खाड़ी तनाव का असर : उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर निर्यात आधा और लागत दोगुनी
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Apr 4, 2026
केमिकल महंगे, कालाबाजारी तेज; असद इराकी बोले—सरकारी राहत से कुछ सहारा, पर संकट बरकरार
उन्नाव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर गहराता दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने से समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे आयात-निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, निर्यात करीब 50 फीसदी तक गिर चुका है और हालात जल्द सुधरते नजर नहीं आ रहे। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने बताया कि सबसे ज्यादा असर दो मोर्चों पर पड़ा है—ढुलाई और कच्चे माल की कीमत। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में माल भेजना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा हो गया है, क्योंकि शिपमेंट के पारंपरिक रूट प्रभावित हैं। जहां पहले एक कंटेनर भेजने में करीब 1100 से 1200 डॉलर खर्च आता था, वहीं अब यह लागत बढ़कर 3000 से 3500 डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन खर्च बढ़ने का सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। कई छोटे और मध्यम निर्यातक ऑर्डर पूरे करने में हिचक रहे हैं, जबकि विदेशी खरीदार भी बढ़ी लागत के कारण ऑर्डर कम कर रहे हैं। असद इराकी के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में उछाल ने स्थिति और गंभीर बना दी है। चमड़े की टैनिंग में इस्तेमाल होने वाला फार्मिक एसिड 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि सोडियम फार्मेट 37 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो हो गया है। इसके अलावा अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, पीवीसी, स्टाइरीन, एसेटिक एसिड और फॉर्मेल्डिहाइड जैसे अन्य केमिकल भी महंगे हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में इन केमिकल्स की कालाबाजारी भी बढ़ रही है। सीमित सप्लाई का फायदा उठाकर कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ाई जा रही हैं, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा दबाव पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार के हालिया फैसले को आंशिक राहत देने वाला बताया। पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 8.25 फीसदी आयात शुल्क तीन महीने के लिए खत्म किए जाने से लागत में कुछ कमी आने की उम्मीद है। लेकिन उनका कहना है कि जब तक सप्लाई चेन और परिवहन की समस्या दूर नहीं होती, तब तक उद्योग को पूरी राहत मिलना मुश्किल है। असद इराकी ने मांग की कि सरकार बाजार पर सख्त निगरानी रखे, कालाबाजारी पर रोक लगाए और निर्यातकों को स्थिर माहौल देने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि चमड़ा उद्योग दोबारा पटरी पर लौट सके।
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