बाइक सवार मजदूर को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर : उछलकर खड़े टैंकर से टकराकर हुई मौत!
Sat, Nov 22, 2025
उत्तर प्रदेश बरेली
: दरअसल जनपद के फरीदपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग ग्राम भगवानपुर फूलवा समीप स्थित ओवरब्रिज पर गुरुवार दोपहर 3:00 बजे करीब मोबाइक सबार मजदूर महताब 23,पुत्र श्याम सिंह निबासी ग्राम बकैनियाँ की बाइक को पीछे से किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी टक्कर के बाद मजदूर महताब उछल कर ब्रिज पर खड़े टैंकर से जा टकराया घटना में घर लौट रहा बाइक सवार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया।
खून से लथपथ मजदूर को सड़क पर पड़ा देख तमाम लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई और देखते ही देखते वाहनों की कतारें लग गयीं इसी बीच मौका पाकर घटना को अंजाम देने बाला वाहन चालक वाहन लेकर घटना स्थल से फरार हो गया।
घटना की सूचना पर पहुँचे परिजनों ने बताया कि महताब की डेढ़ वर्ष पूर्व शादी हुई थी और एक माह पूर्व से कुनाल प्लाई बुड फैक्ट्री में मजदूरी कार्य कर परिवार का पेट पालन कर रहा था किन्तु इससे पूर्व महताब कई महीनों से टिसुआ स्थित प्लाई बुड फैक्ट्री में मजदूरी कार्य कर चूका था जहाँ मजदूरी के ठेकेदार सनोज पर रूपये शेष रहे गए थे जो शेष रूपये लेने टिसुआ गया था।
गुरुवार दोपहर बाइक से घर बकैनियाँ लौट रहा था कि द्वारिकेश चीनी मिल के सामने ओवरब्रिज पर पहुंचते ही किसी अज्ञात वाहन ने पीछे से टक्कर मार दी जिससे महताब उछलकर ब्रिज पर खड़े टैँकर से टकराकर लहूलुहान हो गया सिर में गंभीर चोट आने कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना पर पहुँची थाना पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया।पुलिस ने ब्रिज पर खड़े टैँकर को कब्जे में ले लिया है पुलिस का कहना है कि घटित हुई घटना की कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है तहरीर प्राप्त होने पर ही संबंधित कार्यवाही की जा सकेगी।
घटित घटना से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है अचानक हुई दर्दनाक घटना की चर्चा गाँव में चर्चित है।
कभी जीवनदायिनी, आज जहरीली : नदी का गिरता सच
Sat, Nov 22, 2025
टेनरियों का गंदा पानी बना किसानों और ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता
उन्नाव। कभी गांवों की प्यास बुझाने और खेतों को संजीवनी देने वाली लोन नदी आज अपनी पहचान तक खो चुकी है। पानी इतना खराब हो गया है कि न पीने लायक बचा है और न खेती के काम का। औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला जहरीला पानी नदी में मिलने से हालत हर साल और बिगड़ रही है।
शहर के दही चौकी इलाके से शुरू होकर पुरवा और बीघापुर की तरफ बहती यह नदी पहले कई गांवों की जरूरी जरूरतें पूरी करती थी। लेकिन टेनरियों और फैक्टरियों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़े जाने से इसका रंग काला पड़ गया है। कई जगह पानी के ऊपर लाल रंग की चिपचिपी परत दिखती है। गुजरने वाले लोग सिर्फ एक झोंके से समझ जाते हैं कि स्थिति कितनी खराब है। बदबू इतनी तेज है कि लोग सांस रोककर निकलते हैं।स्थिति इस कदर बिगड़ी है कि किसान अब नदी का पानी खेतों पर नहीं डाल रहे। उनका कहना है कि एक बार सिंचाई कर दी तो फसल जलने लगती है। मजबूरी में निजी नलकूपों या टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती का खर्च दोगुना हो गया है। समस्या सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रही। गांवों का भूगर्भ जल भी तेजी से खराब हो रहा है। हैंडपंप से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड बढ़ गया है। इससे कई गांवों में लोग पेट, हड्डी और त्वचा संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ी। दही बंथर और अकरमपुर इलाके की टेनरियां भी स्थिति को और खराब कर रही हैं। यहां से निकलने वाला बिना ट्रीटमेंट करके दूषित पानी सीधे लोन नदी और सई नदी में बहाया जा रहा है। दोनों नदियों का प्रवाह तेज़ी से दूषित हो रहा है और असर आसपास की बस्तियों तक पहुंच चुका है। लोन नदी चांदपुर, जमुका, बड़ौरा, दुआ, जगेथा, पौंगहा, मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ, अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा और परसंडा जैसे गांवों के करीब से गुजरती है। इन इलाकों में करीब एक लाख से ज्यादा लोग दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी का हाल हर साल और खराब हो रहा है। कई बार विरोध और ज्ञापन दिए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही। अब लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक इस जहर को सहते रहेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि प्रदूषण पर तत्काल रोक लगे और लोन नदी को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, वरना आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।
पुरवा विधायक बोले, लोन नदी को बचाना अब जरूरी
