मोहान से उठी इंकलाब की आवाज़ : हसरत मोहानी की 150वीं जयंती पर याद हुआ आज़ादी का सफ़र
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Jan 1, 2026
शायरी, विचार और आज़ादी के संघर्ष की यादें हुईं ताज़ा

उन्नाव। आज़ादी की लड़ाई को शब्द, विचार और साहस देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर पत्रकार और मशहूर शायर मौलाना हसरत मोहानी की 150वीं जयंती गुरुवार को उन्नाव में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाई गई। धवन रोड स्थित हसरत मोहानी पुस्तकालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जिले के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, अधिवक्ता, समाजसेवी और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से हुई, जिसने पूरे माहौल को राष्ट्रभक्ति और विचारों की गर्माहट से भर दिया। वक्ताओं ने हसरत मोहानी के जीवन, संघर्ष और निर्भीक सोच को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मोहान से उठी आवाज, देशभर में बनी पहचान
1875 में उन्नाव जिले के मोहान कस्बे में जन्मे सैय्यद फ़ज़ल-उल-हसन, जिन्हें दुनिया हसरत मोहानी के नाम से जानती है, ने अपनी पूरी ज़िंदगी देश और समाज को समर्पित कर दी। “हसरत” उनका तखल्लुस था और “मोहानी” उनके जन्मस्थान की पहचान। वे निर्भीक पत्रकार थे, जिनकी लेखनी से अंग्रेजी शासन असहज हो उठता था। 1921 में दिया गया “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा बाद में भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों की आवाज बना और आज भी आंदोलनों में गूंजता है। श्रीकृष्ण पर उर्दू और अवधि में रचनाएं लिखकर उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूती दी। 150वीं जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्मरण सभा नहीं, बल्कि यह संदेश भी था कि विचारों की सच्ची क्रांति समय की मोहताज नहीं होती।

विचारों की क्रांति का प्रतीक: फारूक अहमद
मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता और यश भारती सम्मान से सम्मानित समाजसेवी फारूक अहमद ने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी केवल एक शायर नहीं, बल्कि विचारों की क्रांति के प्रतीक थे। उन्होंने बताया कि “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा सबसे पहले हसरत मोहानी ने ही दिया, जो आगे चलकर पूरे स्वतंत्रता संग्राम की पहचान बना। फारूक अहमद ने कहा कि 1921 के अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखना उस दौर में असाधारण साहस का उदाहरण था। उन्होंने कलम और कर्म दोनों से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी और कई बार जेल की यातनाएं सहने के बावजूद कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया।

सादगी, निडरता और देशप्रेम की मिसाल: भानू मिश्रा
कार्यक्रम में मौजूद नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि एंव भाजपा नेता प्रवीण मिश्रा भानू ने अपने संबोधन में कहा कि हसरत मोहानी जैसे व्यक्तित्व सदियों में पैदा होते हैं। उनका जीवन सादगी, निडरता और देशप्रेम की मिसाल है। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों को केवल जयंती पर नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपनाकर सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। भानू मिश्रा ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा से विचार-विमर्श के उपरांत मौलाना हसरत मोहानी की याद को स्थायी रूप देने के लिए नगर पालिका परिषद की आगामी बोर्ड बैठक में उनके नाम पर पार्क बनाए जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि एसपी कार्यालय से पुलिस लाइन जाने वाले मार्ग पर पूर्व में मौलाना हसरत मोहानी के नाम का पत्थर लगा था, जिसे किसी कारणवश हटा दिया गया था। अब वहां पत्थर की जगह स्टील से निर्मित स्मारक लगाया जाएगा, ताकि उनकी पहचान और विरासत को सम्मानजनक रूप से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि हसरत मोहानी उन्नाव ही नहीं, पूरे देश की धरोहर हैं।

शायरी से सजी महफ़िल
कार्यक्रम का साहित्यिक पक्ष भी खास रहा। स्थानीय शायरों ने हसरत मोहानी की मशहूर ग़ज़ल “चुपके चुपके रात दिन, आँसू बहाना याद है…” पढ़कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। शायरी के साथ उनकी बेबाकी, सादगी और हिंदू-मुस्लिम एकता से जुड़े किस्सों का ज़िक्र हुआ, जिसे सुनकर श्रोताओं ने तालियों से समर्थन जताया।
युवाओं के लिए संदेश
वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे मौलाना हसरत मोहानी के जीवन से प्रेरणा लें। कहा गया कि आज के समय में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने आज़ादी के आंदोलन के दौर में थे। कार्यक्रम के दौरान यह मांग भी उठी कि मौलाना हसरत मोहानी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए और उन्नाव में किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल का नाम उनके नाम पर रखा जाए।

ये रहे प्रमुख मौजूद लोग
कार्यक्रम में अरविंद कुमार श्रीवास्तव, मुकेश कुमार यादव, समाजसेविका गौसिया खान, डॉ. रामनरेश, दिनेश प्रियमन, हारून अहमद, मोहम्मद अहमद, समाजसेवी फजलुर्रहमान, रहमतुल्ला खान एडवोकेट, नियाज़ अहमद, अजमल एडवोकेट, सैयद सगीरुल हसन उर्फ मुन्ना भाई, सैयद अली इमाम जैदी, सभासद मेराज खान, आफाक खान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना हसरत मोहानी वेलफेयर अकैडमी उन्नाव के कार्यकारी अध्यक्ष अतीक अहमद ने की, जबकि संचालन मास्टर अनवर अशहर ने किया। एकेडमी के प्रबंधक एवं मंत्री अबरार हुसैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार जताया।
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