इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत : 35 वर्षीय युवक की मौत
Tue, Feb 24, 2026
जांच करने पहुंची स्वास्थ्य टीम को बंद मिला क्लीनिक, नोटिस चस्पा
उन्नाव। एक मामूली इलाज के लिए गया 35 साल का युवक घर वापस नहीं लौटा। परिजनों का आरोप है कि गांव के एक निजी क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के कुछ ही देर बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से क्लीनिक संचालक और वहां काम करने वाला कंपाउंडर गायब बताए जा रहे हैं। मामला औरास क्षेत्र के रामपुर गढ़ौवा गांव स्थित आर्या पॉलीक्लीनिक का है। हिमाचलखेड़ा गांव निवासी विशुन (35) शनिवार को इलाज के लिए क्लीनिक पहुंचा था। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगते ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर देख परिवार वाले उसे तुरंत लखनऊ लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना से गुस्साए पिता रामखेलावन ने संबंधित डॉक्टर और कंपाउंडर के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दोनों आरोपियों की तलाश की जा रही है।सोमवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अनूप तिवारी अपनी टीम के साथ जांच के लिए क्लीनिक पहुंचे। उनके साथ अजीत सिंह और अतीक भी मौजूद थे। लेकिन क्लीनिक पर ताला लटका मिला। टीम ने दरवाजे पर नोटिस चस्पा कर तीन दिन के भीतर जरूरी अभिलेख पेश करने को कहा है। डॉ. तिवारी ने बताया कि रिकॉर्ड देखने के बाद ही साफ हो सकेगा कि क्लीनिक विधिवत पंजीकृत है या नहीं। यदि कागजात नहीं मिले या नियमों का उल्लंघन पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उधर, थाना प्रभारी संजीव कुशवाहा ने बताया कि घटना के बाद से क्लीनिक संचालक और कंपाउंडर फरार हैं। पुलिस टीमें उनकी तलाश में लगी हैं। जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
बिना पंजीकरण क्लीनिकों पर सवाल
इस घटना ने औरास क्षेत्र में चल रहे निजी क्लीनिकों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शीशी चौराहा, भावाखेड़ा चौराहा, आलमखेड़ा चौराहा और रामपुर गढ़ौवा समेत कई जगहों पर बिना पंजीकरण के क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं। यहां न तो स्पष्ट बोर्ड होते हैं, न डॉक्टरों की योग्यता की जानकारी सार्वजनिक होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही दिखती है। नियमित जांच और सख्ती न होने से ऐसे क्लीनिक बेखौफ काम करते रहते हैं। विशुन की मौत के बाद इलाके में डर और नाराजगी दोनों है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि गांव के लोग चाहते हैं कि इस मामले को उदाहरण बनाकर अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आगे किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।
अकरमपुर में स्टील फैक्ट्री के खिलाफ फिर उठा गुस्सा : डीएम से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे लोग
Tue, Feb 24, 2026
उन्नाव। शहर के अकरमपुर इलाके में चल रही रिमझिम स्टील फैक्ट्री को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को मोहल्ले में हुई एक बैठक में बड़ी संख्या में लोगों ने फैक्ट्री पर पर्यावरण मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले लोहे के महीन कण आसपास के घरों की छतों, पेड़-पौधों और खेतों पर रोज जमा हो रहे हैं। सुबह उठते ही छतों और आंगन में धातु की धूल की परत दिखाई देती है। किसानों का आरोप है कि फसलों की पत्तियों पर जमी यह परत उनकी पैदावार को प्रभावित कर रही है। घरों में खुले में रखे पानी और खाने-पीने की चीजों पर भी असर पड़ रहा है। बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि पास का पुराना तालाब तेजी से प्रदूषित हो रहा है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि पानी का रंग और गंध बदल चुकी है। पिछले दिनों तालाब में मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आईं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ पशु भी यह पानी पीने के बाद बीमार पड़े और दम तोड़ दिया। लोगों ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरे के रूप में देखा है। इससे पहले जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। शिकायत में फैक्ट्री की कार्यप्रणाली की जांच, प्रदूषण नियंत्रण मानकों की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए लोगों ने दोबारा प्रशासन से मिलने का फैसला किया है। बैठक में तय किया गया कि 24 फरवरी को एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देगा। लोगों ने कहा कि यह केवल एक मोहल्ले का मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मामला है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बैठक में सुरेंद्र कुशवाहा के अलावा विनोद कुमार, प्रदीप पासी समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाते रहेंगे, लेकिन इलाके की सेहत और पर्यावरण के साथ समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
पटरी पर बिछी दो जिंदगियां : मालगाड़ी की चपेट में युवक और किशोरी की मौत
Mon, Feb 23, 2026
तेजस एक्सप्रेस 33 मिनट खड़ी रही, कार और पर्स से पहचान की कोशिश
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ रेल रूट पर सोमवार रात एक ऐसी घटना हुई, जिसने रेलकर्मियों से लेकर आसपास के लोगों तक को सन्न कर दिया। गंगाघाट इलाके में एक युवक और एक नाबालिग किशोरी ने चलती मालगाड़ी के सामने आकर जान दे दी। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग देर तक संभल नहीं पाए। घटना रात करीब 8:45 बजे की है। गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में सहजनी क्रॉसिंग से लगभग 100 मीटर आगे, डाउन लाइन पर पोल संख्या 62/28 और 62/30 के बीच दोनों अचानक ट्रैक पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, किशोरी पहले पटरी पर लेट गई और उसने अपना सिर रेल की पटरी पर रख दिया। उसी वक्त तेज रफ्तार से आ रही मालगाड़ी गुजर गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि किशोरी का सिर और एक हाथ धड़ से अलग हो गया। पास खड़ा करीब 45 वर्षीय व्यक्ति भी ट्रेन की चपेट में आ गया और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रैक का मंजर बेहद विचलित करने वाला था। स्थानीय लोग पास तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
ट्रेनों का संचालन प्रभावित
शव ट्रैक पर पड़े होने की वजह से रेल यातायात तत्काल रोकना पड़ा। इसी दौरान रात 8:52 बजे तेजस एक्सप्रेस गंगाघाट स्टेशन पहुंची, लेकिन आगे सिग्नल क्लियर नहीं हुआ। ट्रेन को करीब 33 मिनट तक वहीं खड़ा रहना पड़ा। इसके पीछे आ रही गोमती एक्सप्रेस को भी रोका गया। स्टेशन मास्टर की सूचना पर आरपीएफ और जीआरपी मौके पर पहुंची। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए शवों को ट्रैक से हटवाया, तब जाकर रेल संचालन सामान्य हो सका।
लावारिस कार ने बढ़ाया रहस्य
घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक गैस गोदाम के पास सफेद रंग की एक कार लावारिस हालत में खड़ी मिली। पुलिस ने जब कार की तलाशी ली तो उसमें महिलाओं के दो पर्स बरामद हुए। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि मृतक इसी वाहन से वहां पहुंचे थे। कार के नंबर और पर्स में मिले दस्तावेजों के आधार पर पहचान की कोशिश की जा रही है। हालांकि देर रात तक दोनों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी।
जांच में जुटी पुलिस
कोतवाली प्रभारी अजय कुमार सिंह के मुताबिक, शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए उन्नाव भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। लावारिस कार और बरामद सामान से अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। रेलवे और पुलिस दोनों ही इस बात की जांच कर रहे हैं कि घटना अचानक हुई या इसकी पहले से योजना बनाई गई थी।
मौत के साथ कई सवाल
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, कई सवाल छोड़ गई है। एक किशोरी और एक अधेड़ व्यक्ति ने ऐसा कदम क्यों उठाया, वे कौन थे, और उनके बीच क्या संबंध था, इन सबका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पूरे इलाके में सन्नाटा है और लोग स्तब्ध हैं।