कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा : बुजुर्ग की पेंशन दस महीने से बंद
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Feb 2, 2026
आठ साल से मिल रही पेंशन मार्च 2025 से बंद, आईजीआरएस पर शिकायत के बाद जांच के आदेश
उन्नाव। असोहा ब्लॉक से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और इसी आधार पर उनकी वृद्धावस्था पेंशन करीब दस महीने पहले रोक दी गई। हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग आज भी जिंदा हैं और अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं। असोहा क्षेत्र के सरवन गांव निवासी चंद्र कुमार पिछले आठ वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे। यह पेंशन उनके लिए जीवनयापन का एकमात्र सहारा थी। मार्च 2025 में अचानक उनके खाते में पेंशन आना बंद हो गई। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब कई महीनों तक कोई भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने ब्लॉक कार्यालय में जानकारी की। जांच करने पर चंद्र कुमार को जो बताया गया, वह किसी झटके से कम नहीं था। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सत्यापन के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है और इसी कारण उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। जीवित व्यक्ति को मृत बताने की इस गंभीर चूक ने बुजुर्ग को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान कर दिया। अपनी बात रखने के लिए चंद्र कुमार ने पहले ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बीडीओ से शिकायत की और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी उच्चाधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जीवित हैं और सत्यापन करने वाले कर्मचारी की लापरवाही के कारण उनकी पेंशन रोकी गई है। उन्होंने दोषी अधिकारी पर कार्रवाई और तुरंत पेंशन बहाल करने की मांग की। मामला आईजीआरएस पर दर्ज होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संज्ञान लिया। उन्होंने बीडीओ को निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और यदि शिकायत सही पाई जाए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही बुजुर्ग की पेंशन बहाल करने के निर्देश भी दिए गए। इस संबंध में एडीओ समाज कल्याण श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई थी और आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है। उनके अनुसार, मामले का समाधान करा दिया गया है।हालांकि यह मामला केवल एक व्यक्ति की पेंशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। एक बुजुर्ग को जीवित होते हुए मृत घोषित कर देना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है, जिनके पास पेंशन के अलावा कोई और सहारा नहीं होता। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या इस तरह की गलती करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला कागजों में ही निपटकर रह जाता है।
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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
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