ओम फार्मा में नारकोटिक्स टीम की लंबी पड़ताल : स्थानीय निगरानी पर भी सवाल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Aug 13, 2026
लखनऊ की नारकोटिक्स टीम ने खंगाला स्टॉक और रिकॉर्ड, 10 से ज्यादा नमूने सील; शिकायतों के बाद पहुंची टीम
उन्नाव। नेहरूनगर स्थित ओम फार्मा फैक्टरी में बुधवार को लखनऊ से आई नारकोटिक्स विभाग की टीम ने जिले की आबकारी विभाग के साथ करीब सात घंटे तक जांच की। टीम ने फैक्टरी में तैयार माल, कच्चे माल और स्टॉक का ब्योरा देखा। लाइसेंस और उत्पादन से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले गए। जांच के दौरान संदेह के आधार पर 10 से अधिक नमूने सील किए गए। टीम शाम करीब तीन बजे फैक्टरी पहुंची और रात 10 बजे तक जांच करती रही। फैक्टरी में आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। फैक्टरी मालिक संजय कुमार के पास विजया वटी और हाजमा मुनक्का जैसे उत्पाद बनाने का लाइसेंस होने की जानकारी है। नारकोटिक्स विभाग को फैक्टरी में लाइसेंस से अधिक स्टॉक और निर्माण के मानकों से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। उत्पादों में भांग या अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायत की गई थी।
स्टॉक से लेकर कच्चे माल तक जांच
शिकायत मिलने के बाद लखनऊ की टीम ने फैक्टरी पहुंचकर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान शुरू किया। अधिकारियों ने तैयार माल के साथ कच्चे माल का भी निरीक्षण किया। किस उत्पाद के लिए कौन सी सामग्री इस्तेमाल हो रही है और फैक्टरी में कितनी मात्रा मौजूद है, इसकी जानकारी जुटाई गई। टीम ने उत्पादन से जुड़े दस्तावेज और स्टॉक रजिस्टर भी देखे। कर्मचारियों और प्रबंधन से पूछताछ की गई। फैक्टरी के अलग-अलग हिस्सों में जाकर उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली गई। संदेह वाले उत्पादों और सामग्री के नमूने लिए गए। 10 से ज्यादा नमूनों को सील किया गया है। अब इनकी जांच रिपोर्ट से स्थिति साफ होगी कि उत्पादों में इस्तेमाल सामग्री तय मानकों के मुताबिक थी या नहीं।
शिकायतों ने निगरानी पर उठाया सवाल
इस कार्रवाई का एक पहलू स्थानीय स्तर की निगरानी से भी जुड़ा है। दोनों तरह की शिकायतें, यानी स्टॉक और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ी, ऐसी चीजें हैं जिनकी निगरानी लाइसेंस जारी करने वाले विभाग के स्तर पर भी की जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि अगर शिकायतें पहले से विभाग तक पहुंच रही थीं तो स्थानीय स्तर पर उनकी जांच किस तरह हुई। क्या फैक्टरी के स्टॉक और उत्पादन का नियमित सत्यापन किया गया था? हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि स्थानीय स्तर पर लापरवाही हुई है, क्योंकि इसकी पुष्टि जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड से ही होगी।
लखनऊ की टीम के साथ रहा आबकारी विभाग
जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र ने बताया कि दोनों विभागों की टीम ने मिलकर जांच की। आबकारी निरीक्षक भवानी प्रताप सिंह भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने फैक्टरी के दस्तावेज, स्टॉक और उत्पादन से जुड़े रिकॉर्ड देखे तथा कर्मचारियों से जानकारी ली। नारकोटिक्स टीम के आने के बाद स्थानीय विभाग के अधिकारी भी जांच में शामिल रहे। इससे यह भी साफ है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग अब रिकॉर्ड और मौके की स्थिति को एक साथ जांच रहा है।
गड़बड़ी मिली तो निगरानी भी घेरे में
शिकायतों में कुछ उत्पादों में भांग या अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा से अधिक किए जाने का आरोप भी है। हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सील किए गए नमूनों की जांच के बाद ही पता चलेगा कि इनमें किसी नशीले पदार्थ की मात्रा मानक से अधिक थी या नहीं। अगर जांच में स्टॉक या निर्माण से जुड़ी अनियमितता सामने आती है तो संबंधित फैक्टरी के खिलाफ कार्रवाई तय होगी। साथ ही यह भी देखा जाना स्वाभाविक होगा कि ऐसी स्थिति नियमित निगरानी में पहले क्यों नहीं सामने आई।
रिपोर्ट बताएगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल विभाग की जांच पूरी होने और नमूनों की रिपोर्ट आने का इंतजार है। जिला आबकारी अधिकारी के मुताबिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बुधवार की कार्रवाई ने फैक्टरी की जांच के साथ जिले में लाइसेंस प्राप्त इकाइयों की निगरानी व्यवस्था को भी चर्चा में ला दिया है। शिकायत के बाद लखनऊ की टीम का उन्नाव आकर घंटों जांच करना इस बात की जरूरत जरूर दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी इकाइयों की निगरानी कितनी नियमित और प्रभावी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि मामला सिर्फ फैक्टरी की अनियमितता तक सीमित है या निगरानी व्यवस्था में भी कहीं कमी रही।
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