: राष्ट्र की एकता के नाम दौड़ा उन्नाव, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया संकल्प
Fri, Oct 31, 2025
डीएम गौरांग राठी और एसपी जय प्रकाश सिंह ने पुलिस लाइन से दिखाई हरी झंडी
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर शुक्रवार को जिले में राष्ट्रीय एकता दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन हुआ, जिसमें प्रशासन से लेकर आम नागरिक तक एक साथ दौड़े। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह रिजर्व पुलिस लाइन से हुई, जहां जिलाधिकारी गौरांग राठी और पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। पुलिस लाइन परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा—"एक भारत, श्रेष्ठ भारत” और “वंदे मातरम” की आवाजें माहौल में जोश भर रही थीं। इस दौड़ में एडीएम सुशील कुमार गोंड़, एएसपी अखिलेश सिंह, सीओ सिटी दीपक यादव, पुलिस जवान, एनसीसी कैडेट्स और शहर के कई स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हुए। सभी ने मिलकर देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया। दौड़ के समापन पर पुलिस लाइन में सरदार पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान डीएम गौरांग राठी ने कहा कि सरदार पटेल ने अपने अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से रियासतों को जोड़कर एक भारत का सपना साकार किया। उनकी सोच आज भी हमें जोड़ने की प्रेरणा देती है।
एसपी जय प्रकाश सिंह ने प्रतिभागियों की हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि रन फॉर यूनिटी’ सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि यह संदेश है कि देश तभी मजबूत होगा जब हम सब एक साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन आपसी भाईचारे और एकजुटता की मिसाल है, जिसे आज भी अपनाने की जरूरत है।
केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि सभी थानों, सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी एकता दौड़ और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर जगह यही संदेश दिया गया—भारत की असली ताकत उसकी एकता में है। चाहें पुलिस लाइन का मैदान हो या स्कूल का प्रांगण, हर जगह लोगों के चेहरे पर जोश और गर्व साफ झलक रहा था। उन्नाव ने शुक्रवार को एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात एकता और देशभक्ति की हो, तो यहां का हर नागरिक कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है।
: रिसॉर्ट की जमीन पर दो दावेदार, जांच कमेटी के सामने पेश हुए सबूत
Fri, Oct 31, 2025
छह साल तक चला गेस्ट हाउस, अब कब्जे का आरोप और जवाबी दावा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित करोड़ों की कीमत वाली जमीन और उस पर बने रिसॉर्ट को लेकर दो पक्षों में चल रहा विवाद अब प्रशासन तक पहुंच गया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर गठित जांच कमेटी के सामने गुरुवार को दोनों पक्षों ने अपने-अपने कागजात पेश कर जमीन पर मालिकाना हक का दावा किया। आवास विकास कॉलोनी निवासी सुशील कुमार ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से जमीन की डिक्री कराई थी। जिसके बाद उसी जमीन पर गेस्ट हाउस का निर्माण करवाया। सुशील के मुताबिक करीब छह–सात साल तक किसी ने आपत्ति नहीं की। गेस्ट हाउस चल भी रहा था, लेकिन अचानक कुछ लोगों के उकसाने पर स्कूल प्रबंधक सुरेंद्र बाजपेयी ने बाहरी लोगों की मदद से जबरन कब्जा कर लिया।दूसरी ओर सुरेंद्र बाजपेयी जो एक स्कूल के प्रबंधक हैं उन्होने जांच कमेटी को दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि जिस जमीन पर रिसॉर्ट बना है वह स्कूल की संपत्ति है। उनके अनुसार सुशील कुमार अवैध तरीके से स्कूल की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। विवाद के दौरान दोनों पक्षों ने एसडीएम न्यायिक रामदेव निषाद और सीओ सिटी दीपक यादव के समक्ष अपने दस्तावेज और तर्क रखे। सुशील कुमार ने अपनी डिक्री की कॉपियां पेश कर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की, जबकि बाजपेयी पक्ष ने कब्जा हटवाने की गुहार लगाई। अधिकारियों ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि फिलहाल जांच जारी है। कमेटी से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन लंबे समय से विवाद में है, लेकिन अब मामला प्रशासन के पास पहुंचने से उम्मीद है कि हकीकत सामने आएगी।
