माघ मेले की तैयारी : उन्नाव में टेनरियों और स्लाटर हाउसों पर कड़ा पहरा
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Dec 31, 2025
जिले में गंदे डिस्चार्ज पर पूरी तरह पाबंदी, 24 दिन की लगी रोक
उन्नाव। प्रयागराज समेत प्रदेश के अन्य तीर्थ स्थलों पर शुरू हो रहे माघ मेले और गंगा स्नान को देखते हुए जनपद में प्रदूषण पर सख्त शिकंजा कस दिया गया है। गंगाजल की शुद्धता बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को जिले के दही, बंथर और अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई की गई। इन क्षेत्रों में संचालित 42 चर्म इकाइयों, आधा दर्जन स्लाटर हाउस और दही व बंथर की दो सीईटीपी के सभी डिस्चार्ज मुहानों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट राजीव राज के नेतृत्व में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला स्तरीय टीम द्वारा की गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर औद्योगिक इकाइयों के उत्प्रवाह बिंदुओं की जांच की और तय निर्देशों के तहत उन्हें पूरी तरह बंद कराया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ शशि बिंदकर ने बताया कि माघ मेला 2026 के लिए शासन की ओर से पहले से रोस्टर जारी किया गया है। उसी के अनुरूप इकाई संचालकों और सीईटीपी प्रबंधन ने अपने स्तर से ही श्राव को रोकते हुए मुहानों को बंद कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब अगले 24 दिनों तक इन औद्योगिक क्षेत्रों से किसी भी प्रकार का औद्योगिक डिस्चार्ज बाहर नहीं जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पौष पूर्णिमा तीन जनवरी को है। इसी को ध्यान में रखते हुए 31 दिसंबर 2025 से तीन जनवरी 2026 तक चार दिनों की सख्त पाबंदी लागू की गई थी, जिसे आगे बढ़ाते हुए कुल 24 दिनों तक शून्य उत्प्रवाह व्यवस्था लागू रहेगी। इस अवधि में किसी भी हालत में गंदा पानी नालों या नदियों में नहीं छोड़ा जा सकेगा। जिलाधिकारी गौरांग राठी के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीमें बुधवार से पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि केवल मुहाने सील करना ही नहीं, बल्कि दिनभर औद्योगिक क्षेत्रों, चर्म इकाइयों और सीईटीपी का लगातार निरीक्षण भी किया जाएगा। हर बंद किए गए प्वाइंट पर निगरानी टीम तैनात रहेगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। बताया गया कि प्रयागराज में तीन जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक माघ मेला आयोजित होना है। करोड़ों श्रद्धालुओं के गंगा स्नान को ध्यान में रखते हुए उन्नाव जिले के दो प्रमुख नालों लोनी और सिटी जेल ड्रेन से जुड़ी टेनरियों और चर्म इकाइयों में गीला उत्पादन भी पूरी तरह बंद करा दिया गया है। आरओ शशि बिंदकर ने साफ शब्दों में कहा कि इस दौरान यदि कहीं भी प्रदूषित उत्प्रवाह पाया गया तो संबंधित इकाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जेडएलडी यानी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था को सख्ती से लागू कराने के लिए अधिकारी और कर्मचारी चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग का कहना है कि यह कदम केवल नियम पालन के लिए नहीं, बल्कि गंगा की पवित्रता और आम लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। माघ मेले के दौरान गंगाजल पूरी तरह स्वच्छ रहे, इसके लिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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