वीडियो वायरल : कबाड़ के शोर से उपजा मामला मारपीट तक पहुंचा
Fri, Nov 28, 2025
पुलिस ने पहुंचकर भीड़ को रोका, घायलों का अस्पताल में इलाज
उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र के छिपियाना चौराहा में कबाड़ तोड़ने पर हुए विवाद ने शुक्रवार सुबह अचानक हिंसक मोड़ ले लिया। दो पक्ष आमने सामने आ गए, मारपीट हुई और लोहे की रॉड व डंडों से हमले तक की नौबत आ गई। झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज गति से फैल रहा है, जिसमें कई लोग एक दूसरे पर वार करते स्पष्ट नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कबाड़ काटने से होने वाले लगातार शोर पर काफी समय से आपत्तियां उठ रही थीं। सुबह जब एक पक्ष ने कबाड़ तोड़ने से रोकने की बात कही तो कहासुनी शुरू हुई और धीरे धीरे मामला सड़क पर भयंकर झड़प में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों ओर से कई लोग चोटिल हुए और घायल अवस्था में अस्पताल भेजे गए। पहली रिपोर्ट में किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
बवाल की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित कर स्थिति संभाली। दोनों पक्ष कोतवाली पहुंचे और एक दूसरे पर हमला करने की तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो व बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि तनाव न बढ़े और स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
छिपियाना क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि कबाड़ से जुड़े कार्य नियमानुसार व निर्धारित समय में संचालित कराए जाएं, जिससे शोर और विवाद को रोका जा सके। स्थानीय माहौल देर शाम तक तनावभरा रहा, हालांकि पुलिस की सक्रियता से स्थिति सामान्य होने लगी है। लोग अब भी चर्चा कर रहे हैं कि छोटी बात संवाद से सुलझ जाती तो लाठी और रॉड चलने तक बात शायद न पहुंचती।
पशुपालन विभाग की फाइलों ने खोली परतें : सस्पेंशन की दूसरी कार्रवाई
Thu, Nov 27, 2025
पशु चिकित्सालयों में रंगाई मरम्मत बजट के दुरुपयोग ने बढ़ाया मामला गर्म
उन्नाव। पशुपालन विभाग की वित्तीय गड़बड़ियों का मामला लगातार गहराता जा रहा है। पहले मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर प्रसाद निलंबित हुए, अब वरिष्ठ सहायक व प्रभारी लेखाकार प्रीति श्रीवास्तव को भी इसी सिलसिले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। विभाग के भीतर जो आरोप और जांच रिपोर्टें सामने आईं, उन्होंने पूरे कामकाज की परतें खोलकर रख दीं।
लखनऊ मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 ने जारी आदेश में कहा है कि लेखाकार ने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया। कई मौके पर स्टॉक रजिस्टर नहीं बनाया गया, वहीं पंजिका में दर्ज रकमों में अंतर मिला। जेम पोर्टल से खरीदी गई सामग्री की मात्रा और कीमत तक दर्ज नहीं पाई गई, जबकि यह लेखा कार्य का प्रमुख हिस्सा होता है। ऊपर से आरोप यह भी कि उन्होंने अपने अधिकार से बाहर जाकर टेंडर जारी किए और प्रभारी अधिकारी के बिना हस्ताक्षर वाले पत्र को पोर्टल पर अपलोड कर खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। आरोपों की जांच पूरी हुई और रिपोर्ट आने के बाद निलंबन आदेश प्रभाव में आया। प्रीति श्रीवास्तव को निलंबन अवधि में हरदोई सीवीओ कार्यालय में अटैच किया गया है।
सीवीओ की सस्पेंशन फाइल ने खोले कई पन्ने
कुछ समय पहले जिले के पूर्व सीवीओ डॉ. महावीर प्रसाद भी वित्तीय अनियमितताओं में फंस गए थे। पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के लिए 13.80 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। 12 पशु चिकित्सालयों को एक-एक लाख और दो पशु सेवा केंद्रों के लिए 90-90 हजार रुपये आवंटित थे। यह रकम अस्पतालों के रंग-रोगन और मरम्मत पर खर्च होनी थी, पर जांच में पता चला कि खर्च कागजों में तो हुआ, जमीन पर उतना काम नजर नहीं आया।
कार्यालय सामग्री की खरीद में भी कीमतें बढ़ाकर दिखाने के संकेत मिले। झाड़ू से लेकर तौलिया तक, छोटे से छोटे सामान में भी बाजार दर और बिल के आंकड़े मेल नहीं खाए। इसी आधार पर डॉ. प्रसाद को रिटायरमेंट के 24 घंटे पहले ही निलंबन आदेश जारी हुआ। चर्चा यह भी रही कि लेखाकार इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका में थीं और अब उन्हीं पर अंतिम कार्रवाई एजेंसी ने कर दी है।
विभाग में खलबली, फाइलों की दुबारा तलाशी
इन लगातार दो निलंबनों के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई है। फाइलें, स्टॉक रजिस्टर और खरीद विवरण फिर से खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आगे जांच और भी नाम सामने ला सकती है, क्योंकि खामियों की सूची छोटी नहीं है।
इधर, सीवीओ डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं पर शासन ने कार्रवाई तय की है। आज आदेश मिला है। निलंबन अवधि में उन्हें हरदोई कार्यालय भेजा गया है।गौरतलब है कि उन्नाव में इन घटनाओं ने एक बार फिर सरकारी बजट के उपयोग, खरीद प्रणाली और आंतरिक लेखा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजर टिकी रहेगी।
24 घंटे में तीन दबिश : 51 लीटर कच्ची शराब बरामद
Thu, Nov 27, 2025
जिला
आबकारी अधिकारी बोले, अवैध शराब पर जीरो टॉलरेंस
उन्नाव। अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसता दिख रहा है। लगातार हो रही दबिशों से अवैध कारोबारियों में खलबली मची है।आबकारी विभाग और पुलिस की टीमों ने 24 घंटे के अंदर अलग अलग इलाकों में अभियान चलाकर कच्ची शराब बरामद की और तीन महिलाओं को हिरासत में लिया। कार्रवाई पूरे दिन चली और कई स्थानों पर दुकानें, ढाबे व संदिग्ध ठिकानों की जांच की गई। विभाग का कहना है कि अब अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलेगा और किसी को राहत नहीं मिलेगी।
सबसे पहले छापेमारी बांगरमऊ क्षेत्र में हुई। जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्रा के निर्देश पर आबकारी निरीक्षक अखिलेश सिंह व टीम ने हाईवे किनारे ढाबों और लाइसेंसी दुकानों की चेकिंग की। दुकान में रखी बोतलों, स्टॉक रजिस्टर और बिलों की जांच की गई। ढाबों पर रखे शराब के स्टॉक को भी परखा गया। टीम कई घंटे इलाके में घूमती रही और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। विभाग ने दुकानदारों को दो टूक कहा कि बिना लाइसेंस शराब बेचने पर सीधी कार्रवाई होगी।
दूसरा अभियान बीघापुर तहसील के केदारखेड़ा और रानीपुर गांव में चला। यहां टीम को 25 लीटर कच्ची शराब मिली। मौके से एक महिला को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक गांव में लंबे समय से अवैध शराब बनने की जानकारी मिल रही थी। बरामद शराब को नष्ट कर दिया गया और घर में मिले सामान को जब्त किया गया।
तीसरी दबिश मौरावां थाना क्षेत्र के हिलौली बाजार में पड़ी, जहां 26 लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई और दो महिलाओं को हिरासत में लिया गया। टीम ने वहां से शराब बनाने का कुछ सामान भी बरामद किया। पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि वे बाजार वाले दिन ज्यादा बिक्री करती थीं।
इधर, अनुराग मिश्र ने बताया कि टीमों को स्पष्ट निर्देश हैं कि अवैध शराब बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कच्ची शराब से जान का खतरा रहता है। हम रोज अलग अलग क्षेत्रों में जांच कर रहे हैं। जहां भी शिकायत मिलेगी वहां तुरंत दबिश दी जाएगी। अवैध कारोबार में शामिल कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा।