राहत : सदर कोतवाली टीम ने पीड़ितो की फ्रॉड में गई रकम लौटाई
Wed, Feb 4, 2026
उन्नाव। साइबर ठगी के मामलों में कोतवाली सदर पुलिस की साइबर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर और लिंक के जरिये की गई ठगी में कुल 45,300 रुपये की धनराशि पीड़ितों को रिफंड कराई गई। पहले मामले में गिरिजाबाग निवासी अमित से फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर 8,000 रुपये नकद ले लिए गए थे। दूसरे मामले में पीतांबर नगर निवासी पियूष कुमार से साइबर कैफे पर भरोसे में लेकर 30,300 रुपये की ठगी की गई। वहीं तीसरे मामले में केशव सिंह के खाते से संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बाद 7,000 रुपये कट गए थे। तीनों पीड़ितों की शिकायत ऑनलाइन साइबर पोर्टल पर दर्ज होने के बाद कोतवाली सदर की साइबर टीम ने जांच कर संबंधित बैंकों और प्लेटफॉर्म से समन्वय बनाते हुए पूरी रकम वापस कराई। इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक चन्द्रकांत मिश्र, अपराध निरीक्षक राजेश यादव और महिला आरक्षी सोनिया शर्मा शामिल रहीं। इंस्पेक्टर चन्द्रकांत मिश्र ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक और फर्जी स्क्रीनशॉट से सावधान रहें और ठगी की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
सरकारी जमीन बचाने उतरा प्रशासन : दयालखेड़ा में ढहाया गया अवैध निर्माण
Mon, Feb 2, 2026
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन का साफ संदेश, आगे भी चलेगा अभियान
उन्नाव। सदर तहसील के दयालखेड़ा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश आखिरकार प्रशासन की सख्ती के आगे टिक नहीं पाई। ग्राम समाज की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को सोमवार को नायब तहसीलदार की मौजूदगी में जेसीबी से ढहा दिया गया। यह कार्रवाई एसडीएम सदर के स्पष्ट निर्देश पर की गई। मामला सदर तहसील की मगरवारा ग्राम पंचायत के मजरा दयालखेड़ा का है। यहां भूमि संख्या 606 ग्राम समाज के नाम दर्ज है। आरोप है कि गांव निवासी मेवालाल ने इस जमीन पर बिना किसी अनुमति के निर्माण करा लिया था। जब निर्माण शुरू हुआ तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और तहसील स्तर पर शिकायत भी दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा। अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करने के बाद अवैध कब्जा हटाने के आदेश जारी कर दिए।सोमवार को नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी और लेखपाल आशू श्रीवास्तव राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन लगाई गई और देखते ही देखते ग्राम समाज की जमीन पर बना निर्माण ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी तरह का विरोध या हंगामा नहीं हुआ। नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी तरह का कब्जा या निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी है। एसडीएम के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है और आगे भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की इस कार्रवाई से गांव में यह संदेश गया है कि सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं ग्रामीणों ने भी अवैध निर्माण हटाए जाने पर संतोष जताया है।
कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा : बुजुर्ग की पेंशन दस महीने से बंद
Mon, Feb 2, 2026
आठ साल से मिल रही पेंशन मार्च 2025 से बंद, आईजीआरएस पर शिकायत के बाद जांच के आदेश
उन्नाव। असोहा ब्लॉक से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और इसी आधार पर उनकी वृद्धावस्था पेंशन करीब दस महीने पहले रोक दी गई। हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग आज भी जिंदा हैं और अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं। असोहा क्षेत्र के सरवन गांव निवासी चंद्र कुमार पिछले आठ वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे। यह पेंशन उनके लिए जीवनयापन का एकमात्र सहारा थी। मार्च 2025 में अचानक उनके खाते में पेंशन आना बंद हो गई। शुरुआत में उन्होंने इसे तकनीकी समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब कई महीनों तक कोई भुगतान नहीं हुआ तो उन्होंने ब्लॉक कार्यालय में जानकारी की। जांच करने पर चंद्र कुमार को जो बताया गया, वह किसी झटके से कम नहीं था। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सत्यापन के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है और इसी कारण उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। जीवित व्यक्ति को मृत बताने की इस गंभीर चूक ने बुजुर्ग को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान कर दिया। अपनी बात रखने के लिए चंद्र कुमार ने पहले ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बीडीओ से शिकायत की और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी उच्चाधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई। शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जीवित हैं और सत्यापन करने वाले कर्मचारी की लापरवाही के कारण उनकी पेंशन रोकी गई है। उन्होंने दोषी अधिकारी पर कार्रवाई और तुरंत पेंशन बहाल करने की मांग की। मामला आईजीआरएस पर दर्ज होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संज्ञान लिया। उन्होंने बीडीओ को निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और यदि शिकायत सही पाई जाए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही बुजुर्ग की पेंशन बहाल करने के निर्देश भी दिए गए। इस संबंध में एडीओ समाज कल्याण श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई थी और आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है। उनके अनुसार, मामले का समाधान करा दिया गया है।हालांकि यह मामला केवल एक व्यक्ति की पेंशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। एक बुजुर्ग को जीवित होते हुए मृत घोषित कर देना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है, जिनके पास पेंशन के अलावा कोई और सहारा नहीं होता। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या इस तरह की गलती करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला कागजों में ही निपटकर रह जाता है।