वर्दी की भाषा पर विवाद : बुजुर्ग महिला संग अभद्रता पर दरोगा उमा अग्रवाल घिरीं
Sat, Nov 29, 2025
नोटिस से ज्यादा चर्चा भाषा की, जिले में अदब और वर्दी सवालों में
उन्नाव। जिले में पुलिस व्यवहार को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। एक ओर एसपी जयप्रकाश सिंह जिले में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं, सम्मान और संवेदना की सीख दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उन्हीं की वर्दी में काम कर रहे कुछ पुलिस कर्मी व्यवहार से पूरी पहल पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सदर कोतवाली में तैनात उप निरीक्षक उमा अग्रवाल का एक वीडियो गांव से निकलकर सोशल मीडिया पर पहुंचा और फिर कुछ ही घंटों में हर तरफ चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में वह एक बुजुर्ग महिला पर सख्त और अपमानजनक लहजे में बात करती हुई दिखती हैं। क्लिप में सुनाई देता है कि दरोगा महिला को जूते से मारने तक की चेतावनी देती हैं। यही बात लोगों को चुभ गई और मामला धीरे-धीरे प्रशासन तक पहुंच गया। यह पूरा घटनाक्रम डकौली गांव में हुआ बताया जा रहा है। जानकारी मिली है कि उमा अग्रवाल किसी केस से जुड़े नोटिस की तामील कराने वहां पहुंचीं। मौका-ए-वारदात पर मौजूद लोगों ने बताया कि एक बुजुर्ग महिला ने मामले की जानकारी जाननी चाही तो बात बढ़ गई। आरोप है कि इसी दौरान दरोगा का धैर्य टूट गया और उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए डरा-धमका दिया। गांव के कुछ लोगों ने यह सब अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और वीडियो इंटरनेट पर डाल दिया।
वीडियो अपलोड होते ही माहौल गरम हो गया। ग्रामीणों ने इसे आम आदमी की आवाज दबाने जैसा बताया और कहा कि यह व्यवहार किसी भी पुलिसकर्मी को शोभा नहीं देता। कई लोगों का कहना है कि वर्दी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी देती है, लेकिन ऐसे मामलों से भरोसा कमजोर पड़ता है। बुजुर्ग महिलाओं और गरीब तबके के साथ ऐसी भाषा उपयोग किए जाने पर लोगों ने सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। सवाल उठ रहा है कि कानून का पहरेदार अगर खुद धमकी पर उतर जाए तो पीड़ित आखिर किसके दरवाजे जाए।
अब प्रशासन भी हरकत में दिख रहा है। सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है और उमा अग्रवाल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। गांव के लोगों की मांग है कि कार्रवाई सिर्फ पूछताछ पर न रुके, बल्कि जिम्मेदारी तय कर कदम उठाए जाएं। कई ग्रामीण चाहते हैं कि दरोगा को लाइन हाजिर किया जाए और बुजुर्ग महिला से सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट कराया जाए। उन्नाव में यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ रहा है। चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक लोग चर्चा कर रहे हैं कि पुलिस और जनता के रिश्ते भरोसे पर टिके रहते हैं, और इस भरोसे को बचाए रखना उतना ही जरूरी है जितना न्याय करना। आगे क्या कदम उठते हैं, यह अभी देखना बाकी है, लेकिन वीडियो ने इतना साफ कर दिया है कि लोग अब चुप रहने वाले नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग में गबन का बड़ा मामला : लिपिक पर गाज गिरी,वार्डबॉय लापता
Sat, Nov 29, 2025
पहली जांच में बचा लिपिक, दूसरी रिपोर्ट में ही दोष साबित
उन्नाव। रोगी कल्याण समिति के फंड में हुए करीब 20 लाख रुपये के गबन की जांच अब नई दिशा पकड़ चुकी है। ताजा कार्रवाई में जिला अस्पताल के वरिष्ठ सहायक लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि लिपिक अपनी जिम्मेदारियों को खुद निभाने के बजाय वार्डबॉय से ट्रेजरी और मेडिकोलीगल से जुड़े संवेदनशील काम कराता था। इसी लापरवाही को आगे बढ़ाकर गबन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल जांच पूरी होने तक लिपिक को कानपुर मंडल कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।
19.98 लाख रुपये गायब, वार्डबॉय मार्च से लापता
