28 साल बाद घर लौटा 'मृत' बेटा : मां ने देखा तो छलक पड़े आंसू; परिजनों ने कर दी थी तेरहवीं
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Aug 5, 2026
मुंबई में मानसिक संतुलन बिगड़ने से परिवार से टूटा संपर्क, अब अचानक हुई वापसी से गांव में जश्न

उन्नाव। जिसे परिवार ने 28 साल पहले खो दिया था, जिसकी मौत मानकर अंतिम संस्कार की रस्में और तेरहवीं तक कर दी गई थी, वही बेटा बुधवार को अचानक घर के दरवाजे पर खड़ा मिला। पहले तो किसी को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही मां ने बेटे को पहचाना, वह उससे लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ी। यह भावुक नजारा देखने वालों की आंखें भी नम हो गईं। यह अनोखा मामला सुमेरपुर ब्लॉक के हमीरपुर गांव का है। गांव निवासी मुनेश्वर यादव (56) वर्ष 1998 में रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गए थे। उस समय उनकी शादी को महज सात-आठ महीने हुए थे और उनकी पत्नी गर्भवती थी। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ समय बाद वह कमाई कर घर लौट आएंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
मुंबई में बिगड़ी मानसिक हालत, परिवार से टूट गया रिश्ता
परिजनों के मुताबिक मुंबई में काम के दौरान लगातार तनाव के कारण मुनेश्वर की मानसिक स्थिति खराब हो गई। धीरे-धीरे उनका अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया। कई साल तक कोई खबर न मिलने पर परिवार ने हर संभव तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार परिजनों ने यह मान लिया कि अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। रिश्तेदारों और गांव वालों को भी उनकी मौत की सूचना दे दी गई। परिवार ने सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की सभी रस्में और तेरहवीं तक कर दी।
पहली पत्नी ने भी बसा लिया दूसरा घर
मुनेश्वर के लापता होने के करीब तीन साल बाद, जब उनके जीवित होने की कोई उम्मीद नहीं बची, तो उनकी पहली पत्नी ने भी दूसरा विवाह कर लिया और नई जिंदगी शुरू कर दी। इस बीच करीब पांच साल पहले मुनेश्वर के पिता का भी निधन हो गया।
एक अनजान शख्स बना सहारा
मुनेश्वर ने बताया कि मुंबई में एक मुस्लिम व्यक्ति ने उनकी मदद की। उसने उनका इलाज कराया, रहने का इंतजाम किया और बाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी दिलाई। धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर आई। करीब चार साल बाद उन्होंने वहीं दूसरी शादी कर ली। अब उनके परिवार में बेटी डिम्पल यादव, जो अब शादीशुदा हैं, और दो बेटे सूरज यादव (23 वर्ष) तथा परक यादव (21 वर्ष) हैं।
याददाश्त लौटी तो शुरू हुई अपने गांव की तलाश
मुनेश्वर ने बताया कि करीब दस साल बाद उनकी याददाश्त में सुधार आने लगा। इसके बाद उनके मन में अपने गांव और परिवार को खोजने की इच्छा फिर से जाग उठी। काफी कोशिशों के बाद उन्होंने इंटरनेट की मदद से गांव के पूर्व प्रधान का संपर्क नंबर हासिल किया। जब उन्होंने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर अपना परिचय दिया तो पहले किसी को भरोसा ही नहीं हुआ। लेकिन बातचीत और पहचान के बाद गांव वालों को यकीन हो गया कि जिसे वर्षों पहले मृत मान लिया गया था, वह सचमुच जिंदा है।

मुंबई से लेकर आए परिजन, गांव में दीपावली जैसा माहौल
सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्य मुंबई पहुंचे और मुनेश्वर को अपने साथ गांव लेकर आए। जैसे ही वह घर पहुंचे, बूढ़ी मां ने बेटे को सामने देखा तो खुद को रोक नहीं सकीं। दोनों एक-दूसरे से लिपटकर देर तक रोते रहे। गांव में इस खबर के फैलते ही लोगों की भीड़ मुनेश्वर से मिलने पहुंचने लगी। रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित उन्हें देखने और शुभकामनाएं देने के लिए लगातार उनके घर पहुंच रहे हैं। पूरे गांव में खुशी का माहौल है और लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे।
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