आस्था और सीख का अनोखा संगम : आठ दिन तक चला ज्ञान का दरबार, हर उम्र के लोगों ने पाया जीवन का नया नजरिया
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Fri, Dec 5, 2025
मौलाना अकील अब्बास और मौलाना मुशाहिद आलम ने रखे आसान शब्दों में धर्म और जीवन के सूत्र

उन्नाव। चौधरना इलाके का माहौल पिछले आठ दिनों तक कुछ अलग ही रहा। इलाके के पुराने और जाने-माने चौधरी सैय्यद कासिम हुसैन जैदी इमामबाड़ा में आयोजित विशेष धार्मिक और सामाजिक शिक्षाओं की श्रृंखला ने पूरे मोहल्ले को जैसे एक सूत्र में बांध दिया। 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक चले इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग ने जमकर हिस्सा लिया। लोगों ने न सिर्फ धर्म की मूल बातें सीखीं, बल्कि यह भी समझा कि रोजमर्रा की चुनौतियों से निपटने में धर्म और संतुलित सोच कैसे मदद करती है।
धर्म और जिंदगी, दोनों का पाठ
कार्यक्रम की शुरुआत पहले चार दिनों तक मौलाना अकील अब्बास मारूफी के संबोधन से हुई। उन्होंने बेहद सहज भाषा में बताया कि इबादत और इंसानियत, दोनों को साथ लेकर चलना ही असली मजहबी पहचान है। उन्होंने परिवार, समाज और खुद की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने के सरल तरीके भी समझाए। उनकी बातों ने खासतौर पर युवाओं को खूब प्रभावित किया। इसके बाद अगले तीन दिन मौलाना मुशाहिद आलम ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने शरीयत, हलाल-हराम, और इस्लामी जीवनशैली के नियमों पर विस्तार से चर्चा की। लोगों ने सवाल पूछे और अपनी दुविधाओं के समाधान पाए। कई श्रोताओं ने बताया कि उन्हें पहली बार इतने साफ और आसान तरीके से मजहबी नियमों की समझ मिली।
जिम्मेदारी और व्यवस्था की मिसाल
पूरे आयोजन के प्रबंधन की जिम्मेदारी मौलाना ताजमीन जाफरी ने संभाली। बैठक संचालन और मार्गदर्शन का काम मौलाना रजा अब्बास ने किया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, व्यवस्था और सत्कार की जिम्मेदारी बड़ी ही खूबसूरती से निभाई गई, जिसकी लोगों ने खुलकर सराहना की।
सीख की परीक्षा, और विजेताओं का सम्मान
आठ दिनों की यह सीख सिर्फ सुनने-समझने तक सीमित नहीं रही। अंतिम दिन सभी प्रतिभागियों के लिए एक परीक्षा रखी गई, जिसमें बच्चों, किशोरों और बड़ों, सभी ने बराबर उत्साह से हिस्सा लिया। परिणामों में प्रथम स्थान पर फिरदौस फातमा, दूसरे स्थान पर फरहीन जाफरी और तीसरे स्थान पर तूबा रिजवी रहीं। तीनों को सम्मानित किया गया। बाकी प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए ताकि वे आगे भी ऐसे आयोजनों से जुड़े रहें।
समुदाय को जोड़ने वाला आयोजन
इस पूरे कार्यक्रम की सफलता के पीछे बड़ी टीम की मेहनत रही। तज़ाहिर जैदी, तज़मीन जाफरी, आबिद हुसैन, अमन अकबर, अयाज़ हसन, मोहम्मद अब्बास, मुराद अब्बास, मिर्ज़ा नकी अब्बास, तखलीक जाफरी, साबिका आबदी, समीरा जहरा, उजमा सहित कई स्वयंसेवकों ने दिन-रात व्यवस्था संभाली।स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था। यह ऐसा मंच बन गया जहां लोग एक-दूसरे के करीब आए, नई बातें सीखीं और अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनने की दिशा में प्रेरित किया। चौधरना के निवासियों ने कहा कि ऐसे आयोजन समय-समय पर होते रहें तो समाज और मजबूत होगा। यह आठ दिन का आयोजन पूरे इलाके के लिए सीख, एकता और सकारात्मक माहौल का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा।
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