डीएम ने दिए आदेश : जिला अस्पताल गेट से हटेंगी सिगरेट और पान मसाले की दुकानें
Thu, Feb 5, 2026
सिटी मजिस्ट्रेट और कोतवाल ने दुकानदारों को दी अंतिम चेतावनी
उन्नाव। जिला अस्पताल के मुख्य गेट के आसपास लगी सिगरेट और पान मसाला की दुकानों को हटाने के निर्देश डीएम गौरांग राठी ने दिए हैं। यह कार्रवाई गुरुवार को बांगरमऊ क्षेत्र में एक्सप्रेस वे पर हुए सड़क हादसे में घायल लोगों का हाल जानने जिला अस्पताल पहुंचे डीएम के निरीक्षण के बाद सामने आई। बताया गया कि अस्पताल से लौटते समय सुरक्षा गार्डों ने डीएम को जानकारी दी कि अस्पताल गेट के पास सिगरेट और पान मसाला की दुकानों पर अक्सर अराजक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे न सिर्फ अस्पताल का माहौल बिगड़ता है, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को भी असुविधा होती है। शिकायत मिलने के बाद डीएम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति खुद देखी और तत्काल दुकानों को हटाने के निर्देश दिए। डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट राजीव राज और सदर कोतवाली के निरीक्षक चंद्रकांत मिश्र मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दुकानदारों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वे स्वेच्छा से वहां से दुकानें हटा लें। उन्होंने कहा कि अगर तय समय में दुकानों को नहीं हटाया गया, तो प्रशासन अभियान चलाकर कार्रवाई करेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के आसपास इस तरह की दुकानों की अनुमति नहीं दी जा सकती। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता है। अस्पताल परिसर और उसके आसपास शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए आगे भी सख्ती जारी रहेगी। प्रशासन की इस पहल को अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों और तीमारदारों ने राहत भरा कदम बताया है। उनका कहना है कि दुकानों के कारण अक्सर भीड़ और अव्यवस्था रहती थी, जिससे अस्पताल में आने-जाने में दिक्कत होती थी। अब कार्रवाई से माहौल बेहतर होने की उम्मीद है।
शादी से लौटते वक्त उजड़ा संसार : हाईवे पर एक साथ चार जिंदगियां खत्म
Thu, Feb 5, 2026
शवों के हालात देख कांप उठे पुलिसकर्मी, देर रात तक चला राहत और सफाई का काम
उन्नाव। लखनऊ कानपुर हाईवे की बुधवार रात एक ऐसी कहानी बन गई, जिसे जिसने देखा वह उम्र भर भूल नहीं पाएगा। सोहरामऊ के भल्ला फार्म तिराहे पर तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक खुशहाल परिवार को पल भर में मिटा दिया। पति पत्नी और दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। पीछे से आ रही बड़ी बेटी ने जब यह मंजर देखा तो चीख निकल गई। पुलिस और राहगीरों की आंखें भीग गईं। हाईवे पर बिखरे सपने, टूटे रिश्ते और इंसानी बदहवासी देर रात तक सवाल बनकर खड़े रहे।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
बुधवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे लखनऊ कानपुर हाईवे पर भल्ला फार्म तिराहे के पास यह हादसा हुआ। अजगैन कोतवाली क्षेत्र के कस्बा निवासी वीरेंद्र (35) अपने परिवार के साथ वैवाहिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। बाइक पर पत्नी रीतू (33), बेटी अनुराधा (9) और बेटा रुद्र (6) बैठे थे। आगे निकलने के बाद वीरेंद्र ने पीछे आ रहे साढ़ू को न देख बाइक रोक दी। तभी तेज रफ्तार ट्रक ने आगे चल रहे कंटेनर में जोरदार टक्कर मार दी। कंटेनर पलटा और ट्रक भागने के प्रयास में अनियंत्रित होकर बाइक को रौंदता चला गया। कुछ सेकंड में सब खत्म हो गया।
बड़ी बेटी की आंखों के सामने उजड़ा परिवार
परिवार की बड़ी बेटी नैंसी अपने मौसा की बाइक पर पीछे आ रही थी। वही बच गई। जैसे ही उसने आगे बढ़कर देखा, माता पिता और भाई बहन सड़क पर बिखरे पड़े थे। चीख पुकार मच गई। नैंसी बदहवास होकर गिर पड़ी। मौसा रंजीत ने उसे संभाला लेकिन बच्ची की हालत देख वहां मौजूद लोग भी खुद को रोक नहीं सके। एक ही पल में नैंसी के सिर से मां बाप का साया और भाई बहन की हंसी छिन गई।
शवों के हालात ने सबको झकझोरा
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। शव बुरी तरह क्षत विक्षत हो गए। मांस के टुकड़े सड़क और डिवाइडर तक जा चिपके। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसका दिल कांप गया। पुलिस कर्मियों को शव समेटते समय हाथ कांपते रहे। कई जवानों की आंखों से आंसू निकल आए। पुलिसकर्मियों का कहना था कि लंबे समय बाद इतना भयावह मंजर देखा है।
हाईवे पर एक घंटे तक थमा याताया
हादसे के बाद लखनऊ कानपुर हाईवे पर अफरा तफरी मच गई। करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। पुलिस ने आधा हाईवे बंद कर दूसरी लेन से वाहनों को निकाला। पलटे कंटेनर को हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। शवों को हटाने और सड़क साफ करने में समय लगा। देर रात जाकर कहीं यातायात सामान्य हो सका।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
