: बरसाती सीजन सिर पर, खतरा-ए-जान बने कई जर्जर मकान
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Jun 24, 2025
पालिका-यूएसडीए एक दूसरे पर डाल रहे अपनी जिम्मेदारी
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। मानसूनी बारिश शुरु होने के बीच एक बार फिर शहर के पुराने जर्जर मकानों की समस्या सिर उठाए सामने खड़ी है। हर साल बरसात के दिनों में प्रशासन और नगरपरिषद के जिम्मेदार इस समस्या को लेकर हाथ-पांव हिलाते नजर आते हैं लेकिन जैसे ही बारिश का समय व्यतीत होता है, सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है। यही कारण है कि विगत कई वर्षों से कुछ बेहद जर्जर मकानों की समस्या बनी हुई है। शहर में 133 ऐसे पुराने मकान है जो जर्जर हालत में है। और वो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते है। इधर, नगर पालिका प्रशासन अब जर्जर भवनों का काम यूएसडीए (उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) को बताकर अपनी जिम्मेदारी से से पल्ला झाड़ रहा है। और वहीं, यूएसडीए इसे नगर पालिका का क्षेत्र बता रहा है। ऐसे कई मकान हैं, जो तेज बरसात के प्रहार से कभी भी धराशायी हो सकते हैं। पूर्व के बरसाती सीजनों के दौरान इनमें से कभी किसी की छत तो कभी किसी की दीवार भरभरा कर गिरी भी है। सौभाग्यवश कोई जनहानि इन हादसों से नहीं हुई लेकिन हर बार वहां आसपास रहने वाले लोगों पर भाग्य इतना ही मेहरबान रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं ले सकता। बीते कुछ सालों के दौरान शहर के कुछेक मकानों को अवश्य सुरक्षित उतारने व उनका पुनर्निर्माण करवाया गया है। जो जर्जर मकान खतरा-ए-जान बने हुए हैं। हर वर्ष ऐसे मकानों को सुरक्षित उतरवाने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जाते हैं और चेतावनी भी दी जाती है, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं करने के कारण हर बरसाती सीजन में इन जर्जर मकानों के कारण हादसा होने का अंदेशा बरकरार रहता है।
इन मोहल्लों में सबसे अधिक जर्जर मकान
बात करें जर्जर मकानों में से शहर के कल्याणी देवी में दस, एबीनगर दक्षिणी व अकरमपुर में नौ-नौ, सिंगरोसी में आठ, आदर्श नगर, गांधीनगर व कासिम नगर में सात समेत कुल 32 मोहल्लों में 133 जर्जर भवन हैं।
पड़ोसियों के माथे पर चिंता की लकीरें
जर्जर मकानों के आसपास रहने वाले लोगों को हर समय अपनी सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। बारिश के मौसम में ये लगभग जीर्ण-शीर्ण हो चुके बंद मकान कभी भी भरभराकर गिर कर आसपास रहने वाले लोगों व राहगीरों के लिए आफत का कारण बन सकते हैं। बारिश के दौरान हर बार जर्जर मकानों से आसपास के लोगों को खतरे का मुद्दा उठता रहा है। नगरपरिषद और जिला प्रशासन तक लोग गुहार लगाते हैं।
पूर्व में हुए हैं हादसे
बीते साल पिछले साल बारिश के दिनों में शहर के सदर बाजार बड़ा चौराहा पर एक पुराने मकान का छज्जा गिर गया था। इससे आसपास के दुकानदारों, खरीदारों और मुख्य मार्ग से आवागमन कर रहे लोगों में भगदड़ मच गई थी। कुछ लोगों को चोटें भी आई थीं। इसके बाद नगर पालिका ने शहर के सभी 32 वार्डों में जर्जर भवनों का सर्वे कराया था। इसमें कुल 133 भवन चिह्नित किए गए थे। इन इमारतों का अक्सर कोई न कोई हिस्सा टूट कर गिरता रहता है। यह जर्जर भवन आसपास के घरों में रहे वाले और सड़कों से आवागमन कर रहे लोगों के लिए भी खतरा बने हैं। इन भवनों को गिराने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उस समय केवल नोटिस देकर खानापूरी कर लिया। इधर, बारिश शुरू हो चुकी है। ऐसे में यह भवन किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। नगर पालिका का कहना है कि जर्जर भवनों का काम यूएसडीए को दे दिया गया है। जबकि यूएसडीए पुराने जर्जर भवनों की जिम्मेदारी नगर पालिका की ही बता रहा है। ऐसी घटनाओं के तुरंत बाद प्रशासन व नगरपरिषद का अमला हरकत में आता है और आनन-फानन में नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की जाती है। गत कुछ वर्षों के दौरान उन्नाव में मानसून और उसके बाद भी अच्छी बारिशें हो रही हैं। इस प्राकृतिक वरदान स्वरूप आसमानी पानी से जर्जर मकानों की समस्या और विकराल हो जाती है।
एक दूसरे पर डाल रहें अपनी जिम्मेदारी
नगरपालिका ईओ एसके गौतम ने बताया कि उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण (यूएसडीए) ही भवनों के नक्शें जारी करता है। इसलिए जर्जर भवनों को नोटिस व गिराने की जिम्मेदारी यूएसडीए को दे दी गई है। नगर पालिका प्रशासन का अब इससे कोई मतलब नहीं रह गया है। उधर, यूएसडीए सचिव नवीन चंद्र का कहना है कि बिना नक्शा के भवन निर्माण पर कार्रवाई या उसे गिराने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। जो पुराने जर्जर भवन हैं और वह रहने वालों या आसपास के लोगों के लिए खतरा बने हैं, उन पर नगर पालिका परिषद को ही कार्रवाई करनी है। अगर ईओ इसे यूएसडीए का अधिकार क्षेत्र बता रहे हैं तो जर्जर भवन कब उनके विभाग को हस्तगत हुए, इसका पत्र दिखाएं।
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