रिटायर हुए, मगर भुलाए नहीं गए गुरुजी : याद आया पूरा सेवाकाल
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Sep 8, 2026
रिटायरमेंट के बाद भी नहीं भूले गए शिक्षक, अन्नू टंडन ने 95 शिक्षकों को किया सम्मानित

उन्नाव। नौकरी से रिटायरमेंट के साथ शिक्षक की भूमिका खत्म नहीं होती। सालों तक बच्चों को पढ़ाने और उन्हें जिंदगी की राह दिखाने वाले इन गुरुओं के योगदान को याद करने के लिए उन्नाव में एक ऐसी परंपरा अब 26 साल पुरानी हो चुकी है, जो हर वर्ष नए भाव के साथ सामने आती है। इस बार भी करीब 95 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित कर उनके योगदान को सलाम किया गया। शहर के विशाल कॉन्टिनेंटल में आयोजित समारोह में प्राथमिक, माध्यमिक और महाविद्यालय स्तर से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक पहुंचे। मंच पर जब एक-एक कर शिक्षकों को शाल, स्मृतिचिह्न, पेन सेट और डायरी देकर सम्मानित किया गया तो माहौल में औपचारिकता से ज्यादा अपनापन नजर आया। कई शिक्षक अपने साथियों से मिलकर भावुक भी हुए।

गुरु के सम्मान से बड़ी कोई उपलब्धि नहीं
समारोह की शुरुआत डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षक नेता कमलेश नाथ अवस्थी ने की। समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने कहा कि शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता। वह बच्चों के व्यक्तित्व और सोच को आकार देता है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट को जीवन का अंत मानने के बजाय इसे अनुभवों को समाज और नई पीढ़ी के साथ साझा करने की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्नाव के शिक्षकों ने कई पीढ़ियों को पढ़ाने के साथ उन्हें संस्कार और दिशा देने का काम किया है। यही वजह है कि 26 वर्षों से सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित करने की परंपरा लगातार जारी है। उन्होंने सभी शिक्षकों के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।
अनुभवों की पूंजी समाज के काम आए
वरिष्ठ शिक्षक नेता कमलेश नाथ अवस्थी ने कहा कि शिक्षक का प्रभाव उसकी नौकरी तक सीमित नहीं रहता। एक शिक्षक अपने सेवाकाल में हजारों विद्यार्थियों के जीवन को प्रभावित करता है और उसका दिया ज्ञान लंबे समय तक समाज में दिखाई देता है।उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकों के पास वर्षों का अनुभव होता है। यह अनुभव समाज के लिए किसी पूंजी से कम नहीं है। अन्नू टंडन की ओर से लगातार 26 वर्षों से शिक्षकों को सम्मान देना शिक्षक समाज के प्रति सम्मान की मिसाल है।
सम्मान सिर्फ मंच तक सीमित नहीं
चौधरी खजान सिंह महाविद्यालय के प्रबंधक एवं वरिष्ठ समाजवादी मुकेश यादव ने कहा कि शिक्षकों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज और राष्ट्र की अगली पीढ़ी तैयार करने में लगाया। ऐसे लोगों को सम्मान देना सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम नई पीढ़ी को भी यह संदेश देते हैं कि सफलता की दौड़ में अपने गुरुओं को भूलना नहीं चाहिए।

साथियों के बीच सम्मान मिला तो आंखें नम हुईं
समारोह में सम्मान पाने वाले शिक्षकों पुष्पा यादव, हाकिम खान, सुनील दीक्षित, प्रेम श्रीवास्तव, अनिल कटियार और तनुजा सिंह समेत अन्य ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल के बाद अपने साथियों और परिचितों के बीच सम्मान मिलना बेहद भावुक करने वाला अनुभव है। शिक्षकों ने कहा कि 26 साल से लगातार इस तरह का आयोजन होना अपने आप में बड़ी बात है। यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षक और शिक्षा की गरिमा का सम्मान है। उन्होंने अन्नू टंडन का आभार जताते हुए इस परंपरा को आगे भी जारी रखने की उम्मीद जताई।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
समारोह में शिक्षक, समाजसेवी, अधिवक्ता और शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विवेक शुक्ला, अजय श्रीवास्तव और शिक्षक प्रमोद मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया। अंत में आयोजकों ने अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों और मौजूद लोगों का आभार जताया। कार्यक्रम में राजेश यादव, सुंदर लाल लोधी, उदयराज यादव, अरुण शंकर शुक्ला अन्ना महाराज, राधेलाल रावत, बदलू खान, वीर प्रताप सिंह, राम बरन कुरील, अंकित सिंह परिहार, सीके त्रिपाठी, मंटू कटियार, ब्रजपाल यादव, जितेंद्र रावत, राजकुमार रावत, बितेंद्र रावत, दिलीप यादव, रमेश रावत, अंकित यादव, शशांक शेखर शुक्ला, मधु यादव, इस्माइल खान, अशोक चंदेल, विवेक पटेल, ज्ञानेंद्र सिंह, मुन्ना अल्वी, मेराज खान, आंचल वर्मा, वीरेंद्र शुक्ला, चंद्रपाल पासी, पंकज गौतम, नंदलाल निषाद, बार अध्यक्ष रतिंद्र प्रताप सिंह, पूर्व बार अध्यक्ष गिरीश मिश्रा, नसीम खान, मनोज गुप्ता, तनवीर खान, जीतू केसरवानी, उमालाल यादव, श्री नारायण पाल, लाली यादव, वरुण शुक्ला, शिबू खान, राजेश मिश्रा, मंजीत यादव, नरेंद्र लोधी, आलोक त्रिपाठी, संजीव त्रिवेदी, हनुमंत सिंह, अशोक गुड्डू, श्रवण यादव, अमित शुक्ला, संजय निगम और हृदय प्रकाश श्रीवास्तव समेत अन्य मौजूद रहे।
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