बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा : अफसरों से जवाब-तलब
Thu, Nov 27, 2025
अध्यक्ष ने कहा अगली बैठक तक पूरा हो काम, शुद्ध जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य
उन्नाव। विकास भवन सभागार में मंगलवार को जिलास्तरीय विकास कार्य अनुश्रवण समिति की बैठक हुई। पहली ही बैठक में माहौल थोड़ा गर्म रहा। जनप्रतिनिधियों ने सबसे पहले शहर में चल रही अमृत योजना की सुस्ती और उससे उखड़ी, टूटी सड़कों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को अभी तक शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिली। जल निगम के अफसरों से पूछा गया कि आखिर यह योजना कब तक पूरी होगी, मगर स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने दो टूक कहा कि अगली बैठक से पहले काम पूरा होना चाहिए और शहरवासियों को पानी मिलने लगे। कई ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्यों ने शिकायत रखी कि पाइप लाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गईं, लेकिन मरम्मत आज तक नहीं की गई। इसी पर अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि जहां लापरवाही हो रही है, वहां जिम्मेदार अफसर और ठेकेदार दोनों पर कार्रवाई तय हो। बैठक में एमएलसी अरुण पाठक ने भी 2018 में शुरू हुई 264 करोड़ की अमृत योजना की धीमी प्रगति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छह साल से परियोजना चल रही है, लेकिन धरातल पर परिणाम दिखाई नहीं दे रहे। बिजली, सिंचाई, पंचायतीराज और पशुपालन समेत अन्य विभागों की योजनाओं की स्थिति पर भी समीक्षा हुई।
शिक्षा विभाग पर चर्चा के दौरान बीएसए शैलेंद्र पांडेय बैठक में अनुपस्थित मिले। इस पर सीडीओ को निर्देश दिया गया कि उनसे स्पष्टीकरण लिया जाए। एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं के रोजगार से संबंधित सवालों का विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे पाए, जिस पर अध्यक्ष ने कहा कि अगली बैठक में संपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की जाए।
बैठक में सड़कों पर भटकते छुट्टा मवेशियों का मुद्दा भी उठा। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आवारा पशु फसल और राहगीरों दोनों के लिए खतरा बन रहे हैं। पशुपालन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया गया और निर्देश दिया गया कि मवेशियों को पकड़कर जल्द गोशालाओं में भेजा जाए।
विधायक पंकज गुप्ता, आशुतोष शुक्ला, बंबालाल दिवाकर, श्रीकांत कटियार, भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी, भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष संजीव त्रिवेदी, सीडीओ कृतिराज समेत कई अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।
यह बैठक साफ संकेत दे गई कि विकास कार्यों की प्रगति अब सीधे सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में काम की गति और शहरवासियों को मिलने वाले वास्तविक लाभ ही अगली बैठक का मूड तय करेंगे।
जमीन सौदे में धोखा : कई महीने बाद आरोपी पकड़ा गया
Wed, Nov 26, 2025
प्रशासन ने कहा, भूमि से जुड़े फर्जीवाड़ों पर सख्त निगरानी जारी
उन्नाव। कोतवाली सदर पुलिस ने जमीन की खरीद फरोख्त में जालसाजी कर फर्जी बैनामा कराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी सालिक राम उर्फ मुचनू पुत्र स्व. विश्राम यादव निवासी सदर कोतवाली क्षेत्र के लोक नगर का रहने वाला है। काफी समय से वांछित चल रहा था और उसके खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर संपत्ति हड़पने का मामला दर्ज है। बुधवार को टीम ने दबिश देकर उसे कचहरी पुल के पास से पकड़ा और अदालत में पेश किया।मामला बीते 8 मई का है। मोहल्ला कृष्णा नगर निवासी कुंवर रामेन्द्र सिंह चौहान ने थाने में शिकायत दी थी कि उनकी जमीन के दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर फर्जी तरीके से बैनामा कराया गया। जांच में तथ्यों के आधार पर मुकदमा पंजीकृत हुआ और पुलिस ने विवेचना शुरू की। इसी के बाद से आरोपी पुलिस की नजरों में था, लेकिन वह हाथ नहीं लग रहा था।
