ड

एआरटीओ प्रवर्तन के अनुसार अप्रैल से अक्टूबर तक 9646 वाहनों का चालान और 1088 ओवरलोड वाहनों को सीज कर करीब 3.88 करोड़ रुपये शमन शुल्क वसूला गया। पीटीओ की ओर से 4562 चालान और 773 वाहनों की सीजिंग कर 1.77 करोड़ रुपये की वसूली हुई। एसटीएफ की कार्रवाई ने जिस रैकेट की परतें खोली हैं, उससे साफ है कि यह नेटवर्क लंबे समय से चला रहा था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और चेहरे सामने आने की संभावना है।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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