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आशा कार्यकर्ताओं का फिर फूटा गुस्सा : सीएमओ कार्यालय पर दिया धरना

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Dec 15, 2025
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पुराने आश्वासनों पर अमल न होने से बढ़ी नाराजगी, भुगतान और दर्जे की उठी मांग

उन्नाव। जनपद में आशा और आशा संगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया। गुरुवार को बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता सीएमओ कार्यालय पहुंचीं और धरना देकर शासन व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से मानदेय, प्रोत्साहन राशि और विभिन्न अभियानों के भुगतान में हो रही देरी ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है। धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे लगातार विभागीय जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। कई महीनों का बकाया मानदेय, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति राशि और स्वास्थ्य अभियानों से जुड़ा भुगतान अब तक लंबित है। इससे घर चलाना मुश्किल हो गया है और कई कार्यकर्ताओं को कर्ज तक लेना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं ने याद दिलाया कि 6 अक्टूबर 2025 को शासन स्तर पर दिए गए ज्ञापन के बाद उनकी मांगों पर सहमति बनी थी। उस समय मुख्यमंत्री स्तर से लंबित भुगतान और अन्य समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया था। इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री स्तर पर हुई बैठक में भी 1 नवंबर 2025 से समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन मिला था। लेकिन इन वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आशा कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है।
धरना दे रहीं कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे सिर्फ भुगतान ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि आशा और आशा संगिनियों को ‘मानद स्वयंसेवक’ की जगह सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही 45 वर्ष से अधिक उम्र की आशा कार्यकर्ताओं के लिए सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था लागू की जाए, ताकि बुढ़ापे में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। अन्य मांगों में स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और कार्य के दौरान दुर्घटना बीमा की सुविधा शामिल है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि फील्ड में काम करते समय उन्हें कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसके साथ ही नियमित प्रशिक्षण और जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।
मानदेय को लेकर भी आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट मांग रखी। उनका कहना है कि मौजूदा मानदेय महंगाई के दौर में बेहद कम है। इसलिए आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 21 हजार रुपये और आशा संगिनियों को 28 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके अलावा चुनाव, सर्वेक्षण और अन्य सरकारी अभियानों में लगाए जाने पर अलग से भुगतान सुनिश्चित किया जाए। धरने के अंत में आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने शासन से अपील की कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जल्द से जल्द कार्रवाई कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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