शिया समुदाय की आस्था लौटी : तालकटोरा कर्बला से चोरी हुआ ज़ुलजुनाह उन्नाव से मिला
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Dec 30, 2025
मौरावां के घोड़ा कारोबारी से बरामद हुआ दो लाख का ईरानी नस्ल का घोड़ा

उन्नाव। लखनऊ के तालकटोरा कर्बला से चोरी हुआ शिया समुदाय की आस्था का प्रतीक सफेद ईरानी घोड़ा ज़ुलजनाह आखिरकार सकुशल वापस मिल गया। करीब एक हफ्ते से जिस घोड़े की सलामती को लेकर शिया समुदाय में बेचैनी और दुआओं का दौर चल रहा था, उसकी बरामदगी की खबर मिलते ही राहत और खुशी की लहर दौड़ गई। यह घोड़ा 24 दिसंबर की रात खुदाबख्श कर्बला परिसर के अस्तबल से चोरी हुआ था, जिसे पुलिस ने उन्नाव जिले के मौरावां क्षेत्र से बरामद किया है।
जुलजनाह सिर्फ एक घोड़ा नहीं, बल्कि शिया समुदाय की गहरी धार्मिक आस्था और इतिहास से जुड़ा प्रतीक है। मान्यताओं के अनुसार कर्बला की जंग में पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन जिस नस्ल के घोड़े पर सवार थे, उसी नस्ल को जुलजनाह कहा जाता है। मोहर्रम के दौरान निकलने वाले जुलूसों में इस सफेद घोड़े को खास तौर पर सजाया जाता है। उसके शरीर पर सफेद कपड़ा डाला जाता है और लाल रंग के निशान बनाए जाते हैं, जो कर्बला की जंग में लगे जख्मों की याद दिलाते हैं। जुलूस के दौरान लोग घोड़े को चूमते हैं, अगरबत्ती दिखाते हैं और मातम करते हैं। ऐसे में जुलजनाह का चोरी होना सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं था, बल्कि आस्था को गहरी ठेस पहुंचाने वाली घटना थी।
चोरी की वारदात सामने आने के बाद शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व सदस्य सैयद फैजी ने तालकटोरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस के लिए यह मामला चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि घोड़े को चोरी के बाद तुरंत शहर से बाहर ले जाया गया था। जांच में पुलिस टीम ने करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर पुलिस की कड़ी उन्नाव तक जा पहुंची, जहां से घोड़े की लोकेशन का पता चला। सोमवार को पुलिस ने उन्नाव के स्वयंवर खेड़ा, मौरावां इलाके में एक घोड़ा कारोबारी के पास से जुलजनाह को बरामद कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी जीजा-साले ने कारोबारी को यह घोड़ा 1.63 लाख रुपये में बेच दिया था और रकम ऑनलाइन अपने खाते में जमा करा ली थी। पुलिस ने इस मामले में उन्नाव के हसनगंज निवासी छोटू वर्मा को पारा इलाके से गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका साला फिरोज, जो मौरावां का रहने वाला है, अभी फरार है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। बताया जा रहा है कि चोरी किए गए इस ईरानी नस्ल के घोड़े की कीमत करीब दो लाख रुपये है। हालांकि समुदाय के लोगों के लिए इसकी कीमत पैसों से कहीं ज्यादा आस्था से जुड़ी है। घोड़े के सुरक्षित मिलने की खबर फैलते ही कर्बला और आसपास के इलाकों में लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने लगे। कई लोगों ने इसे दुआओं का असर बताया। सैयद फैजी ने घोड़े की तलाश करने वाले को 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा भी की थी। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि जुलजनाह की वापसी से शिया समुदाय का भरोसा मजबूत हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर यह घोड़ा नहीं मिलता तो मोहर्रम के जुलूसों की परंपरा पर असर पड़ सकता था। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। वहीं जुलजनाह की वापसी के बाद कर्बला परिसर में एक बार फिर रौनक लौट आई है। जिस घोड़े की सलामती के लिए लोग दुआ कर रहे थे, अब उसी के सामने सजदा-ए-शुक्र अदा किया जा रहा है।
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