दो लाख रुपये लेकर प्लॉट का सौदा नहीं किया : मांगने पर घर में घुसकर पीटा
Mon, Sep 14, 2026
रुपये वापस मांगने पर दी जान से मारने की धमकी, न्यायालय के आदेश पर दो नामजद समेत सात पर रिपोर्ट
उन्नाव। प्लॉट खरीदने के लिए दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगना गांधी नगर निवासी एक युवक को भारी पड़ गया। आरोप है कि रुपये लौटाने के बजाय प्लॉट दिखाने वाले पिता-पुत्र अपने पांच साथियों के साथ उसके घर में घुस गए और मारपीट कर दी। युवक ने आरोप लगाया कि उससे बैनामा कराने का भरोसा देकर रकम ली गई थी, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी बैनामा नहीं कराया गया। रकम मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। गांधी नगर निवासी अम्बिकेश मिश्रा ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह काफी समय से अपने लिए प्लॉट तलाश रहे थे। इसी दौरान मोहल्ले में रहने वाले सौरभ गुप्ता से उनकी बात हुई। सौरभ ने बताया कि उसके पिता विजय गुप्ता प्लॉटिंग का काम करते हैं और वह उनकी जरूरत के हिसाब से जमीन दिला सकते हैं। आरोप है कि सौरभ ने उन्हें बिछिया ब्लॉक के मुर्तजानगर में एक प्लॉट दिखाया। जमीन पसंद आने के बाद दोनों पक्षों के बीच बैनामा कराने की बात तय हुई। अम्बिकेश के मुताबिक करीब दो महीने पहले सौरभ के कहने पर उन्होंने विजय गुप्ता को घर पर 40 हजार रुपये बयाने के तौर पर दिए थे। इसके बाद सौरभ और विजय अलग-अलग तारीखों में उनके घर पहुंचे और 40-40 हजार रुपये लेते रहे। शिकायतकर्ता के मुताबिक बैनामा होने पर यह रकम सौदे में समायोजित करने की बात कही गई थी।
समय पूरा हुआ तो बदल गया रवैया
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दो महीने का तय समय पूरा होने के बाद उसने सौरभ और विजय से बैनामा कराने के लिए कहा, लेकिन दोनों तैयार नहीं हुए। इसके बाद उसने एक जुलाई को दोनों से अपने दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगे। आरोप है कि दोनों ने रुपये लौटाने के बजाय उसे इंतजार करने के लिए कहा।
रात में पांच साथियों के साथ पहुंचने का आरोप
अम्बिकेश के मुताबिक नौ जुलाई की रात करीब आठ बजे वह अपने घर पर था। इसी दौरान सौरभ और विजय पांच अन्य लोगों के साथ घर के अंदर आ गए। आरोप है कि रुपये मांगने की बात पर दोनों ने उससे विवाद शुरू कर दिया। उसे धमकाते हुए कहा गया कि अगर वह पैसों के लिए ज्यादा दबाव बनाएगा तो उसे जान से मार दिया जाएगा। आरोप है कि विरोध करने पर सभी ने उसके साथ मारपीट की, जिससे शरीर पर कई चोटें आईं।
थाने से एसपी तक पहुंचा मामला
अम्बिकेश ने बताया कि घटना के बाद वह रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली सदर गया था। आरोप है कि पुलिस ने जांच का भरोसा देकर तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं की और चोटों का मेडिकल भी नहीं कराया। इसके बाद उसने जिला अस्पताल पहुंचकर अपना मेडिकल कराया। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर 10 जुलाई को एसपी को भी प्रार्थनापत्र दिया। कार्रवाई न होने पर उसने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली सदर पुलिस ने सौरभ गुप्ता, विजय गुप्ता और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दो पासपोर्ट, अलग जन्मतिथि... : कूटरचित अभिलेख से धोखाधड़ी का आरोप
Mon, Sep 14, 2026
एक में 1968 तो दूसरे में 1986 की जन्मतिथि दर्ज, किला चौकी प्रभारी की तहरीर पर रिपोर्ट
