: अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ उन्नाव में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
Sun, Aug 31, 2025
फैज फारूकी बोले- टैरिफ नीति भारतीय उद्योग पर सीधा हमला
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के विरोध में रविवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के बड़े चौराहे पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विकलांग प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष फैज फारूकी और प्रदेश महासचिव तन्मय श्रीवास्तव ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह नीति सीधे भारतीयों की रोज़ी-रोटी पर चोट कर रही है।
विदेशी सामान का बहिष्कार
कार्यकर्ताओं ने "विदेशी सामान का बहिष्कार करो" और "ट्रंप सरकार होश में आओ" जैसे नारे लगाकर आक्रोश जताया। नेताओं ने कहा कि अमेरिकी नीति भारतीय उद्योग-व्यापार और रोज़ी-रोटी पर संकट लाने वाली है। उन्होंने चेताया कि अगर भारत ने विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम नहीं की तो छोटे व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। युवाओं ने भी आगे आकर हाथों में तख्तियां लेकर विदेशी उत्पादों को ना खरीदने का संकल्प लिया।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दें - फैज़ फारुकी
शहर अध्यक्ष फैज फारूकी ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ नीति से न केवल भारतीय उत्पादक बल्कि उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और ‘मेक इन इंडिया’ को मज़बूत बनाने की अपील की। फारूकी बोले कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी पूरा होगा जब आम नागरिक विदेशी उत्पादों से दूरी बनाकर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती मिलेगी।
केंद्र सरकार पर आरोप
प्रदेश महासचिव तन्मय श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया। बोले – कांग्रेस किसानों, मजदूरों और छोटे उद्योगों के हित में ऐसी नीतियों का लगातार विरोध करती रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते अमेरिका की नीतियों का विरोध नहीं किया तो भारतीय बाजार पूरी तरह विदेशी कंपनियों के कब्जे में चला जाएगा। श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क से सदन तक इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे।
पुलिस की मौजूदगी
प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले आयोजकों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। सुरक्षा के लिए पूरे इलाके में बैरिकेडिंग की गई थी और पुलिस कर्मियों ने सतर्कता बरती। प्रदर्शन स्थल पर ट्रैफिक भी कुछ देर प्रभावित रहा, हालांकि पुलिस ने जल्द ही मार्ग को सुचारु कर दिया।
: लखनऊ हादसे के बाद उन्नाव में सख्ती,पटाखा दुकानों पर छापेमारी
Sun, Aug 31, 2025
लाइसेंस
,
स्टॉक
रजिस्टर
और
सुरक्षा
इंतजामों
की
बारीकी
से
जांच
सैय्यद
फैज़ान
शीबू
रहमान
उन्नाव। लखनऊ पटाखा फैक्ट्री हादसे ने प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। दीपावली से पहले जिले में पटाखा दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। रविवार को सीएफओ अनूप सिंह और एफएसओ राममिलन के नेतृत्व में पुलिस व अग्निशमन विभाग की टीम ने अब्बासपुर क्षेत्र में छापेमारी की। टीम ने दुकानों के लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और सुरक्षा इंतजामों की बारीकी से जांच की।
बिना लाइसेंस दुकानों पर कार्रवाई
छापेमारी के दौरान कई दुकानों पर खामियां मिलीं। जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई, वहां चेतावनी दी गई। वहीं, बिना लाइसेंस संचालित दुकानों पर तत्काल कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध भंडारण और बिक्री पर किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पटाखों का गलत भंडारण बड़ा खतरा
एफएसओ राममिलन ने बताया कि पटाखों का अनुचित भंडारण कानून का उल्लंघन है और यह किसी भी समय बड़ा हादसा करा सकता है। उन्होंने व्यापारियों को पहले ही वैध लाइसेंस और सुरक्षा नियमों का पालन करने की हिदायत दी थी।
सीएफओ की अपील
सीएफओ अनूप सिंह ने कहा कि त्योहारों में लोग अक्सर सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने दुकानदारों से मानकों के अनुसार ही कारोबार करने की अपील की। साथ ही ग्राहकों से भी कहा कि वे सिर्फ वैध और लाइसेंसधारी दुकानों से ही पटाखे खरीदें।
अन्य कस्बों में भी होगी जांच
प्रशासन ने साफ किया है कि अभियान सिर्फ अब्बासपुर तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य कस्बों और बाजारों में भी दुकानों की चेकिंग की जाएगी। अवैध भंडारण या बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
