अमृत योजना की रफ्तार सुस्त : 264 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं बुझी शहर की प्यास
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Sat, May 23, 2026
23 जगह लीकेज मिलने से बढ़ी चिंता, दिशा बैठक में सांसद ने मांगी जल्द रिपोर्ट
लीकेज, फॉल्ट और अधूरी टेस्टिंग बनी बड़ी वजह, अब भी पुराने ट्यूबवेलों के भरोसे चला रही जलापूर्ति
उन्नाव। भीषण गर्मी के बीच शहर के लोगों को जिस अमृत योजना से राहत मिलने की उम्मीद थी, वही योजना पांच साल बाद भी पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी है। 264 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई ‘अटल मिशन फॉर रेज्यूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन’ (अमृत) योजना अब तक शहर के लाखों लोगों को नियमित और सुचारु पेयजल आपूर्ति देने में नाकाम साबित हो रही है। स्थिति यह है कि शहर में नई पाइप लाइनों की टेस्टिंग के दौरान लगातार लीकेज और तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। कई जगह पाइप फट रहे हैं तो कहीं लाइनें आपस में जुड़ी नहीं हैं। ऐसे में नगर पालिका अभी भी पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था के सहारे शहर को पानी उपलब्ध करा रही है। हाल ही में हुई दिशा समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में सांसद ने अधिकारियों को योजना जल्द पूरी तरह चालू करने और लोगों को नियमित पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
2018 में मिली थी मंजूरी, 2020 तक पूरा होना था काम
शहर उन्नाव के 32 वार्डों और नगर पालिका गंगाघाट क्षेत्र में हर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में इस योजना को मंजूरी मिली थी। योजना के तहत गंगा का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में साफ कर पाइप लाइनों के जरिए घरों तक पहुंचाया जाना था। पहले चरण में करीब 30 हजार से अधिक घरों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया था। परियोजना को वर्ष 2020 तक पूरा होना था, लेकिन कोविड महामारी, बजट संबंधी दिक्कतों और निर्माण में देरी के कारण काम लगातार लटकता चला गया।
सात जोन तैयार, लेकिन सप्लाई अब भी भरोसेमंद नहीं
जल निगम के मुताबिक शहर के 10 में से सात जोन का काम पूरा हो चुका है। इनमें से चार जोन नगर पालिका को हैंडओवर भी किए जा चुके हैं जबकि तीन अन्य जोन हस्तांतरण की प्रक्रिया में हैं। बाकी तीन जोन में अंतिम चरण की टेस्टिंग चल रही है। अधिकारियों का दावा है कि सुबह और शाम दो-दो घंटे प्रेशर के साथ पानी छोड़ा जा रहा है। लेकिन जमीनी तस्वीर इससे अलग दिखाई दे रही है। पिछले दो महीनों में टेस्टिंग के दौरान 23 स्थानों पर पाइप लाइनों में छोटे और बड़े लीकेज सामने आए हैं। कई इलाकों में पानी का दबाव बढ़ते ही पाइप फटने की शिकायतें भी मिली हैं।
नगर पालिका क्यों हिचक रही जिम्मेदारी लेने से
लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों की वजह से नगर पालिका भी पूरे सिस्टम को अपने हाथ में लेने से बच रही है। पालिका ने फिलहाल उन्हीं चार जोन की जिम्मेदारी ली है जिनकी मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी एक साल तक जल निगम ने अपने पास रखने की शर्त मानी है। पालिका अधिकारियों का कहना है कि बाकी जोन का सत्यापन और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही उन्हें टेकओवर किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था ही बनी सहारा
अमृत योजना पूरी तरह लागू न होने के कारण शहर की जलापूर्ति अब भी पुराने ट्यूबवेल सिस्टम पर टिकी हुई है। नगर पालिका जलकल विभाग के अनुसार 24 ट्यूबवेलों से सुबह और शाम करीब पांच से छह घंटे पानी सप्लाई किया जा रहा है।जलापूर्ति बनाए रखने के लिए पालिका को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। ट्यूबवेलों की मरम्मत, पाइप लाइन सुधार, मिनी टंकियां लगाने और क्लोरीन डोजर जैसी व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पालिका ने जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए अलग-अलग मदों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च की तैयारी की है।
डिजाइन और निर्माण पर भी उठे सवाल
नगर पालिका की रिपोर्ट में योजना की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर बड़े जोन में केवल एक मुख्य वॉल्व लगाया गया है। ऐसे में किसी एक जगह लीकेज या खराबी आने पर पूरे इलाके की जलापूर्ति बंद करनी पड़ती है। इसके उलट नगर पालिका की पुरानी व्यवस्था में अलग-अलग मोहल्लों में छोटे वॉल्व लगाए गए हैं, जिससे खराबी होने पर केवल उसी हिस्से की सप्लाई रोकी जाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ ओवरहेड टैंकों में प्लास्टिक पाइप लगाए गए हैं जो अधिक दबाव पड़ने पर फट जाते हैं।
क्या बोले अधिकारी
नगर पालिका ईओ एसके गौतम ने कहा कि भूमिगत पाइप लाइनों में लगातार लीकेज की समस्या सामने आ रही है। जिन जोन की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी जल निगम ले रहा है, उन्हीं को हैंडओवर लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ सुबह-शाम दो घंटे की सप्लाई से शहर की जरूरत पूरी नहीं हो सकती, इसलिए पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था समानांतर चलाई जा रही है। वहीं जल निगम के एई अमित कुमार का कहना है कि सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और बाकी अंतिम चरण में हैं। जहां भी लीकेज मिलता है उसे तुरंत ठीक कराया जा रहा है। जिन इलाकों में पाइप लाइनें आपस में नहीं जुड़ी हैं, वहां भी सुधार कराया जा रहा है।
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