खुले में पूजन सामग्री फेंकने पर लगेगी रोक : गंगाघाट में लगेंगे अर्पण कलश
Fri, Jan 9, 2026
पालिकाध्यक्ष ने लिया संज्ञान, श्रद्धा और स्वच्छता दोनों बनाए रखने की पहल
उन्नाव। गंगाघाट क्षेत्र में नदी और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पूजन सामग्री फेंके जाने की बढ़ती शिकायतों को नगर पालिका अध्यक्ष कौमुदी पांडेय ने गंभीरता से लिया है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए पालिका ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब प्रमुख धार्मिक स्थलों और नवीन गंगा पुल के आसपास विशेष अर्पण कलश लगाए जाएंगे, ताकि पूजन सामग्री को सम्मानपूर्वक एकत्र किया जा सके। नगर पालिका परिषद की ओर से पूजन सामग्री के संग्रह के लिए वाहन पहले से संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नवीन गंगा पुल और दुर्गा मंदिर के सामने खुले में सामग्री फेंके जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इससे न सिर्फ क्षेत्र में गंदगी फैल रही थी, बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही थीं। शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष कौमुदी पांडेय ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ प्रतिनिधि संदीप पांडेय और पालिका कर्मचारी भी मौजूद रहे। मौके पर यह बात सामने आई कि पूजन सामग्री रखने के लिए स्थायी और स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण श्रद्धालु मजबूरी में सामग्री खुले में छोड़ देते हैं।निरीक्षण के बाद पालिकाध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवीन गंगा पुल सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर अर्पण कलश शीघ्र स्थापित किए जाएं। इन कलशों में श्रद्धालु अपनी पूजन सामग्री डाल सकेंगे, जिससे नदी, पुल और सड़कों पर गंदगी फैलने से रोका जा सकेगा। पालिका का मानना है कि इस व्यवस्था से आस्था का सम्मान भी होगा और स्वच्छता भी बनी रहेगी। नगर पालिका अध्यक्ष कौमुदी पांडेय ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि पूजन सामग्री को नदी, सड़क या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर न फेंकें। उन्होंने आग्रह किया कि पालिका द्वारा लगाए जा रहे निर्धारित पात्रों का ही उपयोग करें, ताकि गंगाघाट क्षेत्र स्वच्छ, सुंदर और धार्मिक गरिमा के अनुरूप बना रह सके। पालिका की इस पहल को लेकर स्थानीय नागरिकों ने संतोष जताया है। लोगों का कहना है कि अर्पण कलश लगने से पूजन सामग्री के निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान होगा और गंगाघाट की स्वच्छता में भी सुधार आएगा।
ऑडिट रिपोर्ट से पहले राहत : पंचायत सचिवों से 1.18 करोड़ की वसूली रुकी
Fri, Jan 9, 2026
उन्नाव। ग्राम पंचायतों के ऑडिट से जुड़े एक अहम मामले में सचिवों को फिलहाल राहत मिली है। ऑडिट के लिए अभिलेख उपलब्ध न कराने पर 11 पंचायत सचिवों से 1.18 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने सचिवों द्वारा अभिलेख सौंपे जाने का दावा करते हुए मामले की दोबारा जांच के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को सूचना भेजी है। दरअसल, जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात 11 ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने करीब सात वर्ष पूर्व कराए गए विकास कार्यों से संबंधित मूल अभिलेख ऑडिट के लिए उपलब्ध नहीं कराए। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत की ओर से कई बार पत्र और रिमाइंडर भेजे गए, इसके बावजूद आवश्यक दस्तावेज नहीं दिए गए। अभिलेखों के अभाव में करीब 1.18 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का ऑडिट लंबित रह गया। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने संबंधित सचिवों के वेतन से 1.18 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश जारी कर दिए थे। आदेश के अनुपालन के लिए खंड विकास अधिकारियों को भी पत्र भेजा गया था। हालांकि, बृहस्पतिवार को पूरे मामले में नया मोड़ तब आया, जब जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखकर रिकवरी की प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया। डीपीआरओ आलोक सिन्हा के अनुसार, पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि पंचायत सचिवों की ओर से अब ऑडिट से जुड़े अभिलेख उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसी आधार पर मामले को परीक्षण के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को भेजा जा रहा है। जब तक अभिलेखों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सचिवों के वेतन से किसी भी तरह की वसूली नहीं की जाएगी।अब प्रशासन की नजर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर टिकी है। अभिलेखों की पुष्टि के बाद ही यह तय होगा कि वसूली का आदेश बहाल होगा या सचिवों को स्थायी राहत मिलेगी।
आईजीआरएस रैंकिंग : उन्नाव जिला और सभी 21 थाने भी प्रदेश में बने अव्वल
Thu, Jan 8, 2026
फरियादियों की संतुष्टि बनी रैंकिंग की बड़ी वजह
उन्नाव। यूपी सरकार की एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली यानी आईजीआरएस जनसुनवाई पोर्टल पर दिसंबर 2025 की महीनेवार रैंकिंग जारी की गई है। इसमें जनपद ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। यह कामयाबी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के बेहतर नेतृत्व और लगातार निगरानी का नतीजा मानी जा रही है। आईजीआरएस पोर्टल पर आम लोगों की जो भी शिकायतें दर्ज हुईं, उनका समय पर और सही तरीके से निपटारा किया गया। इसी वजह से उन्नाव पुलिस का प्रदर्शन बाकी जिलों से बेहतर रहा। खास बात यह है कि सिर्फ जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि जनपद के सभी 21 थानों ने भी प्रदेश में पहला स्थान पाया है। थानों पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से सुना गया, फरियादियों से सीधे बात की गई और उनकी समस्या का हल तय समय में किया गया। शिकायत निपटने के बाद लोगों से फीडबैक भी लिया गया, ताकि यह देखा जा सके कि वे संतुष्ट हैं या नहीं। इसी वजह से उन्नाव की रैंकिंग सबसे ऊपर रही। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। आम जनता की परेशानी को अपनी जिम्मेदारी समझकर काम किया गया, तभी यह मुकाम हासिल हो सका। आईजीआरएस रैंकिंग में पहला स्थान मिलने से उन्नाव पुलिस की छवि मजबूत हुई है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि अगर काम सही नीयत और ईमानदारी से किया जाए, तो जनता का भरोसा जीता जा सकता है।