उन्नाव। एक ही व्यक्ति के नाम से जारी दो पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि, पिता का नाम और पता दर्ज होने का मामला सामने आया है। जिला पासपोर्ट अधिकारी और प्रभारी एलआईयू की आख्या के आधार पर किला चौकी प्रभारी उग्रसेन सिंह की तहरीर पर कोतवाली सदर में मोहम्मद रफीक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने अब दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। मामला अनवार नगर निवासी मोहम्मद रफीक से जुड़ा है। पासपोर्ट विभाग की ओर से पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक उसके नाम से एक पासपोर्ट 19 अप्रैल 2015 को जारी हुआ था। इसमें रफीक के पिता का नाम मोहम्मद सगीर, पता 160 शेखवाड़ा और जन्मतिथि 15 जुलाई 1968 दर्ज है। इसके करीब नौ साल बाद चार अक्तूबर 2024 को मोहम्मद रफीक के नाम से दूसरा पासपोर्ट जारी हुआ। इस दस्तावेज में पिता का नाम भग्गा, पता 38/8 अनवार नगर और जन्मतिथि 15 जुलाई 1986 दर्ज है। यानी दोनों पासपोर्ट में जन्मतिथि में 18 साल का अंतर है। दोनों दस्तावेजों में मां का नाम समान बताया गया है।
दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान पासपोर्ट के साथ लगाए गए अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में आधार कार्ड और वोटर आईडी समेत अन्य अभिलेखों को कूटरचित तरीके से तैयार कर इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इसे पासपोर्ट बनवाने के दौरान गलत जानकारी और दस्तावेज देने का मामला माना है।
पासपोर्ट विभाग की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
जिला पासपोर्ट अधिकारी और एलआईयू की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। इसके साथ पासपोर्ट से संबंधित फाइल, पासपोर्ट कार्यालय की रिपोर्ट और आधार कार्ड की प्रति समेत अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कोतवाली सदर में पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पुलिस अब करेगी दस्तावेजों का मिलान
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों पासपोर्ट बनवाने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उनमें अलग-अलग जानकारी कैसे दर्ज हुई। पुलिस संबंधित अभिलेखों का मिलान करने के साथ मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।
गबन : कंपनी कर्मचारी पर सात लाख रुपये के हड़पने का आरोप
Sun, Sep 13, 2026
फर्जी गेट पास बनाकर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कराने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर सदर कोतवाली में रिपोर्ट
उन्नाव। शहर के कानपुर-लखनऊ राजमार्ग स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी में करीब सात लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। कंपनी के जनरल मैनेजर ने सर्विस एडवाइजर पर फर्जी गेट पास तैयार कर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कराने और रकम अपने खाते में लेने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर सदर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कानपुर निवासी कंपनी के जनरल मैनेजर अंकित बाजपेई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके साथ शिवम यादव सर्विस एडवाइजर के पद पर काम करता था। आरोप है कि शिवम ने कंपनी के ग्राहकों के फर्जी गेट पास बनाए और उनसे नगद रुपये लेने के साथ कुछ रकम अपने एसबीआई खाते में जमा कराई। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ग्राहकों की गाड़ियां रिलीज कर दीं। तहरीर के मुताबिक 10 जून 2026 को ग्राहक अतुल कुमार की गाड़ी संख्या यूपी 35 बीडब्ल्यू 7007 का सीरियल नंबर 2537 वाला गेट पास कूटरचित तरीके से तैयार कर गाड़ी निकलवा दी गई। कंपनी अधिकारियों से मामले को छिपाकर यह प्रक्रिया पूरी करने का आरोप है। बाद में जांच में करीब डेढ़ साल के दौरान कुल 7,07,993 रुपये के गबन की बात सामने आने का दावा किया गया। जनरल मैनेजर के अनुसार उन्होंने आरोपी की करतूत पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना दी थी। आरोप है कि पुलिस शिवम को पकड़कर ले गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को पंजीकृत डाक से प्रार्थना पत्र भेजा गया और आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया। न्यायालय के आदेश पर अब सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।