34 साल पुरानी जमीन पर चला बुलडोजर : परिवारों ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
Tue, Jun 16, 2026
सर्वे विभाग पर नक्शे में हेरफेर का आरोप, पीड़ितों ने उच्च स्तरीय जांच और मुआवजे की मांग की
उन्नाव। पीपरखेड़ा क्षेत्र में भूमि विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। यहां कई परिवारों ने सर्वे विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ितों का दावा है कि करीब 34 वर्ष पूर्व खरीदी गई भूमि पर बने उनके मकानों और अन्य निर्माणों को 27 अगस्त 2024 को बिना पर्याप्त सुनवाई और अभिलेखों की समुचित जांच के बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। परिवारों के अनुसार उन्होंने गाटा संख्या 459 में वर्षों पहले विधिवत प्लॉट खरीदकर कब्जा प्राप्त किया था और लंबे समय से उसी भूमि पर निवास एवं निर्माण कार्य कर रहे थे। उनका कहना है कि समय-समय पर हुई प्रशासनिक जांचों में उनके कब्जे को वैध माना गया और कहीं भी भूमि को सरकारी या विवादित नहीं बताया गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सर्वे विभाग द्वारा मूल भू-मानचित्र में बदलाव कर एक कथित फर्जी नक्शा तैयार किया गया, जिसके आधार पर उनकी भूमि को सरकारी जमीन दर्शा दिया गया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए निर्माण गिरा दिया। उनका कहना है कि यदि अभिलेखों और पुराने रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। परिवारों का दावा है कि वर्ष 2016 से 2023 के बीच समाधान दिवस, आईजीआरएस और अन्य प्रशासनिक स्तरों पर हुई कई जांचों में उनके पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। उन रिपोर्टों में न तो कब्जे को अवैध बताया गया और न ही निर्माण कार्य पर किसी प्रकार की रोक का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद अचानक की गई कार्रवाई ने उन्हें आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया है। पीड़ित परिवारों ने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और संबंधित उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही कथित रूप से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, हुए नुकसान की भरपाई और भूमि पर पुनर्निर्माण की अनुमति दिए जाने की मांग भी उठाई है। परिवारों का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वे लगातार विभिन्न मंचों पर अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की अपील की है।
भेदभाव का आरोप : मस्जिद-मदरसा हटाए जाने के बाद रिफाहे आम सोसाइटी ने उठाए निष्पक्षता के सवाल
Tue, Jun 16, 2026
राष्ट्रपति व मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
उन्नाव। सदर तहसील क्षेत्र के माखी थाना अंतर्गत इसुनिया गांव में ग्राम समाज की भूमि पर बने मस्जिद और मदरसे को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिफाहे आम सोसाइटी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है और मामले में राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश समेत अन्य उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। सोसाइटी के प्रदेश संयोजक अफाक अहमद ने विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा है कि राजस्व अभिलेखों में खाता संख्या 122 खेल मैदान के रूप में दर्ज है। प्रशासन ने इसी भूमि पर बने मस्जिद और मदरसे को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त कर दिया, लेकिन उसी भूमि पर अन्य लोगों द्वारा किए गए कथित अतिक्रमणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सभी कब्जाधारकों पर समान रूप से लागू नहीं की गई। अफाक अहमद ने मांग की है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में खेल मैदान के रूप में दर्ज है तो वहां मौजूद सभी अवैध कब्जों को हटाया जाए। साथ ही बच्चों के लिए खेल मैदान विकसित कर उसकी चारदीवारी कराने की व्यवस्था भी की जाए, ताकि भूमि का उपयोग उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप हो सके। इधर, सामाजिक कार्यकर्ता दिलशाद अहमद ने मामले को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत तहसीलदार सदर से विस्तृत जानकारी मांगी है। उन्होंने आवेदन में पूछा है कि इसुनिया गांव में ग्राम समाज की भूमि पर कुल कितने अवैध कब्जे हैं, उन पर किस प्रकार के निर्माण किए गए हैं तथा अब तक कितने अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। आरटीआई आवेदन में यह भी जानकारी मांगी गई है कि कथित कब्जाधारकों के नाम और पते क्या हैं तथा खाता संख्या 122 पर मौजूद अन्य कब्जों के विरुद्ध अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
नसीर की कहानियों का मंचन : कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां
Tue, Jun 16, 2026
रंगमंच को गांव-गांव तक ले जाने की जरूरत: सुरेंद्र वर्मा
उन्नाव। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सहयोग से उदय सांस्कृतिक संस्थान, उन्नाव द्वारा मंगलवार को शिव शंकर सिंह-शिवराम सिंह महाविद्यालय, बिरसिंहपुर में साहित्यकार नसीर अहमद 'नसीर' की कहानियों का मंचन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। मंचन में रंगकर्मी जब्बार अकरम, रहमान रूमी, जया उपाध्याय, शफी अहमद खान, रफीक अहमद, राघवेंद्र सिंह और विकेश वाजपेई ने विभिन्न कहानियों को मंच पर जीवंत किया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से कहानी के पात्रों और भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसकी दर्शकों ने जमकर सराहना की।
कार्यक्रम के संयोजक एवं रंगकर्मी जब्बार अकरम ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास है कि रंगमंच और साहित्यिक गतिविधियों को शहरों के साथ-साथ गांवों तक भी पहुंचाया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके। मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष भारतीय सर्व धर्म संसद एवं संस्थापक श्री साईं दरबार मंदिर सेवा समिति, उन्नाव सुरेंद्र वर्मा 'बाबा जी' ने कहा कि रंगमंच को गांव-गांव तक ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने जब्बार अकरम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वह इस दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। साहित्यकार नसीर अहमद 'नसीर' ने कहा कि कहानियां हमारे समाज और आसपास के परिवेश से जन्म लेती हैं। इनके माध्यम से जीवन के अनेक पहलुओं को समझने और अनुभव करने का अवसर मिलता है। वहीं दिनेश प्रियमन ने कहा कि कहानी मंचन एक चुनौतीपूर्ण विधा है, क्योंकि इसमें कलाकार को अकेले कई पात्रों को सजीव रूप में प्रस्तुत करना पड़ता है। कार्यक्रम में रूप सज्जा का कार्य अस्मिता उपाध्याय ने किया, जबकि मंच सज्जा मो. आजम अकरम और अभिषेक वर्मा ने संभाली। मंच संचालन बलराम सिंह 'निर्बल' ने किया तथा ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी शकील खान ने निभाई। अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ के सहयोग की सराहना करते हुए आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।