क्रिकेट खेलने जा रहे युवक पर हमला : चाकू जैसे नुकीले हथियार से वार
Sun, Mar 29, 2026
पुराने विवाद में घेरकर की मारपीट, मोबाइल तोड़ा; चार के खिलाफ केस दर्ज
उन्नाव। शहर में मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब क्रिकेट खेलने जा रहे एक युवक पर रास्ते में घात लगाकर हमला कर दिया गया। हमले में युवक को नुकीली चीज से वार कर घायल कर दिया गया। पुलिस ने मामले में एक नामजद समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।सदर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन स्थित केवटा तालाब मोहल्ले के रहने वाले रितिक गुप्ता रविवार को जीआईसी मैदान में मैच खेलने के लिए घर से निकले थे। आरोप है कि रास्ते में पहले से मौजूद तकिया पाटन निवासी आर्य पटेल ने उन्हें रोक लिया। दोनों के बीच पहले किसी बात को लेकर विवाद हो चुका था, जिसे लेकर कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। पीड़ित के मुताबिक, आरोपी युवक अपने तीन-चार साथियों के साथ था। सभी ने मिलकर उसे घेर लिया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान एक आरोपी ने उसके सीने पर वार किया और फिर हाथ में मौजूद किसी नुकीले हथियार से हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। हमलावरों ने मारपीट के दौरान रितिक का मोबाइल फोन भी छीनकर तोड़ दिया। जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी सफेद रंग की कार से आए थे, जिस पर कानपुर का नंबर प्लेट लगा था। घटना के बाद घायल युवक ने पुलिस को तहरीर दी। कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि शिकायत के आधार पर एक नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
दैनिक यात्रियों की मांग : शुक्लागंज से लखनऊ तक मेमो ट्रेन चले
Sat, Mar 28, 2026
मेमो ट्रेन संचालन, बंद इंटरसिटी बहाली और प्लेटफॉर्म सुविधाओं को लेकर सौंपा ज्ञापन
उन्नाव। रेल यात्रियों की दिक्कतों को लेकर जिला दैनिक यात्री संघ अब खुलकर सामने आ गया है। संघ के प्रतिनिधियों ने मंडल रेल प्रबंधक को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर मेगा ब्लॉक के दौरान वैकल्पिक इंतजाम करने की मांग उठाई है, ताकि रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिल सके। संघ के विधिक सलाहकार मुजतबा हैदर रिजवी के मुताबिक 2 अप्रैल से 13 मई तक गंगा पुल पर स्लीपर बदलने का काम प्रस्तावित है। इस दौरान ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा, जिसका सीधा असर लखनऊ रूट पर रोज सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। इसे देखते हुए संघ ने शुक्लागंज से लखनऊ के बीच मेमो ट्रेनों के संचालन की मांग की है, ताकि दैनिक यात्रियों की आवाजाही बनी रहे और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। ज्ञापन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि कोरोना काल में बंद हुई कुछ अहम ट्रेन सेवाएं अब तक बहाल नहीं की गई हैं। इसमें वरुणा इंटरसिटी (24227/24228) और कानपुर-अयोध्या इंटरसिटी (14221/14222) शामिल हैं। संघ का कहना है कि इन ट्रेनों के बंद रहने से यात्रियों के पास सीमित विकल्प रह गए हैं, जिससे भीड़ और असुविधा दोनों बढ़ रही हैं। इन सेवाओं को जल्द दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। यात्री सुविधाओं को लेकर भी संघ ने कई सुझाव दिए हैं। प्लेटफॉर्म नंबर एक, चार और पांच पर कोच गाइडिंग डिस्प्ले लगाने की मांग की गई है, ताकि यात्रियों को ट्रेन के डिब्बों की सही स्थिति की जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्लेटफॉर्म दो और तीन पर पूरे शेड की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है, जिससे गर्मी और बारिश के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो मेगा ब्लॉक के दौरान हालात और कठिन हो सकते हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में ज्ञानेंद्र पांडेय, आशीष बाजपेयी और मनोज कुमार तिवारी समेत कई सदस्य मौजूद रहे।
विश्व रंगमंच दिवस : उन्नाव के कलाकारों ने बताई मंच की अहमियत
Sat, Mar 28, 2026
कला के जरिए समाज को दिशा देने पर हुई चर्चा
उन्नाव। शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर उदय सांस्कृतिक संस्थान की ओर से एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में शहर के रंगकर्मियों और कला से जुड़े लोगों ने भाग लेकर रंगमंच की भूमिका, उसके बदलते स्वरूप और युवाओं के लिए उसमें मौजूद अवसरों पर खुलकर चर्चा की। गोष्ठी की शुरुआत में वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेन्द्र वर्मा ‘बाबा जी’ ने रंगमंच की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज को आईना दिखाया जाता है। नाटक लोगों तक ऐसे संदेश पहुंचाते हैं, जो सीधे दिल और दिमाग पर असर डालते हैं और समाज में जागरूकता लाने का काम करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ कलाकार मो. जब्बार अकरम ने रंगमंच को करियर के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहले जहां अभिनय को पेशे के रूप में चुनना मुश्किल माना जाता था, वहीं अब हालात काफी बदल चुके हैं। सरकार और निजी संस्थानों की पहल से लखनऊ, बनारस, दिल्ली और पूना जैसे शहरों में एक्टिंग के लिए बेहतर प्रशिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं। यहां से प्रशिक्षण लेकर युवा अपने करियर को नई दिशा दे रहे हैं। रंगकर्मी एस. के. टाइगर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रंगमंच अभिनय की बुनियाद मजबूत करता है। उनके मुताबिक, जो कलाकार मंच से जुड़ा होता है, उसके लिए फिल्मों और वेब सीरीज़ में काम हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है, क्योंकि उसे अभिनय की मूल समझ पहले से होती है।वहीं राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि रंगमंच केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी निखारता है। मंच पर काम करने से संवाद, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है, जो जीवन के हर क्षेत्र में काम आती है।गोष्ठी में जया उपाध्याय, रफ़ीक अहमद, रहमान रूमी और शफी अहमद खान समेत अन्य रंगकर्मियों ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि डिजिटल दौर में भी रंगमंच की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि यह नए रूप में और ज्यादा प्रभावी बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य न सिर्फ रंगमंच को बढ़ावा देना है, बल्कि नई पीढ़ी को इस विधा से जोड़ना भी है, ताकि कला और संस्कृति की यह परंपरा आगे बढ़ती रहे।