कभी जीवनदायिनी, आज जहरीली : नदी का गिरता सच
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, Nov 22, 2025
टेनरियों का गंदा पानी बना किसानों और ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता
उन्नाव। कभी गांवों की प्यास बुझाने और खेतों को संजीवनी देने वाली लोन नदी आज अपनी पहचान तक खो चुकी है। पानी इतना खराब हो गया है कि न पीने लायक बचा है और न खेती के काम का। औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला जहरीला पानी नदी में मिलने से हालत हर साल और बिगड़ रही है।
शहर के दही चौकी इलाके से शुरू होकर पुरवा और बीघापुर की तरफ बहती यह नदी पहले कई गांवों की जरूरी जरूरतें पूरी करती थी। लेकिन टेनरियों और फैक्टरियों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़े जाने से इसका रंग काला पड़ गया है। कई जगह पानी के ऊपर लाल रंग की चिपचिपी परत दिखती है। गुजरने वाले लोग सिर्फ एक झोंके से समझ जाते हैं कि स्थिति कितनी खराब है। बदबू इतनी तेज है कि लोग सांस रोककर निकलते हैं।स्थिति इस कदर बिगड़ी है कि किसान अब नदी का पानी खेतों पर नहीं डाल रहे। उनका कहना है कि एक बार सिंचाई कर दी तो फसल जलने लगती है। मजबूरी में निजी नलकूपों या टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती का खर्च दोगुना हो गया है। समस्या सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रही। गांवों का भूगर्भ जल भी तेजी से खराब हो रहा है। हैंडपंप से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड बढ़ गया है। इससे कई गांवों में लोग पेट, हड्डी और त्वचा संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ी। दही बंथर और अकरमपुर इलाके की टेनरियां भी स्थिति को और खराब कर रही हैं। यहां से निकलने वाला बिना ट्रीटमेंट करके दूषित पानी सीधे लोन नदी और सई नदी में बहाया जा रहा है। दोनों नदियों का प्रवाह तेज़ी से दूषित हो रहा है और असर आसपास की बस्तियों तक पहुंच चुका है। लोन नदी चांदपुर, जमुका, बड़ौरा, दुआ, जगेथा, पौंगहा, मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ, अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा और परसंडा जैसे गांवों के करीब से गुजरती है। इन इलाकों में करीब एक लाख से ज्यादा लोग दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी का हाल हर साल और खराब हो रहा है। कई बार विरोध और ज्ञापन दिए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही। अब लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक इस जहर को सहते रहेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि प्रदूषण पर तत्काल रोक लगे और लोन नदी को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, वरना आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।
पुरवा विधायक बोले, लोन नदी को बचाना अब जरूरी
पुरवा विधायक अनिल सिंह ने लोन नदी की बिगड़ती हालत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टेनरियों से निकलकर सीधे नदी में जा रहा गंदा पानी गांवों की सेहत और खेती दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है। खेतों की मिट्टी खराब हो रही है और लोग मजबूरी में दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हाल किसी से छिपा नहीं है। विधायक ने बताया कि वह पूरे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा जाएगा कि नदी में गिर रहे औद्योगिक अपशिष्ट को तुरंत रोका जाए। जो भी इकाइयां नियम तोड़ रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठें। उनका कहना है कि लोन नदी को वैसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले सालों में हाल और बिगड़ जाएगा।
जिम्मेदार बोले
इधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अब सक्रिय दिख रहा है। क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर ने बताया कि नदी में गिरने वाले नालों और औद्योगिक इकाइयों के डिस्चार्ज का सैंपल लगातार लिया जा रहा है। पिछले सप्ताह भी टीम ने नदी और नालों के कई स्थानों से नमूने इकट्ठा किए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जल्दी आने वाली है और जैसे ही स्थिति स्पष्ट होगी उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जिन इकाइयों से प्रदूषित पानी मिलने की पुष्टि होगी उन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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