पुरवा केस में बड़ा मोड़ : सीओ दीपक सिंह को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, एफआईआर आदेश पर रोक
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Dec 10, 2025
अदालत ने पूछा, अधिकारी पर सीधी एफआईआर कैसे—अनुमति प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ
उन्नाव। पुरवा थाना क्षेत्र के संवेदनशील मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी दीपक सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश पर अब नया मोड़ आ गया है। उन्नाव के SC/ST विशेष न्यायालय के निर्देशों को चुनौती देने पर उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है। इससे पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल गई है और मामला अब उच्च स्तर पर कानूनी जांच के घेरे में आ गया है।
मूलचंद की अपील से उठी कार्रवाई
भुलेमऊ निवासी मूलचंद ने अदालत में यह कहते हुए अपील की थी कि उनके भाई श्रीचंद ने लगातार उत्पीड़न और पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली थी। गंभीर झुलसने के बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शिकायतें कीं, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद मूलचंद ने धारा 156(3) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र देकर तत्कालीन सीओ समेत अन्य नामजद व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
निचली अदालत का आदेश
अदालत ने 25 नवंबर 2025 को SC/ST विशेष न्यायालय के रूप में आदेश देते हुए पुरवा पुलिस को निर्देश दिया कि वह पूरा मामला दर्ज कर जांच शुरू करे। यह आदेश मिलते ही पुलिस पर विधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की जिम्मेदारी आ गई थी।
हाईकोर्ट की प्राथमिक टिप्पणी
आदेश को चुनौती देते हुए दीपक सिंह उच्च न्यायालय लखनऊ पहुंचे। प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने सीधा सवाल उठाया कि निचली अदालत ने BNSS की धारा 175(4) में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना आदेश कैसे जारी कर दिया।अदालत ने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने से पहले आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया पूरी किए बिना आदेश लागू नहीं किया जा सकता।
पूरे आदेश पर रोक
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के एफआईआर दर्ज कराने के आदेश पर रोक लगा दी और उन्नाव की अदालत को मामले में आगे की किसी भी कार्रवाई से भी रोक दिया। अदालत का कहना है कि पहले यह तय होना चाहिए कि निचली अदालत का आदेश विधिक रूप से सही था या नहीं। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।
15 जनवरी को अगली सुनवाई
मामला महत्वपूर्ण मानते हुए उच्च न्यायालय ने अगली तारीख 15 जनवरी 2026 तय की है। इस दिन दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएंगी। सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि एफआईआर दर्ज कराने का आदेश बहाल होगा या उसे स्थायी रूप से खारिज कर दिया जाएगा।
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