: छह साल से जनता को कब तक मिलेगा सिर्फ “दो महीने और” का भरोसा, अधर में अमृत योजना
Sat, Aug 30, 2025
नलों से न पानी, सड़कों पर सिर्फ गड्ढे
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। अमृत योजना की डेडलाइन फरवरी 2020 थी, लेकिन हर बार अफसर सिर्फ दो महीने का समय और मांगते रहे। छह साल गुजर गए, मगर हालात जस के तस हैं। नलों से पानी अब भी नहीं आ रहा और सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं। जनता सवाल कर रही है— क्या यह “दो महीने और” का सिलसिला कभी खत्म होगा? बता दें कि 264 करोड़ की महत्वाकांक्षी अटल मिशन आफ रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना) शहरवासियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। 2018 में मंजूर योजना का लक्ष्य था हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना और टूटी सड़कों की मरम्मत करना। तय डेडलाइन फरवरी 2020 थी, लेकिन छह साल गुजरने के बाद भी शहरवासियों को न तो पानी मिल सका और न सड़कें ठीक हुईं। बुधवार को नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर 183 जर्जर सड़कों की मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने बजट देने का आश्वासन दिया।
सड़कें खोदीं, मरम्मत अधूरी
जल निगम ने 175 किलोमीटर भूमिगत पाइप लाइन डालने के लिए शहर की 322 सड़कें खोदीं। परंतु मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। नगर पालिका के बार-बार नोटिस देने के बावजूद केवल खानापूर्ति की गई। नतीजा, आज भी 183 सड़कें खस्ताहाल बनी हैं। बरसात में इन सड़कों पर गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं।
गर्मी में धूल उड़ने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों का कहना है कि टूटी सड़कों के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। राहगीर और वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार बन रहे हैं।
जुर्माने का भी असर नहीं
निर्माण एजेंसी और जल निगम की लापरवाही पर कई बार भारी जुर्माना लगाया गया, मगर काम की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ा। जुर्माना भरने के बाद भी ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। काम रोकने या ब्लैकलिस्ट करने की बजाय उन्हें बार-बार नए मौके दिए जाते रहे। नतीजा यह हुआ कि सड़कों की हालत जस की तस रही और जनता परेशान होती रही। शहरवासियों का कहना है कि जुर्माना वसूलना सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।
जुर्मानों का ब्यौरा
जून 2023
: ₹1 करोड़ (गलत रिपोर्ट व मरम्मत न कराने पर)
नवंबर 2023
: ₹5.50 करोड़ (काम में देरी पर)
सितंबर 2024
: ₹5.90 करोड़ (समय सीमा चूकने पर)
कुल ₹12.40 करोड़ का जुर्माना लग चुका, लेकिन हालात जस के तस।
अधूरी रही योजना की डेडलाइन
कुल लागत
: ₹264 करोड़
ढांचा
: 80 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, 14 ओवरहेड व 14 अंडरग्राउंड टैंक
लक्ष्य
: फरवरी 2020 तक 10 जोनों में 3,292 घरों को जलापूर्ति
हकीकत
: आज भी अफसर कहते हैं— “दो महीने और।”
पालिका का आरोप बनाम जल निगम का दावा
पालिका का आरोप
नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने बताया कि पाइप लाइन डालने के बाद सड़कें ठीक से नहीं बनीं, लीकेज लगातार बनी हुई है। इतनी बड़ी मरम्मत का बजट पालिका के पास नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री से 10 करोड़ रुपये मांगे हैं। जल निगम कुछ महीने लगातार जलापूर्ति कर दिखाए, तभी परियोजना ली जाएगी।
जल निगम का दावा
जल निगम एक्सईएन पंकज रंजन झा का कहना है कि जितनी सड़कें खोदी गईं, उनकी मरम्मत करा दी गई है। नगर पालिका के कहने पर कई जगह नई सीसी सड़कें भी बनाई गईं। अब तक 10 में से 7 जोनों का काम पूरा हो चुका है और रोज टेस्टिंग हो रही है। बाकी तीन जोनों की जांच भी जल्द पूरी होगी।
जनता की परेशानी
घर-घर नलों से पानी नहीं
हर मोहल्ले में टूटी सड़कें
बारिश में कीचड़, गर्मी में धूल
आए दिन हादसों का खतरा
दुकानदारों का कारोबार प्रभावित
मरीजों और स्कूली बच्चों को आने-जाने में दिक्कत
गड्ढों से भरी सड़कें एंबुलेंस तक रोक देती हैं
जनता पूछ रही सवाल
जनता सवाल कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी योजना का फायदा किसे मिला। पाइपलाइन और टैंकों पर करोड़ों खर्च हुए, लेकिन नलों से अब भी पानी नहीं टपका। लोगों का कहना है कि योजनाओं का बोझ जनता पर और मुनाफा ठेकेदारों पर जा रहा है। विकास के नाम पर केवल खोदी गई सड़कें और अधूरी परियोजनाएं ही नजर आ रही हैं। जुर्मानों के बावजूद ठेकेदार और एजेंसी बेलगाम क्यों है ? जल निगम का ठेकेदारों पर इतना लचीलापन क्यों है ? छह साल से जनता को आखिर कब तक “दो महीने और” का भरोसा दिया जाएगा?