द्वारिकेश चीनी मिल ने गन्ना किसानों : के खातों में भेजा 21 करोड़ 98 लाख 94 हजार
Mon, Dec 1, 2025
उत्तर प्रदेश बरेली :
दरअसल जनपद में फरीदपुर समीप ग्राम भगवानपुर फूलवा स्थित द्वारिकेश चीनी मिल के पेराई सत्र 2025-26 में 24,नवंबर तक गन्ना कृषकों द्वारा चीनी मिल को आपूर्ति किये गये गन्ने का भुगतान 21 करोड़ 98 लाख 94 हजार रुपए का भुगतान समिति द्वारा उपलब्ध कराये गए गन्ना किसानों के सम्बंधित बैंक खातों में भुगतान कर दिया गया है।पेराई सत्र शुभारम्भ के बाद चीनी मिल द्वारा अब तक 43 करोड़ 77 लाख 13 हजार का कुल भुगतान गन्ना किसानों के खातों में भेजा जा चुका है।
द्वारिकेश चीनी मिल गन्ना किसानों का समयँ से मूल्य भुगतान देने के लिए प्रतिबद्ध है। मिल प्रबन्धन ने किसानों से आग्रह करते हुए कहा कि चीनी मिल द्वारा चलाई जा रही आकर्षक विकास योजनाओं के चलते अधिक से अधिक क्षेत्र में गन्ना बुवाई करें और चीनी मिल को साफ़-सुथरा एवं ताज़ा गन्ना आपूर्ति करें।द्वारिकेश शुगर इण्डस्ट्रीज लि0,फरीदपुर क्षेत्र में विकास एवं किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए सदैव तत्पर है ताकि हमारे कृषक बन्धु अधिक से अधिक लाभ कमा सके।
किस समिति द्वारा कितना और कुल भुगतान 18 नवंबर से 24 नवंबर तक
1 फ़रीदपुर (986.29)2 बरेली (461.89)3 बीसलपुर (343.52)4 तिलहर (133.96)5 बदायूँ (29.29)6 भोजीपुरा (50.96)7 नवाबगंज (193.03)कुल भुगतान 2198.94 किया गया है
आसीवन की हवा भी महकी : जब गुदड़ी बाबा का उर्स अपने रौ में दिखा
Mon, Dec 1, 2025
सज्जादानशीन अनवर रहमान जिलानी ने तबर्रुक बांटा, हजारों ने ज़ियारत की
उन्नाव। मियांगंज ब्लॉक के आसीवन कस्बे की दरगाह पर सूफी संत सैयद इकरामुल हक उर्फ गुदड़ी बाबा का 80वां सालाना उर्स इस बार भी श्रद्धा और रूहानी माहौल के बीच पूरा हुआ। रविवार को कुल और फातेहा के साथ उर्स की रस्में संपन्न हो गईं, जबकि देश में अमन, सलामती और भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ की गई। दरगाह परिसर में सुबह से ही जायरीनों का तांता लगा रहा। दूर-दराज के जिलों और अन्य प्रदेशों से लोग बाबा की बारगाह में हाजिरी देने पहुंचे।
नूरानी शाम, कव्वाली और गागर की रस्म
उर्स की शुरुआत शनिवार की शाम नमाज-ए-ईशा के बाद हुई। गागर उठी तो पूरा इलाका सुफियाना रंग में डूब गया। चांदनी रात, झिलमिलाते चिराग और महफिल में गूंजते कलामों ने माहौल को खास बना दिया। दरगाह प्रांगण में रातभर कव्वाली का दौर चलता रहा। अलग-अलग कलाम पेश हुए, दुआएं मांगी गईं और श्रद्धालु देर रात तक महफिल में सराबोर रहे। रविवार की सुबह से ही कुल की तैयारियां शुरू हो गईं। दोपहर बाद जब महफिल चली तो जश्न का रंग और भी गाढ़ा हो उठा। कव्वाल रिजवान ने अपने मशहूर कलाम "जलाले इश्क़ में नूरे जमाल रखा है… पेश कर श्रोताओं को जैसे थाम लिया। लोग देर तक तालियों और वाह-वाह के साथ रूहानी लुत्फ़ लेते दिखाई दिए।
फातेहा के साथ दुआ, तबर्रुक की तकसीम
असर की नमाज के बाद कुल की रस्म अदा हुई। सज्जादानशीन अनवर रहमान जिलानी सफवी हक्कानी की सदारत में फातेहा पढ़ी गई और मुल्क की तरक्की, मोहब्बत, भाईचारे व सुरक्षित समाज की दुआ मांगी गई। रस्म पूरी होते ही जायरीनों में तबर्रुक बांटा गया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं कतार में खड़े होकर तबर्रुक हासिल करते दिखाई दिए।
बड़ी तादाद में शामिल हुए लोग
उर्स की रौनक इस बात से समझी जा सकती है कि आसीवन कस्बे की गलियां दिनभर आबाद रहीं। खानकाहे मशहूदिया से शोएब बकाई, समाजसेवी शुजाउर रहमान सफवी शुजा, हिलाल मुजीबी रज्जाकी, तल्हा अल्वी, महजर, चेयरमैन ब्रजकिशोर वर्मा बाबू जी, फैशल रहमान सफवी, सैफ रहमान सफवी, जैद रहमान सफवी, जिला पंचायत सदस्य फरान रहमान सफवी, जिबरान सफवी, अजीम सफवी, अरबाब सफवी, अरमान सफवी, असद सफवी, सारिक मियां, राशिद मियां, अनीसुद्दीन खान, मो नसीर, मो समीर, महेंद्र यादव, ओम जी मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसके अलावा अमित अंकज तिवारी, आशुतोष सिंह चौहान आशीष, सारिक अल्वी, शानू मियां, समाजसेवी शीबू अहमद, रहीश खान गुड्डू, करन स्वरूप और अन्य स्थानीय लोगों ने भी दरगाह में हाजिरी लगाई। कुल मिलाकर हजारों की भीड़ ने बाबा गुदड़ी शाह से अपने दिली मुरादों के लिए दुआ की।
