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अनदेखी का नतीजा : आईबीपी चौराहे के पास मैरिज हॉल का छज्जा गिरने से मारुति कार चकनाचूर

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Jul 6, 2026
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रात का समय होने से टली जनहानि, तीन साल पहले चिन्हित 133 भवनों पर कार्रवाई अब तक अधूरी

उन्नाव। मानसून की दस्तक के साथ शहर में जर्जर इमारतों के खतरे की हकीकत एक बार फिर सामने ला दी। बीती देर रात आईबीपी चौराहे के सामने शहनाई गेस्ट हाउस के बगल स्थित रानी मैरिज हॉल का पुराना और कमजोर छज्जा अचानक भरभराकर सड़क पर गिर पड़ा। मलबे की चपेट में नीचे खड़ी एक मारुति 800 कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि घटना रात में हुई, इसलिए वहां कोई राहगीर या वाहन चालक मौजूद नहीं था। अगर यही हादसा दिन के समय होता तो कई लोगों की जान पर बन सकती थी। यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त स्थानों में गिना जाता है। दिनभर यहां ऑटो स्टैंड संचालित होता है और सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है। आसपास कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं। ऐसे में छज्जे का अचानक गिरना केवल एक भवन का हिस्सा टूटने की घटना नहीं, बल्कि शहर में मौजूद जर्जर इमारतों से जुड़े बड़े खतरे की चेतावनी माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक नगर पालिका ने वर्ष 2023 में शहर के जर्जर और खतरनाक भवनों का सर्वे कराया था। सर्वे में 133 भवन ऐसे मिले थे, जिन्हें किसी भी समय गिरने की आशंका के कारण जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया था। इसके बावजूद आज तक अधिकांश भवनों पर न तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकी और न ही उन्हें सुरक्षित बनाने के प्रभावी कदम उठाए गए। बरसात शुरू होते ही इन भवनों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। इस मामले में नगर पालिका का कहना है कि खतरनाक भवनों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई करने का अधिकार यूएसडीए के पास है। वहीं दूसरी ओर संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से कार्रवाई फाइलों तक सीमित रह जाती है। नतीजा यह है कि जिन इमारतों को तीन साल पहले ही खतरनाक घोषित किया गया था, वे आज भी लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात से पहले जर्जर भवनों की चर्चा जरूर होती है, लेकिन कुछ नोटिस जारी करने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, जिम्मेदार विभाग सक्रिय नजर नहीं आते। लोगों का कहना है कि अगर सोमवार रात की घटना दिन में होती तो इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग हो सकती थी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि लगातार बारिश के दौरान पुराने और कमजोर भवनों की दीवारें, छज्जे और बालकनियां अचानक गिर सकती हैं। इसलिए ऐसे भवनों की समय-समय पर तकनीकी जांच और जरूरत पड़ने पर तत्काल ध्वस्तीकरण जरूरी है। रानी मैरिज हॉल का छज्जा गिरने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और जर्जर भवनों पर कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों की मांग है कि नगर पालिका, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त अभियान चलाकर चिन्हित 133 जर्जर भवनों का दोबारा निरीक्षण करें और जो भवन लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं, उन्हें तत्काल खाली कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि किसी बड़ी जनहानि के बाद जागने से बेहतर है कि प्रशासन समय रहते खतरे को खत्म करे।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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