जंगल और नदी किनारे छिपे : शराब नेटवर्क पर पुलिस का वार
Thu, Nov 20, 2025
ड्रोन से लोकेशन ट्रेस कर पुलिस और आबकारी ने की संयुक्त रेड
उन्नाव। अवैध शराब के खिलाफ चल रही मुहिम को बुधवार को बड़ी सफलता मिली। आबकारी विभाग और मौरावां थाना पुलिस ने ग्राम दृगपालगंज और हड़हरा क्षेत्र में सई नदी के किनारे छापेमारी की। यह इलाका घने जंगल और दुर्गम रास्तों की वजह से लंबे समय से कच्ची शराब बनाने वालों का छिपा ठिकाना था। टीम ने छापेमारी से पहले पूरे इलाके की ड्रोन से निगरानी की। ड्रोन फुटेज में कई संदिग्ध जगहें दिखीं, जिनके आधार पर पुलिस और आबकारी की संयुक्त टीम जंगल और नदी किनारे तक पहुंची। झाड़ियों के भीतर अस्थायी भट्ठियां मिलीं जहां शराब बनाने के उपकरण, ड्रम और लहन भरा पड़ा था। टीम को देखते ही वहां मौजूद लोग मौका पाकर भाग निकले। कार्रवाई में 20 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई। करीब 300 किलो लहन को मौके पर ही नष्ट किया गया। शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले ड्रम, पाइप, डिग्गी और अन्य सामग्री तोड़कर जला दी गई। तैयार शराब को बहा दिया गया और पूरी जगह को दोबारा ड्रोन से देखकर जांचा गया, ताकि कोई ठिकाना बच न पाए। जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र ने कहा कि अवैध शराब से न सिर्फ लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ता है, बल्कि इससे राजस्व को भी नुकसान होता है। टीम के अनुसार आगे भी ऐसे अभियान लगातार चलेंगे। ड्रोन निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि जंगल और नदी किनारे छिपकर चल रहे इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
दम घोंटू 'जहरीली हवा' : का आपातकाल! दिल्ली-NCR में AQI 450 के पार, सुप्रीम कोर्ट सख्त
Thu, Nov 20, 2025
नई दिल्ली
: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पिछले कई दिनों से एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। यहाँ की हवा लगातार 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में बनी हुई है, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार बना हुआ है, जबकि कई हॉटस्पॉट इलाकों में यह 450 से 477 तक पहुँच गया है, जो बेहद जानलेवा स्तर है।
प्रमुख शहर और सबसे प्रदूषित इलाके
राजधानी दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के पड़ोसी शहरों में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है:
शहर/इलाका | एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) | श्रेणी
वजीरपुर (दिल्ली) | 477 तक | गंभीर (Severe) |
गाजियाबाद | 430 | गंभीर (Severe) |
नोएडा | 408 | गंभीर (Severe) |
ग्रेटर नोएडा | 388 | बहुत खराब (Very Poor) |
आरके पुरम (दिल्ली) | 424 | गंभीर
ये आंकड़े वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं, जो मौसम और हवा की दिशा बदलने पर लगातार बदलते रहते हैं।
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं
पराली जलाना:
हालांकि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाएँ पिछले वर्ष से कम हैं, लेकिन पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी पराली जलाने की घटनाओं के कारण धुआँ NCR की ओर आ रहा है, जो प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (15-30%) है।
स्थानीय उत्सर्जन
: वाहनों का धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ की धूल (Construction and Demolition Dust), और कूड़ा जलाने जैसी स्थानीय गतिविधियाँ प्रदूषण में भारी योगदान दे रही हैं।
मौसम की स्थिति:
कम तापमान, शांत हवाएँ और नमी के कारण प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) निचले वातावरण में फँस जाते हैं, जिससे धुंध (Smog) की मोटी परत छा जाती है और AQI खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा और डॉक्टर की चेतावनी
एम्स (AIIMS) दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख ने वर्तमान स्थिति को 'जानलेवा' करार दिया है। जहरीली हवा के कारण लोगों को आँख में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और साँस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें हो रही हैं। डॉक्टर N95 मास्क पहनने और सुबह की सैर जैसी बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दे रहे हैं।
सरकारी कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का रुख
बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एनसीआर के राज्यों को पत्र लिखकर सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। ऐसी खबरें हैं कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के फेज-IV के प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
GRAP-IV में संभावित प्रतिबंध
: इसमें डीजल ट्रकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध और सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक शामिल हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप:
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदूषण के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दीर्घकालिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया है, और राज्यों को पराली जलाने से जुड़े निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है।
मतदाता पुनरीक्षण में फॉर्म तो पहुंच रहे : लेकिन भरने में परेशान लोग
Thu, Nov 20, 2025
मतदाता सूची के भाग संख्या और क्रमांक भरने में सबसे ज्यादा दिक्कत
उन्नाव। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बीएलओ लगातार घर घर पहुंचकर फॉर्म बांट रहे हैं, लेकिन इन्हें भरना लोगों के लिए सबसे कठिन काम बनता जा रहा है। कई परिवार मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी समझ नहीं पा रहे, जिसके कारण प्रपत्र अधूरे ही पड़े हैं और लोग बीएलओ के मार्गदर्शन का इंतजार कर रहे हैं। प्रपत्र में वर्तमान जानकारी के साथ परिवार का ब्योरा, पुराने वोटर लिस्ट का भाग संख्या और क्रमांक भी भरना है। यही कॉलम सबसे ज्यादा उलझन पैदा कर रहे हैं। कई लोगों को यह नहीं पता कि यह विवरण कहां से मिलेंगे और किस तरह भरना है। जिले के 23.15 लाख मतदाताओं के सापेक्ष बीएलओ अब तक 17 लाख से ज्यादा फॉर्म पहुंचा चुके हैं। फॉर्म बांटने की रफ्तार तेज है, लेकिन उन्हें भरवाने की प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं है। कई घरों में लोगों ने बताया कि बीएलओ ने फॉर्म तो थमा दिया, लेकिन जानकारी देने में ढंग से सहायता नहीं की। मोहल्ला किला निवासी काशिफ अली ने बताया कि उनके पास मौजूद पुराने रिकॉर्ड में पिता का नाम नहीं है जबकि दादा का नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि फॉर्म में सूची की जानकारी चाहिए। यह कैसे ठीक होगा, यह बीएलओ बताएंगे तो ही फॉर्म भर पाऊंगा।
इस बीच कई वार्ड सभासद, क्षेत्रीय नेता और समाजसेवी लोग भी आगे आकर मदद कर रहे हैं। मोहल्लों में बैठकर वे लोगों को फॉर्म समझा रहे हैं, पुराने विवरण खोजने में मदद कर रहे हैं और उन कॉलमों की जानकारी दे रहे हैं जो मतदाताओं को समझ नहीं आ रही थी। इससे कई परिवारों को राहत मिली है और फॉर्म भरने की प्रक्रिया थोड़ी आसान हुई है।
सहायक निर्वाचन अधिकारी आशुतोष मिश्रा ने बताया कि 70 प्रतिशत से ज्यादा प्रपत्र वितरित हो चुके हैं और तीन चार दिनों में वितरण पूरा कर लिया जाएगा। उनका कहना है कि फॉर्म वापस लेते समय बीएलओ अधूरी जानकारी वहीं समझाकर पूरा कराएंगे। किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। जैसे जैसे अभियान आगे बढ़ रहा है, प्रशासन और समाज के लोगों की संयुक्त कोशिशों से उम्मीद है कि फॉर्म भरने की दिक्कतें धीरे धीरे कम होंगी।