साढ़ू रंजीत ने बताया कि वीरेंद्र खेती के साथ साथ प्राइवेट नौकरी करता था। परिवार मेहनत मजदूरी से जीवन चला रहा था। बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के सपने देखे जा रहे थे। एक साथ चार मौतों की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। गांव और मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। हर कोई यही कहता दिखा कि किस्मत ने परिवार को बहुत बेरहमी से तोड़ा।
चारों शव पोस्टमार्टम को भेजे गए
सूचना मिलते ही सोहरामऊ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सीओ अरविंद कुमार ने बताया कि चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है। एसओ अरविंद पांडे ने बताया कि तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। चालक की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद पूरे हादसे की तस्वीर साफ होगी।
सवाल जो हाईवे पर छोड़ गया हादसा
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर हाईवे की सुरक्षा और तेज रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे हादसों के बाद भी सबक लिया जाएगा। क्या रफ्तार पर लगाम लगेगी। या फिर किसी और परिवार को इसी तरह उजड़ने का इंतजार है। भल्ला फार्म तिराहे पर बिखरा खून और आंसू देर रात तक यही सवाल पूछते रहे।
अवैध यूनीपोल फिर बने जानलेवा : आंधी ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की पोल
Wed, Feb 4, 2026
अकरमपुर में सड़क के डिवाइडर पर लगा पोल गिरा, ट्रैफिक प्रभावित-जिम्मेदारी तय करने में उलझे विभाग
उन्नाव। शहर में अवैध यूनीपोल अब महज अव्यवस्था का मुद्दा नहीं रहे, बल्कि यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा गंभीर खतरा बन चुके हैं। मंगलवार को आई तेज आंधी ने एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर कर दिया। शुक्लागंज-राजधानी मार्ग पर अकरमपुर रोड स्थित शराब मील के पास सड़क के डिवाइडर पर लगे यूनीपोल का लोहे का स्ट्रेचर अचानक गिर गया। कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित हुआ। गनीमत रही कि उस वक्त कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। यह मार्ग कानपुर और शुक्लागंज को जोड़ने वाला प्रमुख और अत्यंत व्यस्त रास्ता है। दिनभर यहां वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों के सड़क के डिवाइडर पर यूनीपोल आखिर किसके आदेश से खड़े किए गए। शहर में अवैध होर्डिंग और यूनीपोल की भरमार किसी से छिपी नहीं है। नगर पालिका क्षेत्र में लगभग हर प्रमुख सड़क, चौराहा और डिवाइडर पर बैनर और होर्डिंग का मकड़जाल फैला है। खंभों पर नेताओं और प्रचार सामग्री से भरे दर्जनों होर्डिंग दूर से ही नजर आ जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि उन्नाव में अब तक होर्डिंग के लिए कोई स्पष्ट जोन तय नहीं किया गया है। इसी का फायदा उठाकर विज्ञापन एजेंसियां मनमाने ढंग से जहां जगह मिली, वहीं पोल खड़े कर रही हैं। मंगलवार को अकरमपुर में गिरे यूनीपोल का मामला भी इसी मनमानी व्यवस्था की देन माना जा रहा है। जिस डिवाइडर पर यह पोल लगाया गया था, वह पीडब्ल्यूडी के अधीन आता है। सवाल यह है कि पीडब्ल्यूडी ने अपने नए बने डिवाइडर पर बिना अनुमति ऐसे ढांचे खड़े होने कैसे दिए। दूसरी ओर नगर पालिका की स्थिति भी साफ नहीं है। पालिका अधिकारियों के मुताबिक इन यूनीपोल का न तो कोई टेंडर हुआ है और न ही किराया तय है। अगर टेंडर नहीं हुआ, तो फिर ये पोल किस आधार पर खड़े हैं और इनसे होने वाली कमाई आखिर किसकी जेब में जा रही है।
जिला अस्पताल रोड, अकरमपुर और शहर के अन्य चौराहों पर इसी तरह कई यूनीपोल लगे हुए हैं। जब इनकी वैधता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे की ओर जिम्मेदारी टाल देते हैं। कोई नगर पालिका का नाम लेता है तो कोई पीडब्ल्यूडी का हवाला देकर खुद को अलग कर लेता है। इस आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को गिरा यूनीपोल भले ही किसी की जान नहीं ले सका, लेकिन यह एक कड़ी चेतावनी जरूर दे गया। अगर यही लोहे का स्ट्रेचर किसी वाहन या राहगीर पर गिर जाता, तो जिम्मेदारी किसकी होती, यह सवाल फिर अधर में ही रह जाता। मामले में एडीएम न्यायिक अमिताभ के मुताबिक प्रकरण से जुड़ी पुरानी पत्रावली निकलवाई जा रही है और जांच के बाद कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नए डिवाइडर पर लगे अवैध पोल हटाए जाएंगे। हालांकि लोगों का सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ जांच और बयान तक सीमित रहेगी या वास्तव में अवैध यूनीपोल हटाकर शहर को सुरक्षित बनाया जाएगा। मंगलवार की घटना यह साफ कर चुके हैं कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि नगर पालिका, पीडब्ल्यूडी और प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता है। अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई और अवैध ढांचों पर सख्त कदम नहीं उठे, तो अगली बार चेतावनी नहीं, बल्कि एक और बड़ा हादसा शहर का इंतजार कर रहा होगा।