थाना कोतवाली सदर प्रभारी निरीक्षक चन्द्र कान्त मिश्र ने बताया कि बुधवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की और सालिक राम उर्फ मुचनू को हिरासत में ले लिया। उसके पास से कुछ कागजात मिले हैं जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने धोखे से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर जमीन अपने कब्जे में करने की कोशिश की थी। बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर विधिक कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। शहर कोतवाल का कहना है कि दस्तावेजों से जुड़ी धोखाधड़ी और भूमिगत बैनामों पर सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी, ताकि असल मालिकों की जमीन सुरक्षित रह सके।
रेडियोएक्टिव सुरक्षा में चूक उजागर : दही औद्योगिक क्षेत्र की यूनिट बंद
Wed, Nov 26, 2025
सुरक्षा उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई, यूनिट दो महीने तक निगरानी में
उन्नाव। दही औद्योगिक क्षेत्र की शांत पड़ी फैक्ट्री बुधवार को अचानक फिर चर्चा में आ गई, जब मुंबई स्थित अणुशक्ति भवन और परमाणु ऊर्जा विभाग की 12 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम यहां पहुंची। करीब सात साल से बंद पड़े मेसर्स इम्पार्शियल एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड के गामा रेडिएशन प्रोसेसिंग प्लांट में मौजूद रेडियोएक्टिव पदार्थों और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की गई। सुबह ग्यारह बजे टीम ने पुलिस और जिला प्रशासन की मौजूदगी में यूनिट का निरीक्षण शुरू किया और लगभग दो घंटे तक प्लांट के भीतर तकनीकी मूल्यांकन चलता रहा। निरीक्षण में रेडियोधर्मी पदार्थों के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण कमियां पाई गईं, जिसके बाद यूनिट को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। यह वही यूनिट है, जहां 2018 तक मांस और अन्य खाद्य सामग्री को गामा किरणों के माध्यम से संरक्षित किया जाता था, ताकि वह लंबे समय तक खराब न हो। इस प्रक्रिया में कोबाल्ट 60 जैसा रेडियोएक्टिव तत्व उपयोग में लाया जाता है, जिसे केवल लाइसेंस और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरा होने पर ही भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) उपलब्ध कराता है। लाइसेंस की वैधता पूरी होने के बाद भी संयंत्र में मौजूद रेडियोएक्टिव सामग्री का सुरक्षित संरक्षण मानकों के अनुसार न मिलने पर विशेषज्ञ दल हरकत में आया। टीम ने निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि फैसलिटी में रख-रखाव कमजोर पाया गया है और स्थिति को देखते हुए अब अगले दो महीनों में रेडियोएक्टिव पदार्थ को नियंत्रित रूप से हटाया जाएगा। तब तक किसी भी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और परिसर पुलिस निगरानी में रहेगा। टीम के आने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र और शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। दोपहर तक लोगों में यह सवाल घूमता रहा कि आखिर वैज्ञानिक दल क्यों पहुंचा और क्या रेडिएशन रिसाव जैसी कोई स्थिति बनी है। हालांकि निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने साफ किया कि हालात नियंत्रण में हैं और खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। कार्रवाई केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरा न होने के कारण की गई है।
वर्ष 2018 से बंद, फिर भी अंदर मौजूद था रेडियोएक्टिव मैटेरियल
जानकारी के मुताबिक यह यूनिट साल 2018 से अप्रचालक अवस्था में पड़ी थी। यहां पहले मांस और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए फूड ई-रेडिएशन तकनीक का उपयोग होता था। इस प्रक्रिया में कोबाल्ट-60 नामक रेडियोएक्टिव तत्व इस्तेमाल किया जाता है। यह सामग्री बीएआरसी द्वारा निश्चित अवधि और लाइसेंस के बाद ही उपलब्ध कराई जाती है। समय सीमा पूरी होने के बाद भी रेडियोएक्टिव पदार्थ गोदाम में सुरक्षित तरीके से संरक्षित न मिलने पर वैज्ञानिकों ने तत्काल कार्रवाई की। सुबह लगभग 11 बजे स्टेशन डायरेक्टर एसके कावरे के नेतृत्व में टीम ने प्लांट के गोदाम में प्रवेश किया। निरीक्षण दो घंटे तक चला और सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात रहा। जांच पूरी होने के बाद मुख्य गेट को सील कर दिया गया और किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
कैसे काम करता है ई-रेडिएशन प्लांट
फूड ई-रेडिएशन एक तकनीक है जिसमें खाद्य सामग्री को गामा किरणों से उपचारित कर बैक्टीरिया और परजीवियों को नष्ट किया जाता है। इससे मांस जैसे उत्पादों की शेल्फ लाइफ कई गुना बढ़ जाती है। इसी प्रक्रिया में कोबाल्ट-60 से निकलने वाला विकिरण उपयोग किया जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह मैटेरियल मोटे स्टील शील्ड में बंद रहता है, लेकिन रख-रखाव में कमी हो तो रिसाव का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि इस तरह की यूनिट में सुरक्षा मानक सर्वोच्च स्तर के होते हैं।
दो महीने में हटेगा रेडियोधर्मी पदार्थ
टीम ने गोदाम में मौजूद रेडियोएक्टिव मटेरियल सुरक्षित ढंग से वापस ले जाने के लिए दो माह का समय तय किया है। इस अवधि तक इकाई बंद रहेगी और परिसर में प्रवेश नहीं किया जा सकेगा। गार्ड रूम और मुख्य द्वार को बैरिकेड कर पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है।
जिले में अफवाहों का दौर, पर राहत भी
टीम के आने की खबर बाहर आते ही कई तरह की चर्चाएं फैल गईं। कुछ लोग इसे रेडिएशन लीक से जोड़ते रहे, जबकि कुछ ने इसे हालिया विस्फोटों से लिंक किया। हालांकि दोपहर बाद जब अधिकारियों ने पुष्टि की कि टीम केवल रेडियोएक्टिव पदार्थ वापस लेने और सुरक्षा जांच के लिए आई है, तो स्थिति सहज हुई। इधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ शशि बिंदकर ने बताया कि यदि रेडिएशन लीक की आशंका होती तो आधा किलोमीटर का क्षेत्र सील कर दिया जाता और विशेषज्ञ सूट के साथ निरीक्षण होता। ऐसे में खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं थी, जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
जिला व राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त मौजूदगी
निदेशक सिक्योरिटी एंड कोर्डिनेशन, परमाणु ऊर्जा विभाग भारत सरकार, अणुशक्ति भवन मुंबई की ओर से गठित केंद्रीय टीम ने जिला प्रशासन को 14 नवंबर को ही सूचित कर दिया था कि वे 26 नवंबर को निरीक्षण के लिए उन्नाव आएंगे। तय तिथि पर विशेषज्ञ दल पहुंचा, जिसमें एसके करवारे स्टेशन डायरेक्टर एनएपीएस नरौरा, किरन सोनावाने डायरेक्टर सिक्योरिटी एंड कोर्डिनेशन डीएई, आरबी राकेश एसओ एसओ हेड आरआरएचपीएस एचपीडी बीएआरसी, आरकेबी यादव एसओजी हेड ईपीआरएस आरएसएसडी बीएआरसी, डीएम राने एओएफ एईआरबी, दीपक शर्मा एसओ (एफ) डीएई और अभिमन्यु सरकार एसओ (ई) एईआरबी शामिल थे।
केंद्रीय टीम के साथ जिले की प्रशासनिक टीम भी मौजूद रही। इसमें नगर मजिस्ट्रेट राजीव राज, अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश सिंह, उपायुक्त उद्योग और जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास केंद्र से करुणा राय, कनिष्ठ सहायक यूपीसीडा, सहायक पर्यावरण अभियंता तथा उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अवर अभियंता शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दस्तावेज, इकाई से संबंधित अभिलेख और सुरक्षा मानकों की स्थिति का परीक्षण किया।
रेडिएशन यूनिट अगले आदेश तक बंद
दही औद्योगिक क्षेत्र स्थित गामा रेडिएशन यूनिट सुरक्षा मानकों का अनुपालन न होने पर सील कर दी गई है। अब दो माह में रेडियोएक्टिव तत्व हटाए जाएंगे और तब तक प्लांट बंद रहेगा। निरीक्षण के बाद स्पष्ट हो गया है कि स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन और विशेषज्ञ लगातार निगरानी में हैं और जनजीवन पर किसी खतरे की पुष्टि नहीं है।