: कायाकल्प के नाम पर लूट, सीवीओ पर गिरी गाज, बाकी बच गए
Fri, Oct 31, 2025
निलंबन आदेश में चहेते ठेकेदार का जिक्र, लेकिन बाकी अफसरों पर कार्रवाई नहीं
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। पशुपालन विभाग में कायाकल्प के नाम पर हुए खेल की नई परतें खुलती जा रही हैं। निलंबित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर सिंह के कार्यकाल में न सिर्फ पशु चिकित्सालयों की मरम्मत और रंगरोगन में गड़बड़ी हुई, बल्कि कार्यालय में इस्तेमाल होने वाले सामान्य सामानों की खरीद में भी जमकर मनमानी की गई।
सूत्र बताते हैं कि विभाग ने सफाई के लिए नारियल के 70 झाड़ू खरीदे थे, जिन पर 29,750 रुपये खर्च किए गए यानी एक झाड़ू की कीमत 425 रुपये दिखाई गई। बाजार में यही झाड़ू 40-50 रुपये में मिल जाती है। इसी तरह 64 तौलियों की खरीद में 50,560 रुपये खर्च दिखाए गए, मतलब एक तौलिया 790 रुपये का पड़ा। जानकारों के मुताबिक, किसी अच्छी कंपनी का तौलिया भी इतनी कीमत का नहीं होता।
विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि इस खरीद में खुलेआम अंधेरगर्दी हुई। यह सारा भुगतान उसी अवधि में किया गया जब डॉ. महावीर सिंह जिले के सीवीओ थे। दिलचस्प बात यह है कि सफाई से लेकर मरम्मत तक के 90 फीसदी से ज्यादा काम एक ही फर्म को दिए गए, जो कथित तौर पर विभाग के एक लिपिक के रिश्तेदार की बताई जा रही है। यही वजह है कि अब उस लिपिक का नाम भी जांच के घेरे में आ गया है।
कार्रवाई में पक्षपात की चर्चा
डॉ. महावीर सिंह पर निलंबन की कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि बाकी दो अधिकारियों पर चुप्पी क्यों?जिलाधिकारी कार्यालय से शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट में सिकंदरपुर कर्ण और सदर अस्पताल के डिप्टी सीवीओ के नाम भी शामिल थे। तीनों पर समान अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन निलंबन केवल एक अधिकारी का हुआ। विभाग के अंदर अब यह चर्चा है कि कार्रवाई चयनित तरीके से की गई और कुछ नामों को फाइल से हटा दिया गया।
जांच में क्या निकला सामने
यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़ा है। उस दौरान जिले के 12 पशु चिकित्सालयों और 2 पशु सेवा केंद्रों के कायाकल्प के लिए 13.80 लाख रुपये का बजट जारी हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया कि इन कामों के लिए किसी मान्यता प्राप्त फर्म से निविदा प्रक्रिया के तहत अनुबंध होना चाहिए था, लेकिन बिना नियमों के पालन किए भुगतान कर दिया गया।
जब तीन सदस्यीय जांच बनी समिति जिसमें जिला विकास अधिकारी, आरईएस के एक्सईएन और कोषाधिकारी शामिल थे टीम ने स्थल निरीक्षण किया, तो पाया गया कि अधिकांश स्थानों पर रंगाई-पुताई अधूरी थी, खिड़कियों के शीशे टूटे थे और फर्श उखड़ी हालत में थे। रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि कायाकल्प के नाम पर बजट की बंदरबांट की गई।
सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले निलंबन
प्रमुख सचिव पशुधन मुकेश मेश्राम ने गुरुवार को आदेश जारी कर डॉ. महावीर सिंह को निलंबित कर दिया। खास बात यह है कि यह आदेश उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले जारी हुआ।
शासन का बयान
विशेष सचिव पशुपालन देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि सीवीओ डॉ. महावीर सिंह को वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में वे पशुपालन विभाग के लखनऊ मुख्यालय में संबद्ध रहेंगे। रिकवरी पर निर्णय अंतिम जांच के बाद लिया जाएगा। जल्द ही उन्नाव में नए सीवीओ की तैनाती कर दी जाएगी।
अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर
शासन ने फिलहाल विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि मामला यहीं रुक जाएगा या आगे बढ़ेगा। कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं कि पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि बाकी अधिकारियों को क्लीन चिट किस आधार पर मिली। उन्नाव के पशुपालन विभाग में यह मामला अब सिर्फ अनियमितता का नहीं, पूरे सिस्टम पर भरोसे का बन गया है। हर कोई यही पूछ रहा है कि अगर गलती सबकी थी, तो सजा सिर्फ एक को क्यों?