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सरकारी जमीन का मामला : माला पहनने से इनकार, लेकिन अधूरी जांच ने बढ़ाई नाराजगी

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Thu, Jan 8, 2026
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भूमि संख्या 417 के मामले में आधी टीम के पहुंचने से बढ़ी नाराजगी

उन्नाव। शुक्लागंज क्षेत्र के मजरा पीपरखेड़ा एहतमाली में सरकारी जमीन से जुड़े एक मामलें में प्रशासनिक व्यवस्था के दो अलग अलग चेहरे सामने रख दिए। एक ओर तहसील कर्मचारियों ने व्यक्तिगत सम्मान से दूरी बनाकर सरकारी मर्यादा और निष्पक्षता की मिसाल पेश की, तो दूसरी ओर जांच टीम की अधूरी मौजूदगी ने पूरे मामले पर सवाल भी खड़े कर दिए। पीपरखेड़ा में जांच के लिए पहुंचे तहसील कर्मचारियों को कुछ लोगों ने माला पहनाकर सम्मानित करना चाहा। कर्मचारियों ने मना करते हुए साफ कहा कि वे किसी व्यक्तिगत सम्मान के लिए नहीं, बल्कि सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अपना दायित्व निभाने आए हैं। उनका कहना था कि माला पहनाना जनप्रतिनिधियों या नेताओं के सम्मान का तरीका हो सकता है, लेकिन वे न नेता हैं और न ही किसी प्रकार का दिखावा उनके काम का हिस्सा है। उनका दायित्व केवल नियम कानून के तहत निष्पक्ष पैमाइश करना है। लोगों के दोबारा आग्रह के बावजूद कर्मचारियों ने अपनी बात पर कायम रहे। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पैमाइश पूरी तरह सरकारी रिकॉर्ड और नियमों के अनुसार होगी और किसी भी दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। इस व्यवहार की मौके पर मौजूद लोगों ने सराहना की और कहा कि आज के समय में ऐसा रवैया प्रशासन पर भरोसा बढ़ाने वाला है।
पूरा मामला एक सप्ताह पहले का है। जब मोहल्ला शक्ति नगर निवासी दिव्या अवस्थी और परमसुखखेड़ा निवासी कमलेश सहित अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि भूमि संख्या 454 और 455 में सरकारी भूमि 417 पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने 2 जनवरी को छह सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। लेकिन एक सप्ताह बाद मौके पर पहुंची टीम में केवल सर्वे कानूनगो प्रेम प्रकाश, सर्वे लेखपाल अभिषेक और रमेश ही मौजूद रहे। जबकि बाकी तीन के न आने से शिकायतकर्ता और स्थानीय लोग नाराज हो गए। लोगों ने जांच की पारदर्शिता और प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल भी उठाया। टीम के अधूरे पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से ही सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ और अब आबादी बसने का हवाला देकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने माना कि सरकारी जमीन पर काफी हद तक आबादी बस चुकी है, जिससे नाप जोख में दिक्कत आ रही है और ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों के निर्णय की जरूरत होती है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकारी जमीन पर आबादी बसने दी ही कैसे गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। जांच टीम के पहुंचने पर कुछ लोगों ने तिलक लगाकर स्वागत करने की कोशिश की, लेकिन राजस्व कर्मचारियों ने तिलक लगाने से भी इनकार कर दिया। कानूनगो प्रेम प्रकाश ने बताया कि नाप जोख की प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं और रिपोर्ट तैयार कर एआरओ को सौंपी जाएगी। वहीं एआरओ प्रशांत नायक ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद अवैध कब्जेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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