पुरवा विधायक अनिल सिंह ने लोन नदी की बिगड़ती हालत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टेनरियों से निकलकर सीधे नदी में जा रहा गंदा पानी गांवों की सेहत और खेती दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है। खेतों की मिट्टी खराब हो रही है और लोग मजबूरी में दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हाल किसी से छिपा नहीं है। विधायक ने बताया कि वह पूरे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा जाएगा कि नदी में गिर रहे औद्योगिक अपशिष्ट को तुरंत रोका जाए। जो भी इकाइयां नियम तोड़ रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठें। उनका कहना है कि लोन नदी को वैसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले सालों में हाल और बिगड़ जाएगा।
जिम्मेदार बोले
इधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अब सक्रिय दिख रहा है। क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर ने बताया कि नदी में गिरने वाले नालों और औद्योगिक इकाइयों के डिस्चार्ज का सैंपल लगातार लिया जा रहा है। पिछले सप्ताह भी टीम ने नदी और नालों के कई स्थानों से नमूने इकट्ठा किए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जल्दी आने वाली है और जैसे ही स्थिति स्पष्ट होगी उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जिन इकाइयों से प्रदूषित पानी मिलने की पुष्टि होगी उन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
राष्ट्रीय गौसंरक्षक दल की सराहनीय पहल : निराश्रित गौवंशों को रेडियम पट्टी पहनाकर मिला सुरक्षा कवच
Sat, Nov 22, 2025
बरेली (उत्तर प्रदेश):
सड़क दुर्घटनाओं में गौवंशों और मनुष्यों दोनों के लिए बढ़ते खतरों को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में राष्ट्रीय गौसंरक्षक दल ने एक अत्यंत संवेदनशील और व्यावहारिक कदम उठाया है। फरीदपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पचौमी में दल के समर्पित कार्यकर्ताओं ने सड़कों और खेतों में विचरण करने वाले निराश्रित गौवंशों के गले में रेडियम पट्टी पहनाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभिनव अभियान चलाया।
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दुर्घटनाओं का बढ़ता सिलसिला
हाल के दिनों में, सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशुधन, विशेष रूप से गौवंश, न केवल स्वयं अप्रिय दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, बल्कि रात के अंधेरे में सड़क पर अचानक आ जाने से कई गंभीर मानव दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। यह समस्या ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की सड़कों पर सर्दियों के कोहरे और कम रोशनी में और भी विकराल हो जाती है।
राष्ट्रीय गौसंरक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने इस गंभीर चुनौती को समझा और शुक्रवार प्रातः पचौमी से फतेहगंजपूर्वी के बीच बड़े पैमाने पर यह अभियान चलाया। कार्यकर्ताओं ने गौवंशों के गले में भगवा रंग की चमकदार रेडियम पट्टी पहनाई। यह पट्टी रात के समय वाहनों की हेडलाइट की रोशनी पड़ने पर तेजी से चमकती है, जिससे वाहन चालकों को अंधेरे में भी दूर से गौवंश की उपस्थिति का स्पष्ट संकेत मिल जाता है।
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गौ और मानव सुरक्षा ही सर्वोपरि धर्म
इस मानवीय पहल पर टिप्पणी करते हुए, सोनू ठाकुर, जो गौरक्षा मंडल प्रभारी बरेली भी हैं, ने इस कार्य की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "गौवंशों समेत मानव सुरक्षा हमारा कर्तव्य और सर्वोपरि धर्म है। ये निराश्रित पशुधन हमारे समाज का हिस्सा हैं और इनकी रक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हमारा मानना है कि गौवंशों को पहनाई गई यह रेडियम पट्टी, जो रात्रि में एक सुरक्षा संकेत का काम करेगी, गौवंश और मानव दोनों की जान बचाने में अत्यंत सहयोगी साबित होगी।"
दल के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गौवंशों की दृश्यता (visibility) को बढ़ाकर, सड़कों को सभी के लिए – मानव और पशु – अधिक सुरक्षित बनाना है।
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अभियान में सक्रिय सहभागिता
इस महत्वपूर्ण और सराहनीय कार्य को सफल बनाने में दल के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। इनमें कुलदीप (प्रदेश प्रचार मंत्री), सोनू ठाकुर, सनिल प्रताप सिंह (जिला अध्यक्ष), सचिन सिंह (जिला अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ), तथा सचिन कुमार, कल्लू, जितेंद्र, अर्जुन प्रमोद पंडित, डॉ0 हीरा लाल आदि कार्यकर्ता शामिल रहे।
राष्ट्रीय गौसंरक्षक दल की यह पहल अन्य क्षेत्रों और संगठनों के लिए एक प्रेरणास्रोत है कि कैसे छोटे, व्यावहारिक कदमों से समाज की एक बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है और निराश्रित पशुओं के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।