जन औषधि केंद्र फिर शुरू : अब सस्ती दवाएं आसानी से मिलेंगी
Sat, Dec 6, 2025
डीएम गौरांग राठी और विधायक पंकज गुप्ता ने किया शुभारंभ,मरीजों ने राहत की सांस ली
उन्नाव। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की दिशा में शनिवार का दिन खास रहा। जिला अस्पताल परिसर में महीनों से बंद पड़ा जन औषधि केंद्र फिर से चालू कर दिया गया। लंबे इंतजार के बाद दोपहर करीब तीन बजे जिलाधिकारी गौरांग राठी और सदर विधायक पंकज गुप्ता ने फीता काटकर केंद्र को जनता के लिए खोल दिया। उद्घाटन के समय अस्पताल के डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
करीब छह महीनें से ज्यादा समय से बंद पड़े इस केंद्र के शुरू होने से मरीजों में खुशी है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा था और बाजार की महंगी दवाएं उनकी जेब पर भारी पड़ रही थीं। अब जन औषधि केंद्र के खुलने से उन्हें दवाएं कम दाम पर मिल सकेंगी, जिससे इलाज में बड़ी राहत मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र पर बाजार की तुलना में काफी कम दाम पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन का मानना है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज आते हैं, ऐसे में केंद्र के दोबारा शुरू होने से बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। उद्घाटन के दौरान जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कहा कि सरकार की मंशा है कि हर व्यक्ति तक सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि जन औषधि केंद्र की सप्लाई पूरी तरह दुरुस्त रहे, दवाओं की कमी न होने पाए और मरीजों को बिना परेशानी दवाएं मिलें। उन्होंने साफ कहा कि संचालन में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सदर विधायक पंकज गुप्ता ने कहा कि जन औषधि केंद्र का दोबारा शुरू होना जिले के लिए सकारात्मक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र लगातार बेहतर सेवा देगा और लोगों को अधिक से अधिक फायदा मिलेगा।
केंद्र के खुलते ही कई मरीज और उनके परिजन वहां दवाएं पूछने पहुंचे। लोगों ने कहा कि अगर दवाएं समय पर और सही गुणवत्ता की मिलती रहीं तो यह केंद्र अस्पताल के लिए बड़ी मदद साबित होगा। जन औषधि केंद्र की बहाली से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा और उपचार ज्यादा आसान और किफायती हो सकेगा।
अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई : 350 किलो महुआ लहन का जखीरा नष्ट
Sat, Dec 6, 2025
सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने का विभाग का आश्वासन
उन्नाव। जिले में अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान ने शनिवार को एक और बड़ा खुलासा किया। आबकारी विभाग की टीम ने बीघापुर तहसील के अकवारा गांव में छापेमारी कर कच्ची शराब के सक्रिय नेटवर्क का पर्दाफाश किया। कार्रवाई खुफिया टिप के बाद की गई, जिसमें गांव में काफी समय से महुआ से कच्ची शराब तैयार होने की सूचना मिल रही थी। मौके पर पहुंची टीम ने करीब 20 लीटर तैयार कच्ची शराब बरामद की। इसके साथ ही लगभग 350 किलो लहन महुआ नष्ट किया गया। अधिकारी बताते हैं कि इतनी मात्रा में रखा गया किण्वित महुआ बड़े स्तर पर शराब तैयार करने की मंशा दिखाता है। टीम ने वहां मिले ड्रम, टिन, कड़ाह, पिपिया और अन्य सामान को भी मौके पर नष्ट कराया ताकि आगे कोई अवैध निर्माण न हो सके।
आबकारी निरीक्षक प्रतिभा सिंह की टीम के मुताबिक, छापेमारी के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी पहचान जुटाई जा रही है। फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टीम ने गांव और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही संदिग्ध गतिविधियों को चिह्नित करने की कार्रवाई भी तेज कर दी है।
जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र ने कहा कि अवैध शराब का कारोबार न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लोगों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ भी है। उन्होंने बताया कि कच्ची शराब की वजह से हर साल कई हादसे और गंभीर बीमारियां सामने आती हैं, इसलिए विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ठिकानों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि कारोबारियों को दोबारा पनपने का मौका न मिले। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कहीं भी ऐसी गतिविधि दिखे तो तुरंत विभाग या पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल की कार्रवाइयों से अवैध शराब बनाने वालों में डर का माहौल है और विभाग इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है।
