कोर्ट की चौखट से विकास की राह : फारूक अहमद एडवोकेट सम्मानित किए गए
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Jan 24, 2026
फारूक अहमद की जनहित याचिकाओं का असर, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

उन्नाव। अधिवक्ता एसोसिएशन बांगरमऊ ने शनिवार को आयोजित स्वागत समारोह के जरिए एक स्पष्ट संदेश दिया कि कानून अगर जनहित में इस्तेमाल हो, तो वह विकास का मजबूत जरिया बन सकता है। इसी भावना के तहत उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दाखिल कर क्षेत्र से जुड़ी कई बुनियादी समस्याओं को उठाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी फारूक अहमद एडवोकेट को सम्मानित किया गया। इसी मौके पर बांगरमऊ भाजपा विधायक श्रीकांत कटियार को भी सम्मान किया गया। यह आयोजन अधिवक्ता एसोसिएशन बांगरमऊ के बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, प्रयागराज से संबद्ध होने के उपलक्ष्य में किया गया। समारोह में ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा (कुर्मिन खेड़ा) निवासी, उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता फारूक अहमद को उनके सामाजिक और विधिक योगदान के लिए स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

बताया गया कि फारूक अहमद एडवोकेट ने लंबे समय से बांगरमऊ और आसपास के क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दाखिल कीं। इनमें जर्जर सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, तहसील से जुड़ी समस्याएं, रोडवेज बस अड्डा, सब रजिस्ट्रार कार्यालय, शारदा नहर पर पुल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इन याचिकाओं के बाद कई विकास कार्यों को मंजूरी मिली और काम शुरू हुआ।

कार्यक्रम में विधायक श्रीकांत कटियार ने कहा कि फारूक अहमद ने कानून के जरिए क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे भी सहयोग देने की बात कही। अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट सत्यपाल ने कहा कि फारूक अहमद एक कुशल अधिवक्ता होने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अधिवक्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।

अपने संबोधन में फारूक अहमद एडवोकेट ने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और उन सभी लोगों का है, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति से जुड़ा नहीं है, बल्कि कानून के माध्यम से क्षेत्र को पिछड़ेपन से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। फारूक अहमद ने बताया कि बांगरमऊ में संचालित ग्राम न्यायालय के आर्थिक अधिकार वर्तमान में 25 हजार रुपये तक सीमित हैं, जिससे आम लोगों को कई मामलों में राहत नहीं मिल पाती। इसी को देखते हुए उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर ग्राम न्यायालय की आर्थिक सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने की मांग की है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही अधिक मामलों का निस्तारण हो सके और लोगों को समय व खर्च से राहत मिल सके।

कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी फजलुर्रहमान ने किया। इस मौके पर सत्यपाल एडवोकेट, बाल नारायण एडवोकेट, अनिल वर्मा एडवोकेट, सत्यनारायण कन्नौजिया, अजीत द्विवेदी, योगेश कुमार एडवोकेट, मुजम्मिल अहमद, मनोज गौतम, सुधीर कुमार मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
Tags :
Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन