Sat 06 Jun 2026

ब्रेकिंग

मायके बालों ने ससुराली जनों पर लगाया दहेज हत्या का आरोप,पति समेत कई परिजन हिरासत में

भूमि विवाद और पैमाइश के मामले रहे हावी

गर्मी में बढ़ी लोगों की मुश्किलें

ग्रीष्मकालीन पेंटिंग कार्यशाला का शुभारंभ

राष्ट्रीय कार्यशाला में जुटेंगे कबीर पंथी

सूचना

BREAKING NEWS

CRIME BREAKING

खाड़ी युद्ध : “आसमान में आग थी, जमीन पर दहशत” — बंदर अब्बास से लौटे उन्नाव के मर्चेंट नेवी अफसर की कहानी

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Sun, Apr 12, 2026
Post views : 131

उन्नाव। सफीपुर तहसील के छोटे से गांव जुनैदपुर के रहने वाले शिवेंद्र चौरसिया जब घर लौटे, तो उनके चेहरे पर राहत साफ दिख रही थी, लेकिन आंखों में वो मंजर अब भी ताजा था जिसे उन्होंने बीते दिनों बेहद करीब से देखा। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे भीषण युद्ध के बीच फंसे इस मर्चेंट नेवी अधिकारी ने जो अनुभव साझा किए, वो किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगते, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा डरावनी थी।

“जहाज के ऊपर से गुजर रही थीं मिसाइलें”

शिवेंद्र बताते हैं कि वह ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर तैनात थे, जब अचानक हालात तेजी से बिगड़ने लगे। “पहले दूर से धमाकों की आवाज आती थी, लेकिन धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा जैसे युद्ध हमारे बिल्कुल सिर पर आ गया हो। उन्होंने कहा कि कई बार मिसाइलें और ड्रोन हमारे जहाज के ऊपर से गुजरते दिखे। आसपास के समुद्री इलाके में धमाके हो रहे थे। उनके मुताबिक, समुद्र के बीच खड़े जहाज पर रहना उस समय किसी कैद से कम नहीं था। वह कहते हैं कि “न उतर सकते थे, न कहीं भाग सकते थे। बस इंतजार और डर, यही दो चीजें थीं।

3 अप्रैल की रात: जब डर अपने चरम पर था

शिवेंद्र उस रात को याद करते हुए कहते हैं कि 3 अप्रैल सबसे ज्यादा भयावह दिन था। “उस दिन हमारे जहाज के बहुत करीब धमाके हुए। ऐसा लगा जैसे जहाज भी हिल रहा हो। हर तरफ तेज आवाजें, धुआं और अफरा-तफरी थी। क्रू के हर सदस्य के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था, लेकिन कोई घबराहट दिखाना नहीं चाहता था।” वह बताते हैं कि उस वक्त सबसे बड़ी चुनौती खुद को मानसिक रूप से संभालकर रखना था। “हम सब एक-दूसरे को हिम्मत दे रहे थे, लेकिन अंदर से हर कोई डरा हुआ था।”

“भारतीय जहाज होने से बच गए”

शिवेंद्र मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी किस्मत यही रही कि वे भारतीय जहाज पर थे। “हमें लगा कि शायद इसी वजह से हमारा जहाज सीधे निशाने पर नहीं आया। उन्होंने बताया कि आसपास कई शिप को नुकसान पहुंचा, लेकिन हम बच गए।

तीन महीने का कांट्रैक्ट, लेकिन अनुभव जिंदगी भर का

मुंबई की एक शिप मैनेजमेंट कंपनी के साथ काम कर रहे शिवेंद्र पिछले नौ साल से मर्चेंट नेवी में हैं। इस बार उनका कांट्रैक्ट दिसंबर में शुरू हुआ था, जब वह श्रीलंका के रास्ते जहाज पर सवार हुए थे। मार्च के अंत तक सब सामान्य था, लेकिन अचानक हालात बदल गए। उन्होंने कहा कि  “28 मार्च को हम बंदर अब्बास पोर्ट पर फंस गए। उसके बाद जो हुआ, वो जिंदगी का सबसे खौफनाक दौर था।

घर वापसी: राहत, लेकिन यादें कायम

करीब तीन महीने बाद जब वह 5 अप्रैल को अपने गांव पहुंचे, तो परिवार और गांव वालों ने राहत की सांस ली। शिवेंद्र कहते हैं कि घर लौटने के बाद भी कई बार तेज आवाज सुनकर वह चौंक जाते हैं। उन्होंने माना कि “वो माहौल ऐसा था कि दिमाग से निकलने में वक्त लगेगा।

सरकार और एजेंसियों का जताया आभार

सुरक्षित वापसी के बाद शिवेंद्र ने भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि “हमारी सुरक्षा के लिए जो प्रयास किए गए, उसी की वजह से हम सकुशल लौट सके।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन