प्रीति की मौत का मामला : शव रखकर जाम लगाने में 11 नामजद समेत 20-25 अज्ञात पर केस
Wed, Oct 21, 2026
समझाने पर भी नहीं हटे थे लोग, एंबुलेंस समेत कई वाहन फंसे
उन्नाव। प्रीति की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब सड़क जाम करने के मामले में पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। मायके पक्ष की ओर से हत्या का आरोप लगाकर विरोध जताने के बाद शहर के मुख्य मार्ग पर शव रखकर जाम लगाने के मामले में कोतवाली सदर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस की तहरीर में 11 नामजद और 20 से 25 अज्ञात महिला-पुरुषों के शामिल होने की बात कही गई है। आरोप है कि सड़क बंद होने से एंबुलेंस और मरीजों को ले जाने वाले वाहन भी जाम में फंस गए।
फंदे पर मिला था प्रीति का शव
माखी थाना क्षेत्र के बलारदेव गांव में सोमवार को 25 वर्षीय प्रीति का शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया। पोस्टमार्टम हाउस में जमकर हंगामा काटा। इसके बाद मायके पक्ष के लोग शव को ई-रिक्शा में रखकर शहर के छोटा चौराहा पहुंचे और मुख्य मार्ग पर रख दिया। इससे यातायात बाधित हो गया।
पोस्टमार्टम हाउस में मारपीट, एक घंटे बाद पहुंची पुलिस
पोस्टमार्टम हाउस में मायके और ससुराल पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। इस दौरान ससुराल पक्ष के कुछ लोगों के साथ मारपीट भी हुई। करीब एक घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस से लेकर सड़क तक हंगामा और मारपीट होती रही। इस दौरान मौके पर पुलिस नजर नहीं आई। करीब एक घंटे बाद पुलिस पहुंची और गुस्साए लोगों को शांत कराया। घटना के दौरान पुलिस की गैरमौजूदगी और देरी से पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
समझाने पर भी नहीं हटे लोग
सदर चौकी प्रभारी सुभाष चंद्र मुताबिक, 20 अक्तूबर को गश्त के दौरान पुलिस टीम स्टैंडर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान के पास पहुंची तो सड़क पर शव रखकर रास्ता बंद किया गया था। पुलिस ने लोगों को समझाकर शव हटाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इससे सड़क पर वाहनों की कतार लग गई। एंबुलेंस और मरीजों को ले जाने वाले वाहन भी जाम में फंस गए। सूचना पर माखी और कोतवाली सदर थाने की पुलिस पहुंची और मशक्कत के बाद जाम खुलवाया।
विधायक के आश्वासन पर शांत हुए परिजन
जाम के दौरान सदर विधायक पंकज गुप्ता और कोतवाली सदर के प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्र भी मौके पर पहुंचे थे। परिजनों ने ससुराल पक्ष के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। विधायक और पुलिस अधिकारियों ने जांच के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए और शव अंतिम संस्कार के लिए ले गए। पुलिस के अनुसार, प्रीति के पति राजकुमार को हिरासत में लिया गया था।
दहेज की मांग का भी लगाया आरोप
इधर, प्रीति के पिता सुरेश ने आरोप लगाया था कि ससुराल पक्ष के लोग बाइक और रुपये की मांग करते थे। मांग पूरी नहीं होने पर बेटी को पीटा जाता था। घटना के समय घर में प्रीति और उसकी सास चंदावती के होने की बात भी पुलिस की ओर से बताई गई थी। हत्या की आशंका के चलते दो डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में बायीं आंख के पास और चेहरे पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई। थानाध्यक्ष के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग बताया गया है। मामले में मौत की परिस्थितियों और परिजनों के आरोपों की जांच जारी है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
उपनिरीक्षक की तहरीर में सुरेश, रिंकू, अंकित, नीलम, नेहा, सुनील सिंह, डब्ली, भीम, सफीपुर निवासी नीलम, हिमांशु उर्फ लाल और पवन के नाम दर्ज हैं। पुलिस ने सड़क अवरुद्ध करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है। नामजद लोगों के साथ 20 से 25 अज्ञात महिला-पुरुषों का भी शामिल किया गया है।
सस्ती लागत, सेहत पर भारी : सफेदी देखकर न खरीदें खोवा-पनीर
Wed, Oct 21, 2026
रंग और बनावट से शुद्धता की पहचान मुश्किल, लैब जांच से खुलेगा राज
शहर में 50 से ज्यादा दुकानें, निगरानी बढ़ाने की भी जरूरत
उन्नाव। त्योहारों पर घरों में मिठाइयां बनें या बाजार से खरीदकर लाई जाएं, दोनों में दूध से बने उत्पादों का इस्तेमाल खूब होता है। ऐसे में पनीर और खोवा की शुद्धता लोगों की चिंता का विषय बन गई है। जिले में इनकी बिक्री करने वाली दुकानों पर निगरानी और नियमित जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतें हैं कि कुछ जगहों पर कम लागत में तैयार मिलावटी सामग्री को असली बताकर बेचा जा रहा है। हालांकि, कितनी दुकानों पर मिलावट हो रही है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
मुनाफे के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ का खतरा
पनीर और खोवा तैयार करने में दूध की गुणवत्ता सबसे अहम होती है। लेकिन अगर इनमें दूसरे पदार्थ मिलाकर मात्रा बढ़ाई जाए, तो ग्राहक को पैसे खर्च करने के बाद भी शुद्ध खाद्य सामग्री नहीं मिलती। मिलावट की आशंका वाले मामलों में स्टार्च, मैदा और दूसरे सस्ते पदार्थों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं, दूध से वसा निकालकर उसकी जगह सस्ता वनस्पति वसा वाला पदार्थ मिलाने से उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पनीर के मामले में भी कम गुणवत्ता वाले कच्चे माल या स्टार्च के इस्तेमाल की आशंका रहती है। कुछ खतरनाक मिलावटों में ऐसे रसायनों का इस्तेमाल भी हो सकता है, जो खाने के लिए सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि, किसी खास दुकान के उत्पाद में इन पदार्थों की मौजूदगी का दावा बिना नमूने की जांच के नहीं किया जा सकता।
दुकान पर देखकर शुद्धता का पता लगाना मुश्किल
बाजार में पनीर और खोवा खरीदते समय ग्राहक अक्सर रंग, बनावट और कीमत देखकर ही सामान चुन लेते हैं। लेकिन केवल सफेदी, चिकनापन या गाढ़ापन देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि उत्पाद असली है या मिलावटी। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की नियमित जांच जरूरी है। प्रयोगशाला में नमूने की जांच से ही मिलावट की सही स्थिति सामने आ सकती है।
त्योहार से पहले बढ़ जाती है मांग
त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पनीर और खोवा की मांग बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ बाजार में ज्यादा मात्रा में सामान की आपूर्ति होती है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि दुकानों और निर्माण स्थलों पर जांच की जाए, संदिग्ध उत्पादों के नमूने लिए जाएं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई हो।
जांच और कार्रवाई पर टिकी लोगों की उम्मीद
शहर में पनीर और खोवा बेचने वाली 50 से अधिक दुकानें होने की बात कही जा रही है। इनमें से किसी दुकान पर मिलावट की पुष्टि केवल संख्या या शिकायत के आधार पर नहीं की जा सकती। जरूरत इस बात की है कि विभाग नियमित निरीक्षण करे, संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करे। इससे न केवल मिलावट करने वालों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की सहायक प्रियंका सिंह के मुताबिक, अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है। जहां कमियां मिल रही हैं, वहां कार्रवाई भी की जा रही है। त्योहार के दौरान लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। अब जरूरत इस अभियान को लगातार जारी रखने की है, ताकि त्योहारों की खरीदारी के दौरान लोगों की सेहत से खिलवाड़ न हो।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद धमकी देने का आरोप : युवक को अब जान का डर
Tue, Oct 20, 2026
रास्ते में रोककर हमले की कोशिश का आरोप, कोतवाली में प्रार्थना पत्र
उन्नाव। मुख्यमंत्री पोर्टल पर लेखपाल के खिलाफ शिकायत करना एक युवक के लिए मुसीबत बन गया। यह आरोप ग्राम पतारी निवासी अतुल सिंह ने लगाया है। युवक का दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद घर लौटते समय उसे रास्ते में रोक लिया गया और तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। मामले को लेकर उसने मंगलवार को कोतवाली सदर पहुंचकर पुलिस से शिकायत की और सुरक्षा की मांग उठाई।अतुल सिंह के प्रार्थना पत्र के मुताबिक, उसने 19 अक्टूबर 2026 को क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि उन्नाव से घर लौटने के दौरान कुछ लोगों ने उसे रास्ते में रोक लिया। इस दौरान उसके साथ मारपीट कर जान से मारने का प्रयास किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने तमंचा दिखाकर उसे धमकाया, जिससे उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। युवक ने पुलिस से मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। फिलहाल, घटना और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।