ओलिव शू फैक्ट्री में मानवाधिकार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विवाद : मजदूरों और प्रबंधन में आरोप-प्रत्यारोप
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Fri, Dec 5, 2025
मजदूरों के गंभीर आरोप: शौचालय पर ताला और पानी की समस्या

उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित मगरवारा की 'ओलिव शू फैक्ट्री' में गुरुवार को मजदूरों और प्रबंधन के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। कर्मचारियों ने प्रबंधन पर बुनियादी मानवीय सुविधाओं को प्रतिबंधित करने और लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार और झूठा बताया है।
मजदूरों के गंभीर आरोप
मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने शौचालय पर ताला लगा दिया है और सुबह 11 से 12 बजे तक किसी भी कर्मचारी को शौचालय जाने की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि ठंड के मौसम में भी यह कड़ा नियम लागू है और एचआर विभाग द्वारा इसकी पाबंदी करवाई जा रही है। विरोध करने पर भी उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके अलावा, मजदूरों ने पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। उनका दावा है कि वॉटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है, बार-बार शिकायत करने और लिखित में अवगत कराने के बावजूद न तो मशीन ठीक कराई गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इन हालातों के विरोध में सैकड़ों मजदूरों ने गुरुवार सुबह काम रोक दिया और फैक्ट्री गेट पर धरना दिया। उनका आरोप है कि प्रबंधन उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर बुनियादी जरूरतों को भी नियंत्रण का हथियार बना रहा है।
प्रबंधन का पक्ष
वहीं, फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। प्रबंधन का कहना है कि मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। उनका दावा है कि सुबह के समय कुछ मजदूर पान-मसाले की थूक से शौचालयों को गंदा कर रहे थे, जिस पर रोक लगाने के प्रयास के खिलाफ मजदूरों द्वारा झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था फैक्ट्री में उपलब्ध है।
मजदूरों की मांग और चेतावनी
गुरुवार को धरने पर बैठे मजदूरों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वे मशीन नहीं, इंसान हैं और बुनियादी सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाना अमानवीय है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो उनका आंदोलन और तेज होगा। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि किसी भी औद्योगिक इकाई में कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अब न्यायिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा है ताकि दोनों पक्षों का पक्ष सुनकर न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।
स्थिति सामान्य, भविष्य के लिए संवाद पर जोर
फिलहाल, फैक्ट्री परिसर में स्थिति शांत है और कामकाज पूर्ववत जारी है। जिला प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। यह मामला एक बार फिर औद्योगिक संबंधों में संवाद के महत्व को रेखांकित करता है। दोनों पक्षों ने बातचीत के रास्ते को अपनाकर एक बड़े विवाद को टाल दिया है।
स्थानीय नागरिकों ने इस शांतिपूर्ण समाधान का स्वागत किया है। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच नियमित संवाद का एक मजबूत चैनल स्थापित किया जाएगा।
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