पांच करोड़ का पुल तैयार, लेकिन रास्ता अधूरा : दो साल बाद भी भोगला पुल से नहीं शुरू हो सका आवागमन
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Feb 10, 2026
उन्नाव। हसनगंज तहसील क्षेत्र के भोगला गांव के पास सई नदी पर बना नया पुल इलाके के लोगों के लिए राहत बनने के बजाय परेशानी की बड़ी वजह बन गया है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार 55 मीटर लंबा यह पुल दो साल बाद भी आम लोगों के लिए नहीं खुल सका है। वजह साफ है। पुल तो बन गया, लेकिन दोनों ओर पहुंच मार्ग और मिट्टी का भराव आज तक पूरा नहीं हो पाया। लोक निर्माण विभाग के अनुसार पुल का निर्माण मार्च 2024 तक पूरा कर आवागमन शुरू किया जाना था। तय समय-सीमा बीत चुकी है, इसके बावजूद काम अधूरा पड़ा है। देरी को लेकर पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, लेकिन जमीनी हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
गांवों के लोग रोज झेल रहे परेशानी
पुल तैयार होने के बावजूद रास्ता न होने से आसपास के दर्जन भर गांवों के लोगों को रोजाना भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। आदमपुर बरेठी, सत्तीदीन खेड़ा, फरहदपुर, कुबरी खेड़ा, शेखपुर बुजुर्ग, जसमंडा बब्बन, गिरिवर खेड़ा और असुरन खेड़ा जैसे गांवों के किसानों और ग्रामीणों को अब भी करीब 10 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर मोहान-सई नदी मार्ग से आना-जाना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल चालू हो जाए तो न सिर्फ समय और पैसा बचे, बल्कि खेती-बाड़ी, बाजार और जरूरी कामों के लिए आवागमन भी आसान हो जाएगा। लेकिन अधूरे एप्रोच रोड ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
खुदाई से बढ़ा हादसे का खतरा
ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मिट्टी भरान के लिए पुराने ऐतिहासिक पुल के पास खुदाई शुरू कर दी गई है। इससे वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है, जो खासकर रात के समय दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। गांव वालों का डर है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
इतिहास समेटे है भोगला पुल
सई नदी पर बना भोगला पुल सिर्फ एक साधारण पुल नहीं, बल्कि इलाके की पहचान और इतिहास का अहम हिस्सा है। इसका निर्माण वर्ष 1740 में अवध के नवाब सफदरजंग के वजीर नवल राय ने कराया था। यह पुल कभी लखनऊ, कानपुर और फर्रुखाबाद को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा हुआ करता था। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि वर्ष 1856 में ब्रिटिश जनरल आउटरम ने सैनिक आवागमन रोकने के उद्देश्य से इस पुल को तोड़ने का प्रयास भी किया था। आज यह ऐतिहासिक पुल जर्जर हालत में खड़ा है, जबकि इसके ठीक समानांतर बना नया पुल अधूरा पड़ा है। लोगों का कहना है कि एक ओर इतिहास संभाल कर रखने की बात होती है, दूसरी ओर नई सुविधाएं भी अधूरी छोड़ दी जाती हैं।
विभाग ने माना काम में देरी
लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी देरी की बात स्वीकार कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता प्रवीण कटियार का कहना है कि पुल का निर्माण मार्च 2024 तक पूरा होना था। करीब दो साल होने वाले हैं, लेकिन ठेकेदार अभी तक एप्रोच रोड का काम शुरू नहीं करा सका है। इस संबंध में ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अब देखना यह है कि नोटिस के बाद काम में तेजी आती है या फिर भोगला पुल यूं ही अधूरा रहकर लोगों की परेशानी का प्रतीक बना रहेगा। इलाके के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही पुल के साथ रास्ता भी बने और उनका इंतजार खत्म हो।
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