: पुलिस लाइन में महिला सशक्तिकरण का संदेश देती दौड़
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Oct 8, 2025
सोनम सिंह बोलीं—महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही मिशन शक्ति का असली मकसद
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। रिजर्व पुलिस लाइन में बुधवार को “रन फॉर एम्पावरमेंट” कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया। मिशन शक्ति अभियान के तहत हुई इस मैराथन दौड़ का मकसद था—महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें सशक्त बनाना और समाज में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना। सुबह से ही पुलिस लाइन परिसर में जोश और ऊर्जा का माहौल था। पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और क्षेत्राधिकारी सफीपुर सोनम सिंह ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया। “रन फॉर एम्पावरमेंट” के नारों के साथ जब महिला आरक्षियों और छात्राओं की टोली सड़क पर उतरी, तो शहर की फिज़ा में जागरूकता का संदेश गूंज उठा।
इस दौड़ में पुलिस लाइन की महिला आरक्षियों के अलावा जिले के कई विद्यालयों की छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दौड़ के दौरान लोगों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
दौड़ पूरी होने के बाद क्षेत्राधिकारी सोनम सिंह ने सभी प्रतिभागियों को पोषाहार वितरित किया और उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना ही मिशन शक्ति अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि समाज में महिलाएं अगर सजग और आत्मविश्वासी रहेंगी, तो अपराध खुद-ब-खुद कम होंगे।
सोनम सिंह ने बालिकाओं और महिलाओं को आपात स्थिति में तुरंत सहायता लेने के लिए हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने महिला पावर लाइन 1090, महिला हेल्पलाइन 181, आपात सेवा 112, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, चाइल्ड लाइन 1098, एम्बुलेंस सेवा 108, स्वास्थ्य सेवा 102 और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
इस मौके पर प्रतिसार निरीक्षक अब्दुल रशीद समेत पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। पुलिस लाइन परिसर में महिला सशक्तिकरण से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए, जिनसे लोगों को सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में अपनी भूमिका को लेकर और जागरूक होती हैं। मैराथन सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश लेकर शहर की गलियों से गुज़री।
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