छापे, नोटिस और फिर सन्नाटा : जिले में अवैध नर्सिंग होम बेलगाम
Fri, Jan 16, 2026
रिकॉर्ड में 122 पंजीकृत, हकीकत में गांव-गांव चल रहे अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम
उन्नाव। जिले में बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम और क्लीनिक मरीजों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। शहर से लेकर गांवों तक ऐसे केंद्र धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहां न तो मानक पूरे हैं और न ही योग्य डॉक्टर मौजूद हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार छापे जरूर पड़ते हैं, लेकिन अक्सर कागज दिखाने के लिए कुछ दिन की मोहलत देकर मामला टाल दिया जाता है। इसके बाद वही नर्सिंग होम दोबारा पहले की तरह चलने लगते हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में जिले में 122 नर्सिंग होम और क्लीनिक पंजीकृत हैं। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक सैकड़ों की संख्या में ऐसे नर्सिंग होम और क्लीनिक चल रहे हैं, जिनका कोई वैध पंजीकरण नहीं है। बेहतर इलाज के नाम पर छोटी बीमारी को भी गंभीर बताकर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। भर्ती के बाद दवाइयों, जांच और इलाज के नाम पर भारी भरकम बिल थमा दिया जाता है। मरीज या उनके परिजन जब सवाल उठाते हैं, तब तक हालात बिगड़ चुके होते हैं।
कागजों पर कार्रवाई, जमीन पर सन्नाटा
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई अक्सर खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है। विभाग का दावा है कि नवंबर 2025 से अब तक 26 अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम बंद कराए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से अधिकतर जगहों पर सिर्फ बोर्ड बदले गए या नाम बदलकर दोबारा संचालन शुरू हो गया। यानी मरीज वही, खतरा वही, बस नाम नया।
प्रसूता की मौत, जांच ठंडे बस्ते में
बांगरमऊ क्षेत्र के नन्हूपुरवा निवासी पूजा (23) की मौत का मामला अभी भी लोगों को याद है। फरवरी 2025 में पूजा को प्रसव के लिए एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ी और उसे लखनऊ रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। नाराज परिजनों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। मामला समय के साथ ठंडा पड़ गया।
ऑपरेशन की लापरवाही बनी मौत की वजह
मार्च 2025 में ऊगू नगर पंचायत की राधारानी (29) की मौत ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। जांच में सामने आया कि पहले हुए प्रसव ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने पेट के अंदर रुई और पट्टी का टुकड़ा छोड़ दिया था। इससे संक्रमण फैला और इलाज के दौरान महिला की जान चली गई। पोस्टमार्टम में सेप्टीसीमिया से मौत की पुष्टि हुई, एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन कार्रवाई अब तक जांच के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई है।
दो दिन का इलाज, पांच हजार की वसूली
सितंबर 2024 में अजीज नगर की पूनम को तेज बुखार था। पास के एक क्लीनिक में दिखाने पर झोलाछाप ने हालत गंभीर बताकर भर्ती कर लिया। इलाज के नाम पर दो दिन में पांच हजार रुपये वसूल लिए गए। हालत बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन रास्ते में ही महिला की मौत हो गई। परिजन आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
नोटिस तक सिमटी कार्रवाई
नवंबर 2024 में भुरकुंडी गांव की दीपा की मौत का मामला भी ऐसा ही रहा। गलत इलाज का आरोप लगा, शिकायत हुई, लेकिन नर्सिंग होम संचालक को सिर्फ नोटिस देकर मामला निपटा दिया गया। न कोई सख्त कार्रवाई, न कोई ठोस नतीजा।
विभाग का दावा, लोगों की चिंता
हालाकिं
प्रभारी सीएमओ डॉ. एचएन प्रसाद का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है। जल्द ही विशेष अभियान चलाकर अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक बंद कराए जाएंगे और बिना पंजीकरण किसी को भी संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सवाल यही है कि जब तक यह अभियान जमीन पर सख्ती के साथ नहीं उतरता, तब तक मरीजों की जान का भरोसा किसके हाथ में है। उन्नाव में इलाज अब जरूरत नहीं, बल्कि जोखिम बनता जा रहा है।
खेत में मिला अज्ञान युवक शव : पहचान के लिए पुलिस प्रयास में जुटी
Fri, Jan 16, 2026
उन्नाव। दही थाना क्षेत्र में एक युवक का शव मिलने से इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। ओरहर गांव के पास स्थित एक खेत में करीब 30 वर्षीय अज्ञात युवक का शव पड़ा होने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही दही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। ग्रामीणों के अनुसार, युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है और वह अक्सर गांव व आसपास के इलाकों में घूमता रहता था। हालांकि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसको लेकर अभी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में शव पर किसी प्रकार की गंभीर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। फिलहाल मौत के कारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एहतियातन शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। दही थाना निरीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। मृतक की पहचान सुनिश्चित कराने के लिए आसपास के थानों को भी सूचना भेज दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।
काम के साथ सेहत भी जरूरी : पत्रकारों के लिए 17 जनवरी को फ्री हेल्थ चेकअप कैंप लगेगा
Fri, Jan 16, 2026
उन्नाव। भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जर्नलिस्ट प्रेस क्लब एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने एक सराहनीय पहल की है। संगठन की ओर से शनिवार 17 जनवरी को पत्रकारों के लिए निःशुल्क हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कैंप में पत्रकारों की शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड से जुड़ी जरूरी जांचें पूरी तरह मुफ्त की जाएंगी, ताकि समय रहते स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान हो सके। प्रेस क्लब के संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष हरिओम गुप्ता ने बताया कि पत्रकार अक्सर दूसरों की खबरों और समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने यह पहल की है। उनका कहना है कि स्वस्थ पत्रकार ही बेहतर और निष्पक्ष पत्रकारिता कर सकता है। भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। यह हेल्थ चेकअप कैंप शुक्लागंज में सरस्वती टॉकीज के सामने स्थित जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के प्रदेश कार्यालय में लगाया जाएगा। संगठन ने उन्नाव और आसपास के क्षेत्रों के सभी पत्रकारों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर पहुंचकर इस शिविर का लाभ उठाएं। जर्नलिस्ट प्रेस क्लब एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने उम्मीद जताई है कि पत्रकार साथियों की सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन सफल होगा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।