जांच में सामने आया कि शहर के जुराखन खेड़ा निवासी वार्डबॉय विनय यादव ट्रेजरी रिकॉर्ड, पैसे जमा कराने और मेडिकोलीगल रिपोर्ट का काम देख रहा था, जबकि ये जिम्मेदारी स्टाफ अधिकारी और लिपिक की होती है। 18 मार्च से वह अस्पताल से नदारद है। इसी अवधि में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 19 लाख 98 हजार से अधिक की राशि बैंक खाते में जमा नहीं की गई। रिकॉर्ड मेल नहीं खाने पर गड़बड़ी का शक पकड़ा गया।
शिकायत डिप्टी सीएम तक पहुंची, पहली जांच में वार्डबॉय पर पूरा दोष
धनराशि गुम होने का मामला जब डिप्टी सीएम बृजेश पाठक तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए। सीनियर डॉक्टरों की तीन सदस्यीय समिति ने प्रारंभिक जांच की थी। रिपोर्ट में पूरे दोष का ठीकरा वार्डबॉय पर फोड़ते हुए उसके खिलाफ एफआईआर कराई गई। उसका और पटल प्रभारी का बैंक खाता भी सीज करा दिया गया। जांच रिपोर्ट निदेशालय भेज दी गई, पर ऊपरी स्तर पर इसे आधा अधूरा माना गया और फिर से पड़ताल शुरू कराई गई।
दूसरी जांच में सामने आया लापरवाही का बड़ा छेद
अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने नई जांच टीम गठित की। इस बार मामला पलट गया। टीम ने पाया कि बैंक में रकम जमा कराने और निकासी की जिम्मेदारी वरिष्ठ लिपिक निक्षांत कुमार की थी। लेकिन लिपिक ने यह जिम्मेदारी वार्डबॉय को थमा दी थी। यह भी शक जताया गया कि ऐसा जानबूझकर किया गया, ताकि धन की हेराफेरी आसान हो सके। टीम की रिपोर्ट के आधार पर लिपिक को निलंबित कर दिया गया।
आगे की जांच अब कानपुर मंडल में
अपर निदेशक ने कहा कि बिंदुवार जांच में लिपिक के स्तर पर गंभीर गड़बड़ी मिली है। इसलिए पद से हटाकर उन्हें कानपुर मंडल कार्यालय भेजा गया है। आगे की विस्तृत जांच वहीं से आगे बढ़ेगी और जिम्मेदारी के पूरे चेन की तह तक जांच की जाएगी। कुल मिलाकर जिला अस्पताल का यह मामला सरकारी धन की सुरक्षा प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है। वार्डबॉय से नियम विरुद्ध तरीके से काम कराने और करीब 20 लाख रुपये खाते में न पहुंचने का सवाल अब जवाब मांग रहा है। जांच आगे बढ़ेगी तो यह सामने होगा कि रकम कहां गई और किस स्तर पर खेल खेला गया।
वीडियो वायरल : कबाड़ के शोर से उपजा मामला मारपीट तक पहुंचा
Fri, Nov 28, 2025
पुलिस ने पहुंचकर भीड़ को रोका, घायलों का अस्पताल में इलाज
उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र के छिपियाना चौराहा में कबाड़ तोड़ने पर हुए विवाद ने शुक्रवार सुबह अचानक हिंसक मोड़ ले लिया। दो पक्ष आमने सामने आ गए, मारपीट हुई और लोहे की रॉड व डंडों से हमले तक की नौबत आ गई। झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज गति से फैल रहा है, जिसमें कई लोग एक दूसरे पर वार करते स्पष्ट नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कबाड़ काटने से होने वाले लगातार शोर पर काफी समय से आपत्तियां उठ रही थीं। सुबह जब एक पक्ष ने कबाड़ तोड़ने से रोकने की बात कही तो कहासुनी शुरू हुई और धीरे धीरे मामला सड़क पर भयंकर झड़प में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों ओर से कई लोग चोटिल हुए और घायल अवस्था में अस्पताल भेजे गए। पहली रिपोर्ट में किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
बवाल की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित कर स्थिति संभाली। दोनों पक्ष कोतवाली पहुंचे और एक दूसरे पर हमला करने की तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो व बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि तनाव न बढ़े और स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
छिपियाना क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि कबाड़ से जुड़े कार्य नियमानुसार व निर्धारित समय में संचालित कराए जाएं, जिससे शोर और विवाद को रोका जा सके। स्थानीय माहौल देर शाम तक तनावभरा रहा, हालांकि पुलिस की सक्रियता से स्थिति सामान्य होने लगी है। लोग अब भी चर्चा कर रहे हैं कि छोटी बात संवाद से सुलझ जाती तो लाठी और रॉड चलने तक बात शायद न पहुंचती।