आसीवन में रौनक, सड़कों पर चहल-पहल
उर्स के चलते बाज़ारों में रौनक बढ़ गई। मीठे, चादर और इत्र की दुकानों पर खरीदारी होती रही। जगह-जगह चाय और लंगर के स्टॉल लगे थे जहां लोग बैठकर गुफ्तगू करते और उर्स की खुशबू में डूबे नजर आए। 80 साल से चली आ रही यह परंपरा हर गुजरते वर्ष के साथ मजबूत होती दिखती है। इस उर्स ने एक बार फिर साबित किया कि आसीवन की यह दरगाह सिर्फ इबादत की जगह नहीं बल्कि मोहब्बत और एकता की पहचान है।
ओवरलोड सिंडीकेट का पर्दाफाश : तीन सिपाही निलंबित, जांच की चपेट में विभाग
Mon, Dec 1, 2025
रिपोर्ट के बाद अफसरों का दफ्तर से गायब रहना शक और गहरा करता है
उन्नाव। ओवरलोड ट्रकों का खेल धीरे धीरे खुलता जा रहा है। जिले में लंबे समय से चल रही यह मिलीभगत आखिरकार उजागर हुई, तो परिवहन विभाग में खलबली मच गई। तीन सिपाहियों पर गाज गिर चुकी है, जबकि दो एआरटीओ के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। मामला सामने आने के बाद से दोनों अधिकारी दफ्तर से गायब हैं और प्रवर्तन का काम ठप पड़ा है। नतीजा यह कि सड़कें ओवरलोड वाहन ढो रहे हैं और राजस्व का नुकसान अलग।
कैसे खुला पूरा खेल
बताया जा रहा है कि सिंडीकेट ट्रकों की लोकेशन अधिकारियों तक पहुंचाता था, जिसके बदले ओवरलोड वाहन जिले की सीमा से आराम से गुजर जाते थे। गिट्टी, मौरंग और बालू से भरे ट्रकों से वसूली होने वाली रकम में सिपाहियों के साथ साथ प्रवर्तन से जुड़े अफसरों तक हिस्सा पहुंचता था। यह काम कोई नया नहीं था, आरोपितों के मुताबिक लगभग दो साल से यह नेटवर्क सक्रिय था और सैकड़ों ट्रकों को पास कराने की बात सामने आई है।
एसटीएफ की कार्रवाई और दर्ज एफआईआर
11 नवंबर 2025 को कानपुर एसटीएफ के दारोगा राहुल सिंह परमार ने इस रैकेट का खुलासा किया। तत्काल पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ जिनमें सुनील सचान, प्रदीप सिंह, श्रीकिशन, तारिक और नियाज अहमद के नाम शामिल हैं। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि यह खेल प्रवर्तन सिपाही प्रदीप, रंजीत और सुरेंद्र की मिलीभगत से चलता था।
एफआईआर के बाद अधिकारियों की भूमिका सवालों में
मामला दर्ज होने के बाद से एआरटीओ और पीटीओ दोनों छुट्टी पर हैं। 24 नवंबर को एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने भी बताया था कि सभी प्रवर्तन अधिकारी खुद को अनुपस्थित कर गए हैं और उन्हें ही कार्यभार संभालना पड़ रहा है। परिवहन निदेशालय ने तीनों आरोपी सिपाहितों प्रदीप, रंजीत और सुरेंद्र को फिलहाल निलंबित कर दिया है। लेकिन जिस स्तर पर यह खेल चलता रहा, उससे बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गंभीर हुए हैं।
सड़कें बेपटरी, विभाग की आय में गिरावट
बिना प्रवर्तन के हाईवे और मुख्य मार्गों पर ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार में दौड़ रहे हैं। कहीं फिटनेस की जांच नहीं, कहीं चालान की कार्रवाई नहीं। एआरटीओ श्वेता वर्मा का कहना है कि सड़कों पर अफसरों की मौजूदगी न होने से अराजकता बढ़ रही है और राजस्व भी नीचे गिरा है। अनियंत्रित डंपर और ट्रक हर दिन मौत का जोखिम लेकर गुजर रहे हैं और विभाग उन्हें देखने वाला कोई नहीं।
ओवरलोड सिंडीकेट का नेटवर्क गहरा, अब कार्रवाई का इंतजार
कुल मिलाकर यह सिर्फ निलंबन तक सीमित मामला नहीं दिखता। जिस तरह आरोपितों ने कबूल किया कि करीब दो वर्ष से वसूली कर ट्रक पास कराए जा रहे थे, उससे साफ है कि जाल ऊंचे स्तर तक फैला हुआ था। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई कब तय करता है और यह गड़बड़ी कहां तक जाती है। यह पूरा प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि जब प्रवर्तन ढीला पड़े तो न सिर्फ भ्रष्टाचार पनपता है, बल्कि सड़क सुरक्षा भी सीधे खतरे में पड़ जाती है। जिले के लोग अब उम्मीद लगाए हैं कि जांच सिर्फ सिपाहियों तक न रुके, बल्कि पूरा नेटवर्क सामने आए और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो।