फॉर्म वितरण 99 प्रतिशत पूरा : डीएम ने देखा अभियान की असली तस्वीर
Sat, Nov 22, 2025
2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान पूरा, सुधार प्रक्रिया और साफ हुई
उन्नाव। मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चल रहे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान को जिलाधिकारी गौरांग राठी खुद मॉनिटर कर रहे हैं। शनिवार को उन्होंने कलेक्ट्रेट में लगाई गई हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया और वहां मौजूद कर्मचारियों से पूरे कामकाज की जानकारी ली। उन्होंने साफ कहा कि अभियान का मकसद मतदाता सूची को बिना गलती और पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार करना है। जिलाधिकारी के अनुसार अभियान के तहत बीएलओ पूरे जिले में घर–घर जाकर प्रपत्र बांट रहे हैं। अब तक करीब–करीब सभी यानी लगभग 99 प्रतिशत मतदाताओं तक फॉर्म पहुंच चुके हैं। बाकी लोगों तक भी जल्द फॉर्म पहुंचा दिए जाएंगे। वर्तमान में जिले में 23 लाख 25 हजार से अधिक मतदाता दर्ज हैं। इनमें से लगभग 13 प्रतिशत मतदाता अपने फॉर्म भरकर वापस दे चुके हैं। फॉर्म मिलते ही उनका डेटा निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। डीएम ने बताया कि हर तहसील में हेल्प डेस्क तैयार हैं, जहां मतदाता किसी भी तरह की जानकारी या शिकायत लेकर पहुंच सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने विवरण ध्यान से भरकर समय से बीएलओ को दें, ताकि किसी का नाम सूची से छूट न जाए।
जिले में चल रहा अभियान अब तक अच्छा परिणाम दे रहा है। प्रशासन के अनुसार 50 प्रतिशत मतदाताओं की ऑनलाइन मैपिंग पूरी हो चुकी है, जबकि 70 प्रतिशत की फिजिकल मैपिंग भी संपन्न हो गई है। इसके साथ ही वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान पूरा कर लिया गया है, जिससे गलतियों को पहचानने और सुधारने में आसानी हुई है।
डीएम ने कहा कि लक्ष्य है कि आगामी चुनाव से पहले पूरी मतदाता सूची शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित तैयार हो जाए। प्रशासन की टीम इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।
कवाब-पराठे की मशहूर दुकान का वीडियो वायरल : खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल
Sat, Nov 22, 2025
वीडियो की पुष्टि नहीं, लेकिन शहरभर में गूंजी चर्चा
उन्नाव। शहर के गांधी नगर तिराहे पर चल रही एक मशहूर कवाब-पराठे की दुकान फिर चर्चा में है। यहां के डोसे में कीड़ा मिलने का आरोप लगाते हुए एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तेजी से घूमता रहा। वीडियो में एक शख्स डोसे के अंदर कथित रूप से कीड़ा दिखाता दिख रहा है। हालाकिं "द लखनऊ टाइम्स" इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन दिनभर शहर में इसी मुद्दे की बातें होती रहीं। गांधीनगर इलाके में यह दुकान रोज सुबह सैकड़ों लोगों की पहली पसंद रहती है। नाश्ता प्रेमी यहां लाइन लगाकर पहुंचते हैं। इसी बीच वायरल वीडियो ने लोगों को चौंका दिया। जैसे ही वीडियो फैला, कई स्थानीय लोगों ने खाद्य विभाग से जांच की मांग शुरू कर दी। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो की जानकारी मिल गई है, लेकिन अब तक किसी ग्राहक ने औपचारिक शिकायत नहीं दी। अधिकारी मानते हैं कि इस घटना ने शहर के होटल और रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इधर, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश दीक्षित ने बताया कि उन्हें यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला है। उन्होंने कहा कि तथ्य सामने लाने के लिए जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मामला सच निकला तो यह भरोसे पर बड़ा सवाल होगा, क्योंकि कई परिवार और ऑफिस जाने वाले लोग रोज यहां से नाश्ता करते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या कोई शिकायत दर्ज होती है और जांच में क्या निकलकर सामने आता है।
कभी जीवनदायिनी, आज जहरीली : नदी का गिरता सच
Sat, Nov 22, 2025
टेनरियों का गंदा पानी बना किसानों और ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता
उन्नाव। कभी गांवों की प्यास बुझाने और खेतों को संजीवनी देने वाली लोन नदी आज अपनी पहचान तक खो चुकी है। पानी इतना खराब हो गया है कि न पीने लायक बचा है और न खेती के काम का। औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला जहरीला पानी नदी में मिलने से हालत हर साल और बिगड़ रही है।
शहर के दही चौकी इलाके से शुरू होकर पुरवा और बीघापुर की तरफ बहती यह नदी पहले कई गांवों की जरूरी जरूरतें पूरी करती थी। लेकिन टेनरियों और फैक्टरियों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़े जाने से इसका रंग काला पड़ गया है। कई जगह पानी के ऊपर लाल रंग की चिपचिपी परत दिखती है। गुजरने वाले लोग सिर्फ एक झोंके से समझ जाते हैं कि स्थिति कितनी खराब है। बदबू इतनी तेज है कि लोग सांस रोककर निकलते हैं।स्थिति इस कदर बिगड़ी है कि किसान अब नदी का पानी खेतों पर नहीं डाल रहे। उनका कहना है कि एक बार सिंचाई कर दी तो फसल जलने लगती है। मजबूरी में निजी नलकूपों या टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती का खर्च दोगुना हो गया है। समस्या सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रही। गांवों का भूगर्भ जल भी तेजी से खराब हो रहा है। हैंडपंप से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड बढ़ गया है। इससे कई गांवों में लोग पेट, हड्डी और त्वचा संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ी। दही बंथर और अकरमपुर इलाके की टेनरियां भी स्थिति को और खराब कर रही हैं। यहां से निकलने वाला बिना ट्रीटमेंट करके दूषित पानी सीधे लोन नदी और सई नदी में बहाया जा रहा है। दोनों नदियों का प्रवाह तेज़ी से दूषित हो रहा है और असर आसपास की बस्तियों तक पहुंच चुका है। लोन नदी चांदपुर, जमुका, बड़ौरा, दुआ, जगेथा, पौंगहा, मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ, अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा और परसंडा जैसे गांवों के करीब से गुजरती है। इन इलाकों में करीब एक लाख से ज्यादा लोग दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी का हाल हर साल और खराब हो रहा है। कई बार विरोध और ज्ञापन दिए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही। अब लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक इस जहर को सहते रहेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि प्रदूषण पर तत्काल रोक लगे और लोन नदी को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, वरना आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।
पुरवा विधायक बोले, लोन नदी को बचाना अब जरूरी
पुरवा विधायक अनिल सिंह ने लोन नदी की बिगड़ती हालत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टेनरियों से निकलकर सीधे नदी में जा रहा गंदा पानी गांवों की सेहत और खेती दोनों को नुकसान पहुंचा रहा है। खेतों की मिट्टी खराब हो रही है और लोग मजबूरी में दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हाल किसी से छिपा नहीं है। विधायक ने बताया कि वह पूरे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा जाएगा कि नदी में गिर रहे औद्योगिक अपशिष्ट को तुरंत रोका जाए। जो भी इकाइयां नियम तोड़ रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठें। उनका कहना है कि लोन नदी को वैसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले सालों में हाल और बिगड़ जाएगा।
जिम्मेदार बोले
इधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अब सक्रिय दिख रहा है। क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर ने बताया कि नदी में गिरने वाले नालों और औद्योगिक इकाइयों के डिस्चार्ज का सैंपल लगातार लिया जा रहा है। पिछले सप्ताह भी टीम ने नदी और नालों के कई स्थानों से नमूने इकट्ठा किए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जल्दी आने वाली है और जैसे ही स्थिति स्पष्ट होगी उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जिन इकाइयों से प्रदूषित पानी मिलने की पुष्टि होगी उन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।