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: कायाकल्प के नाम पर लूट, सीवीओ पर गिरी गाज, बाकी बच गए

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Oct 31, 2025
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निलंबन आदेश में चहेते ठेकेदार का जिक्र, लेकिन बाकी अफसरों पर कार्रवाई नहीं

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

उन्नाव। पशुपालन विभाग में कायाकल्प के नाम पर हुए खेल की नई परतें खुलती जा रही हैं। निलंबित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर सिंह के कार्यकाल में न सिर्फ पशु चिकित्सालयों की मरम्मत और रंगरोगन में गड़बड़ी हुई, बल्कि कार्यालय में इस्तेमाल होने वाले सामान्य सामानों की खरीद में भी जमकर मनमानी की गई। सूत्र बताते हैं कि विभाग ने सफाई के लिए नारियल के 70 झाड़ू खरीदे थे, जिन पर 29,750 रुपये खर्च किए गए यानी एक झाड़ू की कीमत 425 रुपये दिखाई गई। बाजार में यही झाड़ू 40-50 रुपये में मिल जाती है। इसी तरह 64 तौलियों की खरीद में 50,560 रुपये खर्च दिखाए गए, मतलब एक तौलिया 790 रुपये का पड़ा। जानकारों के मुताबिक, किसी अच्छी कंपनी का तौलिया भी इतनी कीमत का नहीं होता। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि इस खरीद में खुलेआम अंधेरगर्दी हुई। यह सारा भुगतान उसी अवधि में किया गया जब डॉ. महावीर सिंह जिले के सीवीओ थे। दिलचस्प बात यह है कि सफाई से लेकर मरम्मत तक के 90 फीसदी से ज्यादा काम एक ही फर्म को दिए गए, जो कथित तौर पर विभाग के एक लिपिक के रिश्तेदार की बताई जा रही है। यही वजह है कि अब उस लिपिक का नाम भी जांच के घेरे में आ गया है।

कार्रवाई में पक्षपात की चर्चा

डॉ. महावीर सिंह पर निलंबन की कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि बाकी दो अधिकारियों पर चुप्पी क्यों?जिलाधिकारी कार्यालय से शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट में सिकंदरपुर कर्ण और सदर अस्पताल के डिप्टी सीवीओ के नाम भी शामिल थे। तीनों पर समान अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन निलंबन केवल एक अधिकारी का हुआ। विभाग के अंदर अब यह चर्चा है कि कार्रवाई चयनित तरीके से की गई और कुछ नामों को फाइल से हटा दिया गया।

जांच में क्या निकला सामने

यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़ा है। उस दौरान जिले के 12 पशु चिकित्सालयों और 2 पशु सेवा केंद्रों के कायाकल्प के लिए 13.80 लाख रुपये का बजट जारी हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया कि इन कामों के लिए किसी मान्यता प्राप्त फर्म से निविदा प्रक्रिया के तहत अनुबंध होना चाहिए था, लेकिन बिना नियमों के पालन किए भुगतान कर दिया गया। जब तीन सदस्यीय जांच बनी समिति जिसमें जिला विकास अधिकारी, आरईएस के एक्सईएन और कोषाधिकारी शामिल थे टीम ने स्थल निरीक्षण किया, तो पाया गया कि अधिकांश स्थानों पर रंगाई-पुताई अधूरी थी, खिड़कियों के शीशे टूटे थे और फर्श उखड़ी हालत में थे। रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि कायाकल्प के नाम पर बजट की बंदरबांट की गई।

सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले निलंबन

प्रमुख सचिव पशुधन मुकेश मेश्राम ने गुरुवार को आदेश जारी कर डॉ. महावीर सिंह को निलंबित कर दिया। खास बात यह है कि यह आदेश उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले जारी हुआ।

शासन का बयान

विशेष सचिव पशुपालन देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि सीवीओ डॉ. महावीर सिंह को वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में वे पशुपालन विभाग के लखनऊ मुख्यालय में संबद्ध रहेंगे। रिकवरी पर निर्णय अंतिम जांच के बाद लिया जाएगा। जल्द ही उन्नाव में नए सीवीओ की तैनाती कर दी जाएगी।

अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर

शासन ने फिलहाल विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि मामला यहीं रुक जाएगा या आगे बढ़ेगा। कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं कि पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि बाकी अधिकारियों को क्लीन चिट किस आधार पर मिली। उन्नाव के पशुपालन विभाग में यह मामला अब सिर्फ अनियमितता का नहीं, पूरे सिस्टम पर भरोसे का बन गया है। हर कोई यही पूछ रहा है कि अगर गलती सबकी थी, तो सजा सिर्फ एक को क्यों?

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