दबंगों का आतंक : चार युवकों ने एक युवक को चाकुओं से हमलाकर किया लहूलुहान,हालत नाजुक
Tue, Feb 3, 2026
उत्तर प्रदेश बरेली
: दरअसल शहर के थाना सुभाषनगर क्षेत्र के मढ़ीनाथ इलाके में रविवार देर रात्रि बाजार से लौट रहे एक 19 वर्षीय युवक पर निर्भीक हमलावरों ने चाकूओं से जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया।हमले में गंभीर रूप से घायल युवक को नाजुक हालत में निजि अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टर युवक की जान बचाने बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
रविवार रात्रि का है पूरा मामला यूफिट जिम के नजदीक का है जहाँ पहुँचे शांति विहार निवासी पप्पू शर्मा ने बताया कि उनके 19 वर्षीय बेटे कमल शर्मा को कई बदमाशों ने घर लिया रात्रि लगभग 8--900,बजे मढ़ीनाथ बाजार से सामान खरीदकर कमल घर लौट रहा था यूफिट जिम के पास पहुँचने से पूर्व घात लगाए बैठे चार बदमाशों ने चाकुओं से उस पर हमलाकर लहूलुहान कर दिया समझने और सम्भलने का मौका तक नहीं दिया।
निर्दयी व निर्भीक हमलावरों ने पेट,चेहरे और शरीर में कई जगह जानलेवा वर किए जिससे वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया।घटना के बाद हमला वर बदमाश गाली-गलौज करते व जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए।परिजनों ने घटना की तहरीर में चार आरोपियों को नामजद, करते हुए घटना रंजिशन होने की की आशंका जताई है।
पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है जिनमे साहिल मिश्रा(राकेश नगर),शिवा पाठक (मढ़ीनाथ), सन्नी और वरुण (दोनों शांति विहार निवासी शामिल हैं।प्रारंभिक जांच में पुरानी रंजिश या वर्चस्व को लेकर विवाद की आशंका जताई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही कमल का बड़ा भाई श्याम शर्मा मौके पर पहुंचा जहाँ खून से लथपथ हालत में पड़े कमल शर्मा को एक दोस्त की मदद से मोटरसाइकिल के सहारे तुरंत निजि अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ डॉक्टरों का कहना है कि युवक की हालत अभी जनुक बनी है।
बरेली शहर में सरे राह हमलावरों के हमले से लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त है पुलिस मामले में दबिश दे रही है।घटना के बाद मढ़ीनाथ और शांति विहार इलाके में दहशत का माहौल है। सुभाषनगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी को लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।
सरकारी जमीन बचाने उतरा प्रशासन : दयालखेड़ा में ढहाया गया अवैध निर्माण
Mon, Feb 2, 2026
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन का साफ संदेश, आगे भी चलेगा अभियान
उन्नाव। सदर तहसील के दयालखेड़ा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश आखिरकार प्रशासन की सख्ती के आगे टिक नहीं पाई। ग्राम समाज की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को सोमवार को नायब तहसीलदार की मौजूदगी में जेसीबी से ढहा दिया गया। यह कार्रवाई एसडीएम सदर के स्पष्ट निर्देश पर की गई। मामला सदर तहसील की मगरवारा ग्राम पंचायत के मजरा दयालखेड़ा का है। यहां भूमि संख्या 606 ग्राम समाज के नाम दर्ज है। आरोप है कि गांव निवासी मेवालाल ने इस जमीन पर बिना किसी अनुमति के निर्माण करा लिया था। जब निर्माण शुरू हुआ तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और तहसील स्तर पर शिकायत भी दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा। अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करने के बाद अवैध कब्जा हटाने के आदेश जारी कर दिए।सोमवार को नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी और लेखपाल आशू श्रीवास्तव राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन लगाई गई और देखते ही देखते ग्राम समाज की जमीन पर बना निर्माण ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी तरह का विरोध या हंगामा नहीं हुआ। नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी तरह का कब्जा या निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी है। एसडीएम के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है और आगे भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की इस कार्रवाई से गांव में यह संदेश गया है कि सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं ग्रामीणों ने भी अवैध निर्माण हटाए जाने पर संतोष जताया है।
कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा : बुजुर्ग की पेंशन दस महीने से बंद
Mon, Feb 2, 2026
आठ साल से मिल रही पेंशन मार्च 2025 से बंद, आईजीआरएस पर शिकायत के बाद जांच के आदेश
उन्नाव। असोहा ब्लॉक से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और इसी आधार पर उनकी वृद्धावस्था पेंशन करीब दस महीने पहले रोक दी गई। हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग आज भी जिंदा हैं और अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं। असोहा क्षेत्र के सरवन गांव निवासी चंद्र कुमार पिछले आठ वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे। यह पेंशन उनके लिए जीवनयापन का एकमात्र सहारा थी। मार्च 2025 में अचानक उनके खाते में पेंशन आना बंद हो गई। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब कई महीनों तक कोई भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने ब्लॉक कार्यालय में जानकारी की। जांच करने पर चंद्र कुमार को जो बताया गया, वह किसी झटके से कम नहीं था। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सत्यापन के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है और इसी कारण उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। जीवित व्यक्ति को मृत बताने की इस गंभीर चूक ने बुजुर्ग को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान कर दिया। अपनी बात रखने के लिए चंद्र कुमार ने पहले ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बीडीओ से शिकायत की और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी उच्चाधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जीवित हैं और सत्यापन करने वाले कर्मचारी की लापरवाही के कारण उनकी पेंशन रोकी गई है। उन्होंने दोषी अधिकारी पर कार्रवाई और तुरंत पेंशन बहाल करने की मांग की। मामला आईजीआरएस पर दर्ज होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संज्ञान लिया। उन्होंने बीडीओ को निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और यदि शिकायत सही पाई जाए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही बुजुर्ग की पेंशन बहाल करने के निर्देश भी दिए गए। इस संबंध में एडीओ समाज कल्याण श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई थी और आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है। उनके अनुसार, मामले का समाधान करा दिया गया है।हालांकि यह मामला केवल एक व्यक्ति की पेंशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। एक बुजुर्ग को जीवित होते हुए मृत घोषित कर देना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है, जिनके पास पेंशन के अलावा कोई और सहारा नहीं होता। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या इस तरह की गलती करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला कागजों में ही निपटकर रह जाता है।