उद्योग बनाम विभाग : सीईटीपी क्षमता पर खिंची रस्साकशी, रिपोर्ट पर टिकी उम्मीद
Sat, Dec 6, 2025
जल निगम एमडी ने किया निरीक्षण, टेनरियों से 10 साल का उत्पादन रिकॉर्ड तलब
उन्नाव। दही औद्योगिक क्षेत्र का कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पिछले कई वर्षों से आधी क्षमता पर ही चलता आ रहा है। तकनीकी सुधार, क्षमता वृद्धि और लागत बंटवारे को लेकर उद्योगों और विभागों के बीच बनी खींचतान अब भी खत्म नहीं हुई है। हालात यह हैं कि प्लांट के अपग्रेडेशन पर बार-बार मीटिंग होती है, प्रस्ताव बनते हैं, लेकिन असली फैसले रिपोर्टों के अभाव और उद्यमियों की आपत्तियों में उलझ जाते हैं।
इसी जटिल स्थिति को सुलझाने के लिए जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर शुक्रवार को पांच सदस्यीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीईटीपी की मौजूदा क्षमता, प्रदूषण लोड, क्रोमियम रिमूवल सिस्टम और टेनरियों की उत्पादन स्थिति को एक-एक करके परखा। बैठक में ये बात साफ सामने आई कि उत्पादन कम होने का तर्क देकर उद्यमी क्षमता घटाने की मांग कर रहे हैं, जबकि विभाग फैक्ट्री-स्तर पर लगे क्रोमियम प्लांटों और पानी की गुणवत्ता की ठोस जांच के बाद ही आगे बढ़ना चाहता है। अब पूरा मामला उस विस्तृत रिपोर्ट पर टिक गया है, जिसे एक सप्ताह और तीन दिन की समय सीमा में तैयार करना है। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर तय होगा कि सीईटीपी की क्षमता बढ़ेगी, घटेगी या मौजूदा ढांचे में ही सुधार होगा।
उद्यमियों ने कहा, उत्पादन घटा… क्षमता भी घटाई जाए
सीईटीपी से जुड़े 16 उद्यमियों ने साफ कहा कि चर्म उत्पादन साल दर साल घट रहा है। ऐसे में प्लांट की क्षमता पहले जैसी रखना व्यावहारिक नहीं है। उद्यमियों ने यह भी दावा किया कि फैक्टरियों में निजी स्तर पर क्रोमियम रिमूवल प्लांट पहले से लगे हैं और इन्हें दोबारा लगाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
ऑनलाइन मीटिंग में एनएमसीजी के प्रतिनिधि और जिलाधिकारी ने भी अपने सुझाव रखे।
10 साल का पूरा रिकॉर्ड एक हफ्ते में
प्रबंध निदेशक ने उद्यमियों को निर्देश दिया कि पिछले दस वर्षों में उत्पादन कितना रहा, उसकी पूरी जानकारी एक सप्ताह में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि डाटा स्पष्ट होगा तो क्षमता बढ़ाने या घटाने पर असली फैसला लिया जा सकेगा।
क्रोमियम प्लांट की जांच, पानी की क्वालिटी टेस्ट कराने का आदेश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर को सभी टेनरियों में लगे क्रोमियम रिमूवल प्लांट की मौके पर जांच करने को कहा गया है। इसके साथ ही फैक्टरियों के आउटलेट और सीईटीपी इनलेट से पानी के नमूने लेकर लैब में परीक्षण कराने और एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। शोधित पानी की अलग रिपोर्ट तीन दिन में देनी होगी। एमडी ने साफ कहा कि वास्तविक प्रदूषण लोड और फैक्टरियों की क्षमता के आधार पर ही आगे का मॉडल तय होगा।
छह साल से 50 प्रतिशत पर चल रहा प्लांट
सीईटीपी पिछले छह वर्षों से मात्र 50 प्रतिशत डिस्चार्ज पर चल रहा है। कई बार मीटिंग हुई, पर कोई ठोस फैसला नहीं निकल पाया। उद्यमी अपने हिस्से की लागत को ज्यादा बताते हुए भुगतान करने में पीछे हट रहे थे। अब डीएम गौरांग राठी को सीईटीपी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पहले 114 करोड़ रुपये की लागत से 2.6 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट बनना था और टेंडर भी जारी हो चुका था। नई योजना के अनुसार अब 1.4 एमएलडी का प्लांट तैयार किया जाएगा जिसकी लागत 67 करोड़ तय हुई है। इसमें 25 प्रतिशत हिस्सा उद्यमियों को वहन करना है। योजना को नमामि गंगे की मंजूरी मिलते ही काम शुरू किया जाएगा।
आगे का रास्ता
सीईटीपी की असली जरूरत क्या है और उद्योगों का मौजूदा प्रदूषण लोड कितना है, यह सब रिपोर्ट्स आने के बाद ही साफ होगा। हालांकि सबकी नजरें अब एक हफ्ते बाद आने वाली रिपोर्ट पर टिक गई हैं, जो तय करेगी कि दही औद्योगिक क्षेत्र में यह रुका हुआ प्रोजेक्ट फिर पटरी पर आएगा या नहीं।