माखी कांड : पीड़िता के चाचा की चार मामलों में पेशी, 30 जनवरी तक सुनवाई टली
Sat, Jan 17, 2026
तीन मामलों में गवाहों की जिरह पूरी, एक केस में वादी न आने पर समन
उन्नाव। माखी दुष्कर्म कांड की पीड़िता के सजायाफ्ता चाचा को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को उन्नाव स्थित एसीजेएम प्रथम की अदालत में पेश किया। इस दौरान आरोपी के खिलाफ दर्ज चार अलग-अलग आपराधिक मामलों में एक साथ सुनवाई हुई। अदालत ने सभी मामलों में अगली सुनवाई की तारीख 30 जनवरी तय की है। जानकारी के अनुसार, जनपद के माखी गांव निवासी आरोपी पर सदर कोतवाली और माखी थाना क्षेत्र से जुड़े चार गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में सीबीआई के एक गवाह की मौत को हत्या बताकर अफवाह फैलाने, गांव में राजनीतिक रंजिश के चलते एक स्थानीय नेता के खिलाफ आपत्तिजनक पंपलेट बंटवाने, गैंगस्टर एक्ट की पत्रावली में कथित रूप से सफेदा लगाकर नाम हटवाने की कोशिश, और मारपीट व अन्य विवादित घटनाओं से जुड़े आरोप शामिल हैं। इन सभी मामलों की सुनवाई अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में चल रही है। दिल्ली पुलिस की टीम आरोपी को गुरुवार दोपहर दिल्ली से लेकर रवाना हुई थी और रात करीब नौ बजे उन्नाव पहुंची। शुक्रवार को पेशी को देखते हुए न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही अदालत परिसर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। कोर्ट कक्ष के बाहर बैरिकेडिंग की गई और आने-जाने वालों की सघन जांच की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच काफी देर तक बहस चली। तीन मामलों में गवाहों की अदालत में मौजूदगी के बाद उनकी जिरह पूरी कर ली गई। वहीं एक मामले में वादी अदालत में पेश नहीं हो सका। इस पर अदालत ने वादी को समन जारी करते हुए सभी मामलों की अगली सुनवाई 30 जनवरी को तय कर दी। पेशी के बाद दिल्ली पुलिस की टीम आरोपी को वापस लेकर रवाना हो गई।
रिकॉर्ड रूम बाबू के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी
गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक मामले में पीड़िता के चाचा पर आरोप है कि उसने पत्रावली में सफेदा लगाकर अपना नाम हटवाने का प्रयास किया था। इस संबंध में न्यायालय के रिकॉर्ड रूम के तत्कालीन बाबू गणेश तिवारी ने सदर कोतवाली में धोखाधड़ी और कूटरचना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में वादी को अदालत की ओर से कई बार समन भेजे गए, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुआ। इस पर एसीजेएम प्रथम की अदालत ने शुक्रवार को उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
डॉक्टर और सिपाही समेत तीन गवाहों की जिरह पूरी
सीबीआई गवाह की मौत को हत्या बताकर अफवाह फैलाने के मामले में तत्कालीन माखी थाने के एसआई द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस केस में शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर तपन गुप्ता की अदालत में जिरह पूरी हुई। इसके अलावा अन्य मामलों में माखी निवासी सुरेश सिंह और कांस्टेबल विजय सिंह की भी गवाही और जिरह पूरी कर ली गई है। अदालत ने सभी मामलों में आगे की सुनवाई के लिए 30 जनवरी की तारीख तय की है।
घूमने गए परिवारों के बंद घरों में चोरी : लाखों के जेवर और नकदी ले उड़े चोर
Sat, Jan 17, 2026
सूने मकानों को बना रहे निशाना, सदर कोतवाली पुलिस पर बढ़ी जिम्मेदारी
उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र में चोरों ने अलग अलग इलाकों में दो बंद घरों को निशाना बनाकर लाखों की चोरी की वारदात को अंजाम दिया। दोनों ही मामलों में घर के मुख्य दरवाजे और अंदर रखी अलमारियों व बक्सों के ताले तोड़ दिए गए। पीड़ितों के मुताबिक चोर जेवरात, नकदी और बैटरियां समेत करीब सात लाख रुपये से अधिक का सामान ले गए। पुलिस ने दोनों घटनाओं की तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी है।
पहली घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के निरालानगर मोहल्ले की है। यहां अंकुर श्रीवास्तव पिछले चार वर्षों से किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहे हैं। अंकुर 12 जनवरी को पूरे परिवार के साथ बाहर घूमने गए थे। 15 जनवरी की रात जब वह घर लौटे तो देखा कि मुख्य गेट खुला हुआ है। आशंका होने पर अंदर जाकर देखा तो कमरों में रखा सारा सामान बिखरा पड़ा था। जांच में पता चला कि अलमारी और बक्से में रखे करीब सात लाख रुपये कीमत के जेवरात और 15 हजार रुपये नकद गायब थे। राहत की बात यह रही कि लैपटॉप चोरी नहीं हुआ और वह गद्दे के बीच दबा हुआ मिल गया। घटना की सूचना मिलते ही सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घर का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और पीड़ित से लिखित तहरीर लेकर जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया।
दूसरी चोरी की वारदात सदर कोतवाली क्षेत्र के डीह गांव की है। यहां रहने वाले कमल प्रकाश शुक्ल का घर भी चोरों ने उस समय निशाना बनाया, जब परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। कमल का बेटा हर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर अपने गांव अकबरपुर गया हुआ था। शुक्रवार सुबह जब वह वापस लौटा तो घर का दरवाजा खुला मिला और अंदर का सामान बिखरा पड़ा था। चोर घर में रखे 10 हजार रुपये नकद और दो बैटरियां चोरी कर ले गए। इस मामले में पीड़ित ने ललऊखेड़ा चौकी में चोरी की तहरीर दी है। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है।
इस संबंध में सदर कोतवाली इंस्पेक्टर चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि दोनों चोरी की घटनाओं की तहरीर प्राप्त हो चुकी है। पुलिस टीमों को जांच में लगाया गया है और जल्द ही दोनों वारदातों का खुलासा कर लिया जाएगा। पुलिस का कहना है कि इलाके में गश्त बढ़ाई जा रही है ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
छापे, नोटिस और फिर सन्नाटा : जिले में अवैध नर्सिंग होम बेलगाम
Fri, Jan 16, 2026
रिकॉर्ड में 122 पंजीकृत, हकीकत में गांव-गांव चल रहे अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम
उन्नाव। जिले में बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम और क्लीनिक मरीजों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। शहर से लेकर गांवों तक ऐसे केंद्र धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहां न तो मानक पूरे हैं और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार छापे जरूर पड़ते हैं, लेकिन अक्सर कागज दिखाने के लिए कुछ दिन की मोहलत देकर मामला टाल दिया जाता है। इसके बाद वही नर्सिंग होम दोबारा पहले की तरह चलने लगते हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में जिले में 122 नर्सिंग होम और क्लीनिक पंजीकृत हैं। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक सैकड़ों की संख्या में ऐसे नर्सिंग होम और क्लीनिक चल रहे हैं, जिनका कोई वैध पंजीकरण नहीं है। बेहतर इलाज के नाम पर छोटी बीमारी को भी गंभीर बताकर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। भर्ती के बाद दवाइयों, जांच और इलाज के नाम पर भारी भरकम बिल थमा दिया जाता है। मरीज या उनके परिजन जब सवाल उठाते हैं, तब तक हालात बिगड़ चुके होते हैं।
कागजों पर कार्रवाई, जमीन पर सन्नाटा
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई अक्सर खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है। विभाग का दावा है कि नवंबर 2025 से अब तक 26 अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम बंद कराए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से अधिकतर जगहों पर सिर्फ बोर्ड बदले गए या नाम बदलकर दोबारा संचालन शुरू हो गया। यानी मरीज वही, खतरा वही, बस नाम नया।
प्रसूता की मौत, जांच ठंडे बस्ते में
बांगरमऊ क्षेत्र के नन्हूपुरवा निवासी पूजा (23) की मौत का मामला अभी भी लोगों को याद है। फरवरी 2025 में पूजा को प्रसव के लिए एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ी और उसे लखनऊ रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। नाराज परिजनों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। मामला समय के साथ ठंडा पड़ गया।
ऑपरेशन की लापरवाही बनी मौत की वजह
मार्च 2025 में ऊगू नगर पंचायत की राधारानी (29) की मौत ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। जांच में सामने आया कि पहले हुए प्रसव ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने पेट के अंदर रुई और पट्टी का टुकड़ा छोड़ दिया था। इससे संक्रमण फैला और इलाज के दौरान महिला की जान चली गई। पोस्टमार्टम में सेप्टीसीमिया से मौत की पुष्टि हुई, एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन कार्रवाई अब तक जांच के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई है।
दो दिन का इलाज, पांच हजार की वसूली
सितंबर 2024 में अजीज नगर की पूनम को तेज बुखार था। पास के एक क्लीनिक में दिखाने पर झोलाछाप ने हालत गंभीर बताकर भर्ती कर लिया। इलाज के नाम पर दो दिन में पांच हजार रुपये वसूल लिए गए। हालत बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन रास्ते में ही महिला की मौत हो गई। परिजन आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
नोटिस तक सिमटी कार्रवाई
नवंबर 2024 में भुरकुंडी गांव की दीपा की मौत का मामला भी ऐसा ही रहा। गलत इलाज का आरोप लगा, शिकायत हुई, लेकिन नर्सिंग होम संचालक को सिर्फ नोटिस देकर मामला निपटा दिया गया। न कोई सख्त कार्रवाई, न कोई ठोस नतीजा।
विभाग का दावा, लोगों की चिंता
हालाकिं
प्रभारी सीएमओ डॉ. एचएन प्रसाद का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है। जल्द ही विशेष अभियान चलाकर अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक बंद कराए जाएंगे और बिना पंजीकरण किसी को भी संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सवाल यही है कि जब तक यह अभियान जमीन पर सख्ती के साथ नहीं उतरता, तब तक मरीजों की जान का भरोसा किसके हाथ में है। उन्नाव में इलाज अब जरूरत नहीं, बल्कि जोखिम बनता जा रहा है।